ॐ जय जगदीश हरे आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti) हिंदी भक्ति में सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है। घरों और मंदिरों में पूजा के अंत में इसे अक्सर गाया जाता है। आरती के पूरे बोल नीचे दिए गए हैं।
ॐ जय जगदीश हरे आरती एक नज़र में
- आरती: ॐ जय जगदीश हरे आरती
- देवता: भगवान विष्णु (जगदीश)
- कब करें: घर और मंदिर की पूजा के समापन पर, अक्सर हर दिन
ॐ जय जगदीश हरे आरती के बोल (Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics)
ओम जय जगदीश हरे सबसे अधिक प्रचलित आरती है. इसका गायन किसी भी पूजा के अवसर पर अवश्य ही किया जाता है. वैसे यह आरती विशेष रूप से भगवान विष्णु के लिए है लेकिन भक्त बहुतायत पूजन के अवसरों पर इसे गाते हैं. लोग ऐसा भी कहते हैं कि इस आरती से किसी भी देवता को प्रसन्न किया जा सकता है.
जानकारी के लिए बता दूं कि ‘ओम जय जगदीश हरे’ पं. श्रद्धाराम शर्मा फिल्लौरी द्वारा सन 1870 में लिखी गई थी. वे सनातन धर्म प्रचारक, ज्योतिषी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संगीतज्ञ तथा प्रसिद्ध साहित्यकार थे. इनको हिन्दी साहित्य का पहला उपन्यासकार भी कहा गया है. ये इस आरती के कारण अमर हो चुके हैं. यहां आप इस लोकप्रिय आरती को पढ़ें!
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे,
दुःख बिनसे मन का,
स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे,
सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे…
मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर,
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख फलकामी,
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय,
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे…
दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,
ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ,
अपने शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा,
स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे…
ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
आरती कैसे करें
पूजा स्थान पर भगवान जगदीश की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएँ। फिर थाली में दीपक रखकर घंटी बजाते हुए आरती गाएँ और अंत में प्रसाद बाँटें। विधि अपनी परिवार परंपरा के अनुसार अपनाएँ।
आरती का महत्व (मान्यता के अनुसार)
परंपरा में पूजा का समापन आरती से किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा से आरती करने पर भगवान जगदीश की कृपा मिलती है और घर में सुख-शांति रहती है। यह आस्था पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ॐ जय जगदीश हरे आरती कब करनी चाहिए?
यह आरती सबसे लोकप्रिय आरतियों में से है और आमतौर पर पूजा के समापन पर, रोज़ या त्योहारों पर गाई जाती है।
Om Jai Jagdish Hare Aarti के बोल कहाँ पढ़ें?
पूरे बोल इसी पेज पर ऊपर दिए गए हैं।
आरती में क्या-क्या सामग्री चाहिए?
आमतौर पर दीपक, घी या तेल, धूप, फूल और प्रसाद की ज़रूरत होती है। सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार बदल सकती है।
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नोट: यहाँ बताए गए लाभ और नियम धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।