किसान और सोलर पंप

पीएम कुसुम योजना क्या है: सब्सिडी, पात्रता, आवेदन कैसे करें

पीएम कुसुम योजना (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) किसानों को सोलर बिजली से जोड़ने वाली केंद्र सरकार की योजना है। इसके तीन हिस्से हैं: खेत की जमीन पर छोटे सोलर प्लांट (कंपोनेंट A), अलग से चलने वाले सोलर पंप (कंपोनेंट B) और पहले से बिजली से चल रहे पंप को सोलर पर लाना (कंपोनेंट C)। सोलर पंप पर केंद्र सरकार 30 प्रतिशत खर्च देती है (पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों और द्वीपों में 50 प्रतिशत), बाकी किसान या राज्य को देना होता है। जानकारी अक्टूबर 2026 में आखिरी बार जांची गई है।

कुसुम योजना एक नज़र में

बातजानकारी
शुरुआतमार्च 2019; 2023 में विस्तार
केंद्र की वित्तीय सहायता34,422 करोड़ रुपये (सेवा शुल्क सहित)
कुल क्षमता का लक्ष्य34,800 मेगावाट; 31 मार्च 2026 तक 13.11 गीगावाट लगी (MNRE के आंकड़े, जैसे रिपोर्ट हुए)
मौजूदा स्थितिपहला चरण: जिन परियोजनाओं में 31 दिसंबर 2025 तक PPA या काम शुरू करने का नोटिस जारी हो गया, उनके पूरा होने की समय सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ी
अगला चरणपीएम कुसुम 2.0 की तैयारी है; अक्टूबर 2026 तक औपचारिक अधिसूचना नहीं
आखिरी जांचअक्टूबर 2026

कुसुम योजना के तीन हिस्से आसान भाषा में

हिस्साक्या शामिल हैलक्ष्यअब तक की प्रगति (रिपोर्ट के अनुसार)
Aबंजर, खाली या खेती की जमीन पर छोटे ग्रिड-जुड़े सोलर प्लांट, बिजली डिस्कॉम को बेची जाती है10,000 मेगावाट30 अप्रैल 2026 तक 1,202 मेगावाट; 30 जून 2026 तक 1,726.92 मेगावाट (संसद में जवाब)
Bग्रिड से अलग, स्टैंड-अलोन सोलर वाटर पंप14 लाख पंप10.9 लाख लगे, करीब 13.07 लाख मंजूर (30 अप्रैल 2026)
Cपहले से ग्रिड से चल रहे खेती के पंप को सोलर पर लाना, या पूरे फीडर का सोलराइजेशन35 लाख पंप (B और C मिलाकर बाद में 49 लाख)करीब 15,000 व्यक्तिगत पंप और 15.7 लाख पंप फीडर स्तर पर (30 अप्रैल 2026)

इन आंकड़ों से साफ दिखता है कि सोलर पंप (B) और फीडर सोलराइजेशन तेजी से आगे बढ़े हैं, जबकि प्लांट वाला हिस्सा A और अकेले पंप का सोलराइजेशन धीमा रहा है। किसान के लिए यह जानकारी काम की है, क्योंकि पता चलता है कि योजना का फायदा असल में कहां पहुंच रहा है।

कंपोनेंट A: अपनी जमीन पर सोलर प्लांट

इसमें सबस्टेशन के पास छोटे प्लांट लगते हैं और बिजली स्थानीय डिस्कॉम को बेची जाती है। जिस किसान के पास सही जगह की जमीन है, वह उसे लीज पर दे सकता है या खुद प्लांट चलाकर आमदनी कमा सकता है। योजना के दिशानिर्देशों के मुताबिक, जैसा मुझे पता है, प्लांट 500 किलोवाट से 2 मेगावाट के दायरे में होते हैं, पर सही सीमा अपने राज्य की नोडल एजेंसी से पूछ लें।

इस हिस्से में किसान को सीधी सब्सिडी नहीं मिलती। डिस्कॉम को बिजली खरीदने पर प्रोत्साहन मिलता है: 40 पैसे प्रति यूनिट या 6.60 लाख रुपये प्रति मेगावाट प्रति वर्ष, जो भी कम हो, व्यावसायिक संचालन शुरू होने से पांच साल तक। यह करीब 33 लाख रुपये प्रति मेगावाट बैठता है। जमीन मालिक की कमाई बिजली बेचने के समझौते (PPA) से होती है, इसलिए आपके राज्य आयोग का तय किया हुआ टैरिफ बहुत मायने रखता है।

इस हिस्से की प्रगति सबसे कमजोर है। सितंबर 2025 की एक रिपोर्ट में सिर्फ करीब 650 मेगावाट लगने की बात थी और कई राज्यों में कुछ भी नहीं लगा था। लोन मिलना एक बड़ी अड़चन रहा है; मंत्रालय ने खुद माना कि बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से कम कर्ज मिलने से फाइनेंशियल क्लोजर में देरी हुई।

कंपोनेंट B: सोलर पंप पर कितनी सब्सिडी?

