महात्मा गांधी पर निबंध स्कूल की परीक्षाओं, निबंध प्रतियोगिताओं और भाषण के लिए सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले विषयों में से एक है। मोहनदास करमचंद गांधी को पूरी दुनिया सत्य और अहिंसा के प्रतीक के रूप में जानती है। भारत उन्हें प्यार से ‘बापू’ कहता है और ‘राष्ट्रपिता’ के रूप में याद करता है। इस लेख में आपको गांधीजी के जीवन, संघर्ष और विचारों पर एक पूरा निबंध मिलेगा, साथ ही 10 लाइन का छोटा निबंध और परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब भी।
महात्मा गांधी: एक नज़र में
| पूरा नाम | मोहनदास करमचंद गांधी |
| जन्म | 2 अक्टूबर 1869, पोरबंदर (काठियावाड़, गुजरात) |
| निधन | 30 जनवरी 1948, नई दिल्ली (उम्र 78 वर्ष) |
| माता-पिता | पुतलीबाई और करमचंद गांधी |
| पत्नी | कस्तूरबा गांधी |
| प्रसिद्ध उपनाम | बापू, महात्मा, राष्ट्रपिता |
| प्रमुख आंदोलन | चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन |
| प्रसिद्ध पुस्तकें | हिंद स्वराज, सत्य के प्रयोग (आत्मकथा) |
| जयंती | 2 अक्टूबर (गांधी जयंती और अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस) |
प्रस्तावना
इतिहास में कुछ ही लोग ऐसे हुए हैं जिन्होंने हथियार उठाए बिना एक विशाल साम्राज्य को चुनौती दी। महात्मा गांधी उन्हीं में से एक थे। उनका मानना था कि साधन और साध्य दोनों शुद्ध होने चाहिए। उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा को अपना हथियार बनाया और करोड़ों भारतीयों को आज़ादी की लड़ाई से जोड़ा। उनकी सादगी, उनका आत्मबल और उनका नैतिक साहस आज भी लोगों को प्रेरणा देता है।
जन्म और बचपन
गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे और माता पुतलीबाई बहुत धार्मिक स्वभाव की महिला थीं। माँ के व्रत, उपवास और सादे जीवन का गहरा असर बालक मोहनदास पर पड़ा। बचपन में वे शर्मीले थे और पढ़ाई में औसत माने जाते थे, लेकिन सच बोलने की आदत उन्हें शुरू से ही प्रिय थी। राजा हरिश्चंद्र नाटक और श्रवण कुमार की कथा ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी, ऐसा उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है।
सन् 1883 में, केवल 13 वर्ष की उम्र में उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ। उस समय बाल विवाह का चलन था। बाद में गांधीजी ने स्वयं बाल विवाह के विरोध में अपने विचार रखे।
शिक्षा और विदेश यात्रा
प्रारंभिक पढ़ाई पोरबंदर और राजकोट में हुई। वर्ष 1888 में वे कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए और वहाँ से बैरिस्टर बनकर लौटे। इंग्लैंड जाने से पहले उन्होंने माँ को वचन दिया था कि वे शराब, मांस और पराई स्त्री से दूर रहेंगे। उन्होंने यह वचन निभाया। भारत लौटकर वकालत शुरू करने में शुरुआती दिनों में उन्हें कठिनाई हुई, इसलिए एक मुकदमे के सिलसिले में वे दक्षिण अफ्रीका गए।
दक्षिण अफ्रीका का अनुभव
सन् 1893 में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका पहुँचे। वहाँ रंगभेद के कारण उन्हें अपमान सहना पड़ा। एक यात्रा के दौरान पहले दर्जे का टिकट होने के बावजूद उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया। इस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने तय किया कि वे अन्याय के सामने झुकेंगे नहीं, लेकिन हिंसा का रास्ता भी नहीं अपनाएँगे। यहीं उन्होंने सत्याग्रह का प्रयोग शुरू किया। लगभग दो दशक वहाँ रहकर उन्होंने प्रवासी भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। इसी दौरान उन्होंने फीनिक्स फार्म और टॉलस्टॉय फार्म जैसे प्रयोग भी किए।
भारत वापसी और स्वतंत्रता आंदोलन
सन् 1915 में गांधीजी भारत लौटे। गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर उन्होंने पहले देश को समझने के लिए यात्राएँ कीं। इसके बाद अहमदाबाद में साबरमती आश्रम की स्थापना हुई। उनके प्रमुख आंदोलन नीचे दिए गए हैं।
- चंपारण सत्याग्रह (1917): बिहार के चंपारण में नील की खेती के लिए मजबूर किसानों के पक्ष में भारत का उनका पहला बड़ा सत्याग्रह।
- खेड़ा सत्याग्रह और अहमदाबाद मिल आंदोलन (1918): किसानों और मज़दूरों के हक़ के लिए संघर्ष।
- असहयोग आंदोलन (1920-22): विदेशी वस्तुओं और संस्थाओं के बहिष्कार का राष्ट्रव्यापी आंदोलन। चौरी-चौरा की हिंसा के बाद उन्होंने इसे वापस ले लिया।
- दांडी मार्च (1930): नमक कानून तोड़ने के लिए 12 मार्च को साबरमती आश्रम से शुरू हुई यात्रा, जो 6 अप्रैल को दांडी पहुँची। इसे सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत माना जाता है।
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 8 अगस्त 1942 को ‘करो या मरो’ के नारे के साथ अंग्रेज़ों से भारत छोड़ने की माँग।
इन आंदोलनों ने आम किसान, महिला, मज़दूर और विद्यार्थी को आज़ादी की लड़ाई का हिस्सा बनाया। 15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद हुआ। आज़ादी के बारे में और जानने के लिए आप हमारा स्वतंत्रता दिवस पर भाषण और निबंध भी पढ़ सकते हैं।
