।। भगवान धन्वंतरि जी की आरती ।। Shri Dhanvantri Aarti
श्री धन्वंतरि आरती (Dhanvantri Aarti) भगवान धन्वंतरि की स्तुति में गाई जाती है। परंपरा में उन्हें आयुर्वेद का देवता माना जाता है और धनतेरस पर उनकी पूजा की जाती है। आरती के पूरे बोल नीचे दिए गए हैं।
श्री धन्वंतरि आरती एक नज़र में
- आरती: श्री धन्वंतरि आरती
- देवता: भगवान धन्वंतरि, जिन्हें आयुर्वेद के देवता माना जाता है
- कब करें: धनतेरस के दिन पूजा के समय
श्री धन्वंतरि आरती के बोल (Dhanvantri Aarti Lyrics)
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
जय धन्वंतरि देवा…
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।
जय धन्वंतरि देवा…
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।
जय धन्वंतरि देवा…
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।
जय धन्वंतरि देवा…
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।
जय धन्वंतरि देवा…
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।
जय धन्वंतरि देवा…
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।
जय धन्वंतरि देवा…
।। इति भगवान धन्वंतरि जी की आरती ।।
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आरती कैसे करें
पूजा स्थान पर भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएँ। फिर थाली में दीपक रखकर घंटी बजाते हुए आरती गाएँ और अंत में प्रसाद बाँटें। विधि अपनी परिवार परंपरा के अनुसार अपनाएँ।
आरती का महत्व (मान्यता के अनुसार)
परंपरा में धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की आरती करके स्वास्थ्य की कामना की जाती है। यह आस्था पर आधारित है और किसी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
श्री धन्वंतरि आरती कब करनी चाहिए?
परंपरा में धनतेरस के दिन, जब भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है।
Dhanvantri Aarti के बोल कहाँ पढ़ें?
पूरे बोल इसी पेज पर ऊपर दिए गए हैं।
आरती में क्या-क्या सामग्री चाहिए?
आमतौर पर दीपक, घी या तेल, धूप, फूल और प्रसाद की ज़रूरत होती है। सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार बदल सकती है।
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नोट: यहाँ बताए गए लाभ और नियम धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।