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श्री ब्रह्मा चालीसा: Brahma Chalisa in Hindi | Brahma Chalisa PDF Download

श्री ब्रह्मा चालीसा — एक परिचय

श्री ब्रह्मा चालीसा (Brahma Chalisa in hindi PDF) ब्रह्माजी की स्तुति में विंशति (चालीस चौपाइयाँ) का अनुपम पाठ है। इसे नियमित रूप से पाठ करने से मन शांत होता है, आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है और सृष्टि-रचयिता ब्रह्मा से कृपा मिलती है।

ब्रह्मा चालीसा (Brahma Chalisa) का महत्व

  • ब्रह्मा चालीसा पाठ से बुद्धि में वर्द्धि, आध्यात्मिक उन्नति और शांति आती है।
  • यह चालीसा सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की स्तुति है, जिससे व्यक्ति को सात्विकता और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है।

पाठ विधि और समय

  • इसे प्रातः या संध्या के समय या नवग्रह पूजन के दौरान पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • श्रद्धा और ध्यान से ब्राह्मण या स्वयं द्वारा किया गया जप, दोष निवारण और मन की शुद्धि में सहायक होता है।

ब्रह्मा चालीसा के फायदे - Brahma Chalisa in hindi

  • शांति व मानसिक स्थिरता: नियमित पाठ से मानसिक तनाव दूर होता है।
  • आध्यात्मिक संरक्षण: ब्रह्मा की कृपा से सुरक्षा व आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलता है।
  • ज्ञान व प्रज्ञा में वृद्धि: चालीसा के पाठ से विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  • नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: दोषों व बुरी शक्तियों से रक्षा होते हैं।

अनुमानित पढ़ने का समय

मध्यम गति से पढ़ने पर यह चालीसा 5–7 मिनट में पूर्ण हो जाती है।

दोहा:

जय ब्रह्मा जय स्वयम्भू, चतुरानन सुखमूल।
करहु कृपा निज दास पै, रहहु सदा अनुकूल॥

तुम सृजक ब्रह्माण्ड के, अज विधि घाता नाम।
विश्वविधाता कीजिये, जन पै कृपा ललाम॥

चौपाई:

जय जय कमलासान जगमूला।
रहहू सदा जनपै अनुकूला॥

रुप चतुर्भुज परम सुहावन।
तुम्हें अहैं चतुर्दिक आनन॥

रक्तवर्ण तव सुभग शरीरा।
मस्तक जटाजुट गंभीरा॥

ताके ऊपर मुकुट विराजै।
दाढ़ी श्वेत महाछवि छाजै॥

श्वेतवस्त्र धारे तुम सुन्दर।
है यज्ञोपवीत अति मनहर॥

कानन कुण्डल सुभग विराजहिं।
गल मोतिन की माला राजहिं॥

चारिहु वेद तुम्हीं प्रगटाये।
दिव्य ज्ञान त्रिभुवनहिं सिखाये॥

ब्रह्मलोक शुभ धाम तुम्हारा।
अखिल भुवन महँ यश विस्तारा॥

अर्द्धागिनि तव है सावित्री।
अपर नाम हिये गायत्री॥

सरस्वती तब सुता मनोहर।
वीणा वादिनि सब विधि मुन्दर॥

कमलासन पर रहे विराजे।
तुम हरिभक्ति साज सब साजे॥

क्षीर सिन्धु सोवत सुरभूपा।
नाभि कमल भो प्रगट अनूपा॥

तेहि पर तुम आसीन कृपाला।
सदा करहु सन्तन प्रतिपाला॥

एक बार की कथा प्रचारी।
तुम कहँ मोह भयेउ मन भारी॥

कमलासन लखि कीन्ह बिचारा।
और न कोउ अहै संसारा॥

तब तुम कमलनाल गहि लीन्हा।
अन्त विलोकन कर प्रण कीन्हा॥

कोटिक वर्ष गये यहि भांती।
भ्रमत भ्रमत बीते दिन राती॥

पै तुम ताकर अन्त न पाये।
ह्वै निराश अतिशय दुःखियाये॥

पुनि बिचार मन महँ यह कीन्हा।
महापघ यह अति प्राचीन॥

याको जन्म भयो को कारन।
तबहीं मोहि करयो यह धारन॥

अखिल भुवन महँ कहँ कोई नाहीं।
सब कुछ अहै निहित मो माहीं॥

यह निश्चय करि गरब बढ़ायो।
निज कहँ ब्रह्म मानि सुखपाये॥

गगन गिरा तब भई गंभीरा।
ब्रह्मा वचन सुनहु धरि धीरा॥

सकल सृष्टि कर स्वामी जोई।
ब्रह्म अनादि अलख है सोई॥

निज इच्छा इन सब निरमाये।
ब्रह्मा विष्णु महेश बनाये॥

सृष्टि लागि प्रगटे त्रयदेवा।
सब जग इनकी करिहै सेवा॥

महापघ जो तुम्हरो आसन।
ता पै अहै विष्णु को शासन॥

विष्णु नाभितें प्रगट्यो आई।
तुम कहँ सत्य दीन्ह समुझाई॥

भैतहू जाई विष्णु हितमानी।
यह कहि बन्द भई नभवानी॥

ताहि श्रवण कहि अचरज माना।
पुनि चतुरानन कीन्ह पयाना॥

कमल नाल धरि नीचे आवा।
तहां विष्णु के दर्शन पावा॥

शयन करत देखे सुरभूपा।
श्यायमवर्ण तनु परम अनूपा॥

सोहत चतुर्भुजा अतिसुन्दर।
क्रीटमुकट राजत मस्तक पर॥

गल बैजन्ती माल विराजै।
कोटि सूर्य की शोभा लाजै॥

शंख चक्र अरु गदा मनोहर।
पघ नाग शय्या अति मनहर॥

दिव्यरुप लखि कीन्ह प्रणामू।
हर्षित भे श्रीपति सुख धामू॥

बहु विधि विनय कीन्ह चतुरानन।
तब लक्ष्मी पति कहेउ मुदित मन॥

ब्रह्मा दूरि करहु अभिमाना।
ब्रह्मारुप हम दोउ समाना॥

तीजे श्री शिवशंकर आहीं।
ब्रह्मरुप सब त्रिभुवन मांही॥

तुम सों होई सृष्टि विस्तारा।
हम पालन करिहैं संसारा॥

शिव संहार करहिं सब केरा।
हम तीनहुं कहँ काज घनेरा॥

अगुणरुप श्री ब्रह्मा बखानहु।
निराकार तिनकहँ तुम जानहु॥

हम साकार रुप त्रयदेवा।
करिहैं सदा ब्रह्म की सेवा॥

यह सुनि ब्रह्मा परम सिहाये।
परब्रह्म के यश अति गाये॥

सो सब विदित वेद के नामा।
मुक्ति रुप सो परम ललामा॥

यहि विधि प्रभु भो जनम तुम्हारा।
पुनि तुम प्रगट कीन्ह संसारा॥

नाम पितामह सुन्दर पायेउ।
जड़ चेतन सब कहँ निरमायेउ॥

लीन्ह अनेक बार अवतारा।
सुन्दर सुयश जगत विस्तारा॥

देवदनुज सब तुम कहँ ध्यावहिं।
मनवांछित तुम सन सब पावहिं॥

जो कोउ ध्यान धरै नर नारी।
ताकी आस पुजावहु सारी॥

पुष्कर तीर्थ परम सुखदाई।
तहँ तुम बसहु सदा सुरराई॥

कुण्ड नहाइ करहि जो पूजन।
ता कर दूर होई सब दूषण॥

॥ इति श्री ब्रह्मा चालीसा ॥

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हाँ, यह पूरी चालीसा हिंदी वर्णमाला में उपलब्ध है और आप इसे ऊपर दिए PDF लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं।

प्रातः, संध्या या नवग्रह पूजन के समय पढ़ना शुभ है।

हाँ—शांति, ज्ञान, आध्यात्मिक ऊर्जा और नेगेटिविटी से रक्षा।

आप चाहें तो ॐ श्रीं ब्रह्म्ने नमः जैसे मंत्र से शुरुआत कर सकते हैं।