गांधीजी के विचार और सिद्धांत
- सत्य: उनके अनुसार सत्य ही ईश्वर है। इसी भाव से उन्होंने आत्मकथा का नाम ‘सत्य के प्रयोग’ रखा।
- अहिंसा: विचार, वाणी और कर्म, तीनों से किसी को कष्ट न देना।
- सादा जीवन: चरखा चलाना, खादी पहनना और कम से कम ज़रूरतों में जीना।
- स्वदेशी और आत्मनिर्भरता: गाँवों को मज़बूत करना और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना।
- छुआछूत का विरोध: उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के सम्मान के लिए काम किया और ‘हरिजन’ नाम से पत्र निकाला।
- सर्वधर्म समभाव: सभी धर्मों के प्रति सम्मान और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश।
उनके प्रेरक कथनों को पढ़ना चाहें तो महात्मा गांधी के अनमोल विचार पेज देखें।
लेखन और पत्रकारिता
गांधीजी एक कुशल लेखक और संपादक भी थे। उन्होंने ‘इंडियन ओपिनियन’, ‘यंग इंडिया’, ‘नवजीवन’ और ‘हरिजन’ जैसे पत्रों के माध्यम से अपने विचार जनता तक पहुँचाए। ‘हिंद स्वराज’ (1909) में उन्होंने स्वराज और सभ्यता पर अपने विचार रखे। उनकी आत्मकथा मूल रूप से गुजराती में ‘सत्य ना प्रयोगो’ नाम से लिखी गई और अंग्रेज़ी में ‘The Story of My Experiments with Truth’ के रूप में प्रसिद्ध हुई।
निधन
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा की ओर जाते समय नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। पूरा देश शोक में डूब गया। उनकी समाधि दिल्ली के राजघाट पर है। हर वर्ष 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
आज के समय में गांधीजी की प्रासंगिकता
आज जब दुनिया में टकराव, असमानता और उपभोग की होड़ बढ़ रही है, गांधीजी के विचार और भी ज़रूरी लगते हैं। स्वच्छता, ग्राम स्वराज, सादगी, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और संवाद से समस्या सुलझाने की उनकी सोच हमें रास्ता दिखाती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में उनके जन्मदिन 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। उनके बारे में रोचक जानकारियाँ महात्मा गांधी से जुड़े रोचक तथ्य में पढ़ें, और विस्तृत जीवन परिचय के लिए महात्मा गांधी की जीवनी देखें।
उपसंहार
महात्मा गांधी केवल एक नेता नहीं, एक विचार थे। उन्होंने सिखाया कि सच्ची ताक़त हथियारों में नहीं, चरित्र और सच्चाई में होती है। यदि हम उनके बताए रास्ते पर थोड़ा भी चलें, ईमानदारी, सफ़ाई, सहनशीलता और सेवा को अपनाएँ, तो यही उनके प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
महात्मा गांधी पर 10 लाइन का निबंध
- महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
- उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।
- उनके पिता करमचंद गांधी और माता पुतलीबाई थीं।
- वे इंग्लैंड से कानून की पढ़ाई करके बैरिस्टर बने।
- दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने रंगभेद के खिलाफ सत्याग्रह शुरू किया।
- भारत में उन्होंने असहयोग, दांडी मार्च और भारत छोड़ो जैसे आंदोलन चलाए।
- सत्य और अहिंसा उनके जीवन के दो मुख्य सिद्धांत थे।
- लोग उन्हें प्यार से बापू और राष्ट्रपिता कहते हैं।
- 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या कर दी गई।
- उनकी जयंती 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाई जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
महात्मा गांधी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।
महात्मा गांधी का पूरा नाम क्या था?
उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
गांधीजी को राष्ट्रपिता क्यों कहा जाता है?
स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने और अहिंसक नेतृत्व देने के कारण लोग उन्हें राष्ट्रपिता कहते हैं। कहा जाता है कि सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में रेडियो संबोधन में उन्हें यह संबोधन दिया था। यह कोई संवैधानिक उपाधि नहीं है।
गांधीजी की मृत्यु कब और कैसे हुई?
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला हाउस में गोली लगने से उनकी मृत्यु हुई। उस समय उनकी उम्र 78 वर्ष थी।
गांधीजी ने कौन-कौन से प्रमुख आंदोलन चलाए?
चंपारण सत्याग्रह (1917), खेड़ा सत्याग्रह (1918), असहयोग आंदोलन (1920), दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) उनके प्रमुख आंदोलन हैं।
दांडी मार्च कब हुआ था?
दांडी मार्च 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुआ और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़कर पूरा हुआ।
गांधीजी की आत्मकथा का नाम क्या है?
उनकी आत्मकथा का नाम ‘सत्य के प्रयोग’ है, जिसे अंग्रेज़ी में ‘The Story of My Experiments with Truth’ कहा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस कब मनाया जाता है?
हर वर्ष 2 अक्टूबर को, गांधीजी के जन्मदिन पर। संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में इसे घोषित किया था।