यह योजना का सबसे लोकप्रिय हिस्सा है। इसमें डीजल पंप की जगह ग्रिड से अलग चलने वाला सोलर पंप लगता है। केंद्र सरकार बेंचमार्क लागत या टेंडर कीमत, जो भी कम हो, उसका 30 प्रतिशत देती है। पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और द्वीपों में, जैसे सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार, केंद्र का हिस्सा 50 प्रतिशत है।

कौन कितना देता हैसामान्य राज्यपूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्य, द्वीप
केंद्र सरकार30%50%
किसान (राज्य का हिस्सा या लोन सहित)70%50%

IBEF के योजना-पेज के अनुसार, 2023 के एक कार्यालय ज्ञापन से राज्य के लिए तय 30 प्रतिशत हिस्सेदारी की शर्त हटा दी गई थी। इसलिए किसान को कितना देना है, यह इस पर निर्भर करता है कि आपका राज्य अलग से सब्सिडी देता है या नहीं। कई राज्य अलग से भी सब्सिडी देते हैं, तो आपका असली भुगतान 70 प्रतिशत से काफी कम हो सकता है। पंप की सही कीमत और राज्य का हिस्सा अपनी राज्य एजेंसी से पूछें।

कंपोनेंट C: ग्रिड वाले पंप को सोलर पर लाना

जिस किसान के पास पहले से बिजली से चलने वाला पंप है, वह उसमें सोलर पैनल जुड़वा सकता है। अलग-अलग पंप के लिए केंद्र की सहायता 30 प्रतिशत है, और विशेष श्रेणी वाले राज्यों में 50 प्रतिशत। फीडर स्तर पर सोलराइजेशन में, जहां पूरे खेती वाले फीडर को सोलर से चलाया जाता है, केंद्र की सहायता 1.05 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट है और राज्य का हिस्सा अनिवार्य नहीं है। यह पूंजी निवेश या RESCO मॉडल से हो सकता है। जिस फीडर का सोलराइजेशन हो रहा है, उस पर किसान अलग से आवेदन नहीं कर सकते; फैसला डिस्कॉम या राज्य एजेंसी लेती है। इसी वजह से फीडर के आंकड़े अकेले पंप से बहुत ज्यादा हैं।

कुसुम योजना के लिए पात्रता: कौन आवेदन कर सकता है?

  • योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार: अकेले किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें और किसान उत्पादक संगठन (FPO)। अपने राज्य में पुष्टि कर लें।
  • B और C के पंप के लिए: खेत और पानी का स्रोत होना चाहिए। B में वे किसान जिनके पास भरोसेमंद ग्रिड कनेक्शन नहीं है, और C में वे जिनका पहले से ग्रिड पंप है।
  • A के लिए: सबस्टेशन के पास उपयुक्त जमीन के मालिक।

जरूरी दस्तावेज़

पूरे देश के लिए कोई एक पक्की दस्तावेज़ सूची मुझे नहीं मिली, क्योंकि आवेदन राज्य की नोडल एजेंसियां और डिस्कॉम संभालती हैं। आम तौर पर जमीन के कागज (खसरा-खतौनी या ऐसा रिकॉर्ड), आधार कार्ड, बैंक खाता और हाल का पासपोर्ट फोटो मांगे जाते हैं। यह सामान्य अंदाज है, नियम नहीं।

कुसुम योजना में आवेदन कैसे करें?

  1. पता करें कि आपके राज्य में मंजूरी चालू है या नहीं। क्षमता राज्य के हिसाब से बंटती है, इसलिए आवेदन तभी खुलते हैं जब आपके राज्य ने बुलाए हों।
  2. राज्य की नोडल एजेंसी से मिलें। जैसे राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी, या अपनी बिजली कंपनी (डिस्कॉम)। कई राज्यों का अपना कुसुम पोर्टल भी है।
  3. आवेदन जमा करें। जमीन और पहचान के कागज लगाइए और जब कहा जाए तब अपना हिस्सा जमा कीजिए।
  4. पैनलबद्ध (एम्पैनल्ड) वेंडर साइट देखकर पंप या प्लांट लगाएगा।
  5. कमिशनिंग के कागज संभालकर रखें। सब्सिडी आपके राज्य की प्रथा के अनुसार वेंडर को दी जाती है या आपके भुगतान में समायोजित होती है।

