रावल समरसिंह मेवाड़ के गुहिल वंश के शासक थे। इतिहास में उनका नाम इसलिए भी आता है क्योंकि उनके पुत्र रावल रतनसिंह के समय चित्तौड़ का 1303 का प्रसिद्ध घेरा हुआ। इस लेख में उपलब्ध स्रोतों के आधार पर उनके शासन और परिवार की जानकारी दी गई है।
रावल समरसिंह: एक नज़र में
- वंश: गुहिल (मेवाड़)
- शासनकाल: लगभग 1272-73 से 1301-02 (स्रोतों में एक साल का अंतर)
- पिता: रावल तेजसिंह (एक स्रोत के अनुसार)
- पुत्र: रतनसिंह (रत्नसिंह)
परिवार और उत्तराधिकारी
इतिहास की सामग्री में समरसिंह के पिता के रूप में तेजसिंह का नाम मिलता है। उनके बाद मेवाड़ की गद्दी उनके पुत्र रतनसिंह को मिली। रतनसिंह के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए रावल रतन सिंह का जीवन परिचय देखें।
शासनकाल की प्रमुख बातें
स्रोतों के अनुसार उनके समय गुजरात के बघेला शासक सारंगदेव की मदद से जुड़ा एक प्रसंग मिलता है। यह जानकारी एक ही इतिहास-ग्रंथ पर आधारित है, इसलिए इसे सावधानी से पढ़ना चाहिए।
अलाउद्दीन खिलजी की सेना और मेवाड़
कुछ स्रोतों में बताया गया है कि गुजरात की ओर बढ़ती खिलजी की सेना मेवाड़ से होकर गुज़री और समरसिंह के क्षेत्र में उससे जुड़ी घटनाएँ हुईं। हालाँकि हमलावर कौन था और घटनाक्रम कैसा रहा, इस पर इतिहासकारों में अनुमान और मतभेद हैं।
धर्म और संरक्षण
एक स्रोत के अनुसार चीरवा शिलालेख में उन्हें जैन धर्म का संरक्षक बताया गया है और उनके दरबार में रत्नप्रभसूरि और पार्श्वचंद्र जैसे विद्वानों का ज़िक्र है। यह जानकारी अन्य स्रोतों से भी मिलाकर देखी जानी चाहिए।
सावधानी: इतिहास और लोककथा
समरसिंह के विवाह या अन्य रिश्तों को लेकर इंटरनेट पर कई कहानियाँ मिलती हैं। हमने केवल वही बातें लिखी हैं जिनकी पुष्टि कम से कम दो स्रोतों से हो सकी; बाकी बातें लोककथा या अनुमान मानी जानी चाहिए।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रावल समरसिंह कौन थे? रावल समरसिंह मेवाड़ के गुहिल वंश के शासक थे। वे चित्तौड़ के रावल रतनसिंह के पिता माने जाते हैं।
रावल समरसिंह ने कब शासन किया? स्रोतों के अनुसार उनका शासन लगभग 1272-73 से 1301-02 के बीच रहा; अलग-अलग स्रोतों में वर्ष एक साल के अंतर से मिलते हैं।
रावल समरसिंह के पुत्र कौन थे? उनके पुत्रों में रतनसिंह (रत्नसिंह) का नाम प्रमुख है, जो उनके बाद मेवाड़ के शासक बने।
क्या समरसिंह का अलाउद्दीन खिलजी से सामना हुआ? स्रोतों के अनुसार गुजरात जाते समय खिलजी की सेना मेवाड़ से गुज़री और समरसिंह से जुड़ी घटनाओं का ज़िक्र मिलता है। कुछ ब्योरे अनुमान पर आधारित हैं, इसलिए इतिहासकारों में मतभेद है।
रावल समरसिंह जैन धर्म से कैसे जुड़े माने जाते हैं? एक स्रोत के अनुसार चीरवा शिलालेख में उन्हें जैन धर्म का संरक्षक बताया गया है।



