भगवान नृसिंह (Narasimha Mantra)

Narasimha Mantra in Hindi | श्री नृसिंह मंत्र (उग्रं वीरं महाविष्णुं) अर्थ सहित

नृसिंह मंत्र (Narasimha Mantra) भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित प्रसिद्ध संस्कृत मंत्र है। मान्यता है कि भगवान नृसिंह अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। इस पेज पर मंत्र, उसका हिंदी भावार्थ, जाप की सरल विधि और अक्सर पूछे जाने वाले सवाल दिए गए हैं।

श्री नृसिंह मंत्र एक नज़र में

  • मंत्र: उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्
  • देवता: भगवान नृसिंह (विष्णु के अवतार)
  • भाषा: संस्कृत मंत्र, हिंदी भावार्थ
  • विशेष दिन: नृसिंह जयंती, जो परंपरा में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है

नृसिंह मंत्र और उसका हिंदी भावार्थ

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् ।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥

भावार्थ:
ॐ हे क्रुद्ध एवं शूर-वीर महाविष्णु, आपकी ज्वाला एवं ताप चारों दिशाओं में फैली हुई है।
हे नरसिंहदेव प्रभु, आपका चेहरा सर्वव्यापी है, तुम मृत्यु के भी यम हो और मैं आपके समक्ष आत्मसमर्पण करता हूँ।

नृसिंह मंत्र का जाप कैसे करें

सुबह स्नान के बाद साफ़ स्थान पर भगवान नृसिंह या विष्णु जी के चित्र के सामने दीपक जलाएँ। फिर शांत मन से श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप करें। जाप की संख्या अपनी परंपरा या किसी जानकार पंडित की सलाह से तय करें। नृसिंह जयंती पर इसका जाप विशेष माना जाता है।

जाप के लाभ (मान्यता के अनुसार)

मान्यता है कि नृसिंह मंत्र के जाप से भय दूर होता है और मन को साहस मिलता है। ये लाभ आस्था पर आधारित हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नृसिंह भगवान कौन हैं?

पौराणिक कथा के अनुसार नृसिंह भगवान विष्णु का अवतार हैं, जिनका रूप आधा मनुष्य और आधा सिंह का है। कथा में उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी।

नृसिंह मंत्र का जाप कब करें?

आमतौर पर सुबह की पूजा में और नृसिंह जयंती पर। इसके लिए कोई एक निश्चित समय अनिवार्य नहीं माना जाता।

नृसिंह मंत्र का अर्थ क्या है?

मंत्र में भगवान नृसिंह को उग्र, वीर और महाविष्णु कहकर नमन किया गया है। पूरा हिंदी भावार्थ ऊपर दिया गया है।

यह भी पढ़ें: विश्वकर्मा अष्टकम | श्री राम स्तुति

नोट: यहाँ बताए गए लाभ और नियम धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।