ताजा बदलाव: समय सीमा और पीएम कुसुम 2.0

मूल योजना मार्च 2026 में खत्म होनी थी। उसके बाद मंत्रालय ने उन परियोजनाओं की पूरा होने की समय सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी, जिनमें 31 दिसंबर 2025 तक या उससे पहले PPA या काम शुरू करने का नोटिस जारी हो चुका था। यह जानकारी मार्च 2026 में Energetica India ने छापी थी। एक बाद की ट्रेड रिपोर्ट के अनुसार कंपोनेंट A और C के लिए फाइनेंशियल क्लोजर की समय सीमा 30 नवंबर 2026 कर दी गई और आगे बढ़ोतरी नहीं होगी। इस आखिरी बात की पुष्टि मैं MNRE के किसी पेज पर नहीं कर सका, इसलिए इसे रिपोर्ट के तौर पर ही लें।

पीएम कुसुम 2.0 को अगला कदम माना जा रहा है। केंद्रीय बजट 2026-27 में कुसुम के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये रखे गए। रिपोर्टों में 50,000 करोड़ रुपये के संभावित खर्च, 10 गीगावाट के एग्रीवोल्टैइक्स और बैटरी स्टोरेज की बात है, पर जब तक कैबिनेट मंजूरी न दे और मंत्रालय अधिसूचना जारी न करे, ये सब आधिकारिक नहीं हैं। अफवाह वाले सब्सिडी प्रतिशत पर भरोसा न करें।

किसानों के लिए जरूरी सावधानियां

  • कुसुम रजिस्ट्रेशन के नाम पर किसी बिचौलिये को पैसे मत दीजिए। अपनी राज्य एजेंसी या डिस्कॉम से सीधे संपर्क करें।
  • सिर्फ पैनलबद्ध सप्लायर का पंप लीजिए और वारंटी लिखित में लीजिए।
  • पैसा देने से पहले मंजूरी पत्र और पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगिए।
  • पता कीजिए कि आपका राज्य अलग से कोई सब्सिडी देता है या नहीं। इससे आपका हिस्सा बहुत घट सकता है।
  • नकली वेबसाइटों और फोन कॉल से सावधान रहें जो पंप मुफ्त देने का दावा करती हैं।

निष्कर्ष

किसान के लिए डीजल या बिजली का खर्च घटाने के सबसे मजबूत रास्तों में पीएम कुसुम आज भी गिनी जाती है, खासकर कंपोनेंट B के सोलर पंप। चूंकि योजना पहले चरण से नियोजित 2.0 की ओर बढ़ रही है, सबसे सुरक्षित कदम यह है कि आप आज ही अपने राज्य की नोडल एजेंसी से पूछें कि आपके जिले में क्या खुला है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

पीएम कुसुम योजना क्या है?
यह किसानों को सोलर बिजली देने की केंद्र की योजना है। इसमें छोटे सोलर प्लांट (A), सोलर पंप (B) और ग्रिड वाले पंप को सोलर पर लाना (C) शामिल हैं।

कुसुम योजना में सोलर पंप पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
केंद्र सरकार बेंचमार्क या टेंडर लागत का 30 प्रतिशत देती है, और पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों व द्वीपों में 50 प्रतिशत। आपका राज्य अपनी तरफ से भी कुछ जोड़ सकता है।

कुसुम योजना में आवेदन कैसे करें?
आवेदन राज्य की नोडल एजेंसी या डिस्कॉम के जरिये होता है। पहले पता करें कि आपके जिले में मंजूरी खुली है या नहीं, फिर जमीन और पहचान के कागजों के साथ आवेदन दें।

क्या 2026 में पीएम कुसुम योजना चालू है?
31 दिसंबर 2025 तक मंजूरी पा चुकी परियोजनाओं को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने की छूट है। पीएम कुसुम 2.0 की औपचारिक घोषणा अक्टूबर 2026 तक नहीं हुई थी।

कुसुम योजना के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?
आम तौर पर जमीन के कागज, आधार, बैंक खाता और फोटो चाहिए। सही सूची आपके राज्य की एजेंसी तय करती है, इसलिए पहले उनसे पूछ लें।

फीडर लेवल सोलराइजेशन क्या होता है?
इसमें पूरे खेती वाले फीडर को सोलर से चलाया जाता है और केंद्र 1.05 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की सहायता देता है। इसमें किसान अलग से आवेदन नहीं करते, डिस्कॉम या राज्य एजेंसी फैसला लेती है।