धन की देवी माँ लक्ष्मी (Laxmi Chalisa)

Laxmi Chalisa PDF Download in Hindi | श्री लक्ष्मी चालीसा Lyrics

श्री लक्ष्मी चालीसा (Laxmi Chalisa in Hindi) धन, समृद्धि और सुख की देवी माँ लक्ष्मी को समर्पित भक्ति-रचना है। श्रद्धालु शुक्रवार के दिन, दिवाली पूजन में और रोज़ की पूजा में इसका पाठ करते हैं। नीचे पूरी लक्ष्मी चालीसा हिंदी लिरिक्स (Laxmi Chalisa Lyrics in Hindi) दी गई है, और Laxmi Chalisa PDF डाउनलोड करने का बटन पेज के अंत में है।

लक्ष्मी चालीसा एक नज़र में (Laxmi Chalisa at a Glance)

  • किसे समर्पित: माँ लक्ष्मी (धन और समृद्धि की देवी)
  • स्वरूप: दोहा और चौपाई में लिखी भक्ति-रचना
  • पाठ का समय: शुक्रवार, दिवाली, रोज़ सुबह या शाम
  • अंत में आने वाला नाम: रामदास (अंतिम दोहे में)
  • PDF: इसी पेज पर मुफ़्त डाउनलोड

सम्पूर्ण श्री लक्ष्मी चालीसा (Laxmi Chalisa Lyrics in Hindi)

दोहा

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

चौपाई

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही।
ज्ञान बुद्धि विघा दो मोही॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी।
सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी।
विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी।
दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी।
कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी।
सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी।
जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता।
संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो।
चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा।
रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी।
विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी।
कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई।
मन इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई।
पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई।
जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई।
मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि।
त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै।
ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै।
पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु संपति हीना।
अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै।
शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा।
ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।
कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा।
तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही।
उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई।
लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा।
होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी।
सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं।
तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै।
संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी।
दर्शन दजै दशा निहारी॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी।
तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में।
सब जानत हो अपने मन में॥
रुप चतुर्भुज करके धारण।
कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई।
ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥

दोहा

त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥

रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

॥ इति श्री लक्ष्मी चालीसा ॥

लक्ष्मी चालीसा का पाठ कैसे करें? (Path Vidhi)

परंपरा के अनुसार सुबह या शाम को शांत जगह पर स्वच्छ कपड़े पहनकर माँ लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाकर पाठ किया जाता है। शुक्रवार का दिन माँ लक्ष्मी का माना जाता है, इसलिए इस दिन पाठ को शुभ समझा जाता है। पाठ एकाग्र मन से करें, और चाहें तो रोज़ एक बार पढ़ सकते हैं।

लक्ष्मी चालीसा पढ़ने के लाभ (मान्यताओं के अनुसार)

श्रद्धालुओं की मान्यता है कि लक्ष्मी चालीसा के नियमित पाठ से मन में शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मकता आती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह आस्था की बात है; आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सही योजना, मेहनत और बचत भी ज़रूरी है।

लक्ष्मी चालीसा से जुड़े सवाल (FAQ)

लक्ष्मी चालीसा PDF कहाँ से डाउनलोड करें?

इसी पेज के अंत में दिए "Laxmi Chalisa (Hindi) PDF Download" बटन पर क्लिक करके आप मुफ़्त PDF डाउनलोड कर सकते हैं।

लक्ष्मी चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

शुक्रवार को, दिवाली की पूजा में और रोज़ सुबह या शाम के समय इसका पाठ आम तौर पर किया जाता है।

क्या लक्ष्मी चालीसा रोज़ पढ़ सकते हैं?

जी हाँ। कई श्रद्धालु इसे रोज़ पढ़ते हैं। इसके लिए कोई कड़ा नियम नहीं है, श्रद्धा और शांत मन मुख्य बात है।

लक्ष्मी चालीसा लिखित में कहाँ मिलेगी?

पूरी लक्ष्मी चालीसा हिंदी लिरिक्स इसी पेज पर ऊपर लिखित में दी गई है।

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। लाभ आस्था का विषय हैं।

लक्ष्मी चालीसा PDF डाउनलोड (Laxmi Chalisa PDF Download)

पूरी लक्ष्मी चालीसा मुफ़्त PDF में पाने के लिए नीचे दिए बटन पर क्लिक करें।