दिवाली सुरक्षा और सेहत टिप्स का ग्राफ़िक

दिवाली पर सुरक्षा और सेहत के टिप्स: जलने पर फर्स्ट एड, प्रदूषण और खान-पान

दिवाली रोशनी, मिठाई और अपनों के साथ का त्योहार है। थोड़ी-सी तैयारी इसे सबके लिए सुरक्षित बना देती है। इस लेख में जलने पर शुरुआती मदद, धुएँ में बुज़ुर्गों-बच्चों और दमा के मरीज़ों की देखभाल, घर में आग से बचाव और मिठाइयों-खान-पान के आसान सुझाव हैं। इन्हें एक बार पढ़कर परिवार के साथ साझा कर लें।

जलने पर फर्स्ट एड: पहले क्या करें

पटाखे या दीये से हल्की जलन हो जाए तो घबराएँ नहीं। शुरुआती कुछ मिनट सबसे ज़रूरी होते हैं। नीचे के कदम आम तौर पर बताए गए प्राथमिक उपचार के हैं।

  • ठंडा पानी: जली जगह को सामान्य ठंडे (बर्फ़ जैसे नहीं) बहते पानी के नीचे कम से कम 10 से 20 मिनट रखें। जितनी जल्दी शुरू करें, उतना बेहतर।
  • तंग चीज़ें हटाएँ: सूजन आने से पहले अँगूठी, चूड़ी या घड़ी उतार लें। जो कपड़ा त्वचा से चिपक गया हो, उसे खींचें नहीं।
  • ढीला ढकें: ठंडा करने के बाद साफ़, रेशे न छोड़ने वाले कपड़े या क्लिंग फ़िल्म से हल्का ढक दें। कसकर न बाँधें।
  • छाले न फोड़ें: फफोले अपने आप ठीक होने दें।

क्या न लगाएँ: बर्फ़, मक्खन, तेल, टूथपेस्ट या घरेलू लेप न लगाएँ। इनसे गर्मी फँस सकती है और घाव बिगड़ सकता है।

डॉक्टर के पास कब जाएँ: जला हिस्सा हथेली से बड़ा या गहरा हो, चेहरे, आँख, हाथ, पैर, जोड़ों या शरीर के नाज़ुक हिस्सों पर हो, त्वचा सफ़ेद या काली दिखे, या धुआँ साँस में गया हो तो तुरंत चिकित्सा मदद लें। बच्चों और बुज़ुर्गों की छोटी जलन को भी डॉक्टर को दिखा लेना बेहतर है।

धुएँ और प्रदूषण में देखभाल: दमा, बुज़ुर्ग, बच्चे और पालतू

त्योहार के दिनों में कई शहरों में हवा भारी हो सकती है। हर शहर और हर साल के हालात अलग होते हैं, इसलिए अपने शहर के ताज़ा नियम और वायु गुणवत्ता की जानकारी देखें।

  • दमा के मरीज़: इन्हेलर और डॉक्टर की बताई दवा-योजना हमेशा पास रखें। खाँसी, घरघराहट या साँस फूलने पर रुककर आराम करें और ज़रूरत हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
  • बुज़ुर्ग: हृदय या फेफड़ों की समस्या वाले बुज़ुर्ग भीड़ और धुएँ से दूर रहें। अपनी नियमित दवाइयाँ समय पर लेते रहें।
  • बच्चे: बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए वे धुएँ से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं। हवा खराब लगे तो बाहर खेलना कम करें।
  • बाहर की गतिविधि: हवा खराब दिनों में दौड़ना-व्यायाम घर के अंदर करें या हल्का रखें, और बाहर जाना हो तो आम तौर पर सुबह का समय बेहतर रहता है।
  • पालतू जानवर: तेज़ आवाज़ से कुत्ते-बिल्लियाँ घबरा जाते हैं। उन्हें घर के शांत कोने में रखें, खिड़कियाँ बंद रखें और अकेला बाहर न छोड़ें।

घर में आग से बचाव

सजावट, दीये और पटाखे साथ हों तो छोटी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। ये आदतें अपनाएँ।

  • पास में पानी की बाल्टी या रेत रखें।
  • पटाखे खुली जगह पर जलाएँ और ज़रूरत भर की दूरी बनाकर खड़े रहें। इमारत, गाड़ी और सूखे पत्तों से दूर रहें।
  • सूती कपड़े पहनें। ढीले, लटकते या सिंथेटिक कपड़ों से बचें।
  • जो पटाखा न चले उसे दोबारा न जलाएँ। कुछ देर रुककर पानी में भिगो दें।
  • दीये और मोमबत्ती परदों, कागज़ की सजावट और बिजली की झालरों से दूर रखें, और घर से निकलने या सोने से पहले बुझा दें।
  • बिजली की झालरें ढीले तार या जोड़ के साथ न लगाएँ और एक सॉकेट पर ज़्यादा बोझ न डालें।
  • बच्चों को पटाखे अकेले न जलाने दें।

मिठाई और खान-पान: स्वाद के साथ सावधानी

दिवाली की मिठाइयाँ बाँटने और खाने का मज़ा तभी है जब सेहत साथ दे। कुछ आसान बातें याद रखें।

  • खरीदते समय दुकान की साफ़-सफ़ाई और मिठाई ढकी होने पर ध्यान दें। पैकेट वाले सामान पर तारीख और भंडारण निर्देश पढ़ें।
  • दूध और खोये वाली मिठाइयाँ जल्दी खराब हो सकती हैं, इन्हें जल्दी खाएँ या फ्रिज में रखें। पकी हुई चीज़ें ज़्यादा देर कमरे के तापमान पर न छोड़ें।
  • खाने और परोसने से पहले हाथ धोएँ।
  • मीठा सीमित मात्रा में खाएँ। मधुमेह या अन्य बीमारी वाले लोग अपने डॉक्टर की सलाह मानें।
  • तला-भुना और मिठाई के बीच फल, सूखे मेवे और पर्याप्त पानी को जगह दें।
  • बहुत ज़्यादा डिस्काउंट या अजीब चटख रंग वाली मिठाई के बारे में दुकानदार से पूछ लें।

एक नज़र में: क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • जलने पर ठंडा बहता पानी और ढीली पट्टी।
  • पानी या रेत पास रखें।
  • इन्हेलर और ज़रूरी दवाइयाँ हाथ के पास रखें।
  • सूती कपड़े पहनें और बच्चों पर नज़र रखें।
  • अपने शहर के ताज़ा नियम देखें।

क्या न करें

  • जले पर बर्फ़, मक्खन, तेल या टूथपेस्ट न लगाएँ।
  • न चले पटाखे को दोबारा न जलाएँ।
  • पटाखे हाथ में या बंद जगह में न जलाएँ।
  • भीड़ और धुएँ में दमा के मरीज़ों को न ले जाएँ।
  • खुली और पुरानी मिठाई न खाएँ।

आपात स्थिति में

गंभीर जलन, साँस लेने में तकलीफ़ या आग लगने पर तुरंत 112 (राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर) पर कॉल करें। कई राज्यों में एम्बुलेंस के लिए 108 भी चलता है।

यह जानकारी सामान्य है, डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग्य चिकित्सक से सलाह लें।

यह भी पढ़ें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

पटाखे से हल्का जलने पर सबसे पहले क्या करें? जली जगह को तुरंत साफ़, सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे कम से कम 10 से 20 मिनट रखें। इसके बाद साफ़ कपड़े या क्लिंग फ़िल्म से ढीला ढक दें। बर्फ़, मक्खन, तेल या टूथपेस्ट न लगाएँ।

जलने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? जला हिस्सा बड़ा या गहरा हो, चेहरे, हाथ, पैर या जोड़ों पर हो, त्वचा सफ़ेद या काली दिखे, या बच्चे और बुज़ुर्ग को जलन हुई हो तो तुरंत डॉक्टर या नज़दीकी अस्पताल जाएँ। ज़रूरत लगे तो 112 पर कॉल करें।

दमा (अस्थमा) के मरीज़ दिवाली पर क्या सावधानी रखें? इन्हेलर और डॉक्टर की बताई योजना हाथ के पास रखें, धुएँ वाली जगह और भीड़ से दूर रहें, खिड़की-दरवाज़े बंद रखें और खाँसी या साँस फूलने पर आराम करके डॉक्टर से सलाह लें।

बच्चे पटाखे जलाएँ तो क्या ध्यान रखें? बच्चों को पटाखे हमेशा किसी बड़े की निगरानी में ही जलाने दें। पास में पानी या रेत रखें, सूती कपड़े पहनाएँ और जो पटाखा न चले उसे दोबारा न जलाएँ। उसे पानी में भिगोकर अलग कर दें।

दिवाली की मिठाइयाँ सुरक्षित कैसे रखें? मिठाई ढककर रखें, दूध वाली मिठाइयाँ जल्दी खाएँ या फ्रिज में रखें, पैकेट पर तारीख और भंडारण निर्देश देखें, और खाने से पहले हाथ धोएँ।