भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है। बहन के लिए भाई को तिलक करने का शुभ समय दोपहर 1:31 से 3:45 बजे तक है (दिल्ली)। द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे लगती है और 11 नवंबर को शाम 3:53 बजे तक रहती है।
यानी तिलक अपराह्न (दोपहर के बाद के हिस्से) में किया जाता है, सुबह-सुबह नहीं। नीचे पूरी विधि, थाली की सूची, यम-यमुना की कथा और दोनों के करने लायक काम दिए हैं।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| पर्व | भाई दूज (यम द्वितीया) |
| तारीख और वार | बुधवार, 11 नवंबर 2026 |
| द्वितीया तिथि | 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर शाम 3:53 तक |
| तिलक का शुभ मुहूर्त | दोपहर 1:31 से 3:45 बजे तक |
| पिछला दिन | गोवर्धन पूजा, मंगलवार 10 नवंबर |
| पूजा की जगह | घर, पूर्व की ओर मुँह कर भाई का आसन |
एक सावधानी: कुछ पंचांगों में समय के कुछ मिनट का फ़र्क मिलता है, इसलिए यदि आप किसी दूसरे शहर में हैं तो अपने शहर की द्वितीया और अपराह्न का समय जाँच लें।
भाई दूज क्या है
दीवाली के पाँच दिनों के उत्सव का यह आख़िरी पर्व है। इस दिन बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख की कामना करती है, और भाई बहन की रक्षा का वचन देता है। रक्षाबंधन में बहन राखी बाँधती है; भाई दूज में तिलक और भोजन का महत्व है।
यम और यमुना की कथा
मान्यता है कि यमुना अपने भाई यमराज को बहुत प्रेम से बुलाती थीं, पर यमराज काम में व्यस्त रहते थे। एक दिन वे कार्तिक शुक्ल द्वितीया पर बहन के घर पहुँचे। यमुना ने उनका स्वागत आरती, तिलक और अपने हाथ के बने भोजन से किया।
बहन के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने वर दिया कि जो भाई इस दिन बहन से तिलक करवाकर उसके घर भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसीलिए इस दिन को यम द्वितीया भी कहते हैं। एक और मान्यता में श्रीकृष्ण नरकासुर को हराने के बाद बहन सुभद्रा के पास पहुँचे और उन्होंने तिलक कर उनका स्वागत किया।
भाई दूज पूजा विधि: स्टेप बाय स्टेप
- सुबह दोनों भाई-बहन स्नान करें और साफ़ या नए कपड़े पहनें।
- बहन थाली सजाए (सूची नीचे है) और दीपक जलाए।
- शुभ मुहूर्त (1:31 से 3:45) में भाई को पूर्व की ओर मुँह करके आसन पर बिठाएँ। बहन उसके सामने बैठे।
- कुछ घरों में भाई को पहले सिर पर रुमाल या वस्त्र रखने को कहा जाता है।
- बहन अनामिका उँगली से रोली और चावल का तिलक लगाए, फिर माथे पर अक्षत लगाए।
- हाथ में कलावा बाँधने या जल छिड़कने की भी परंपरा है। कई जगह भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाकर सूखे मेवे या पान रखे जाते हैं।
- दीपक से आरती करें और भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।
- भाई मिठाई खिलाए या उपहार दे, और बहन के हाथ का बना भोजन करे।
- अंत में भाई बड़ों का आशीर्वाद ले और बहन के सम्मान और सुरक्षा का वचन दोहराए।
भाई दूज की थाली में क्या रखें
- रोली या कुमकुम
- अक्षत (साबुत चावल)
- दीपक, घी और बाती
- मिठाई और सूखे मेवे
- सुपारी, पान और नारियल
- फूल, कलावा
- जल का लोटा
- रुमाल या छोटा वस्त्र (भाई के सिर पर रखने के लिए)
भाई क्या करे, बहन क्या करे
भाई
- बहन के घर जाएँ या उसे अपने घर बुलाएँ।
- सोच-समझकर उपहार चुनें; भावना कीमत से बड़ी है।
- बहन के हाथ का बना खाना ज़रूर खाएँ।
- उसके लिए पूरे साल हर परेशानी में साथ रहने का वचन दें।
बहन
- मुहूर्त से पहले थाली तैयार रखें।
- भाई की पसंद का भोजन या मिठाई बनाएँ।
- तिलक करते समय उसकी सलामती की प्रार्थना करें।
- वीडियो कॉल पर तिलक की सुविधा भी अपनाई जा सकती है, पर मुमकिन हो तो मिलना बेहतर।
अगर भाई दूर रहता हो तो
दूर रहने वाले भाई के लिए बहन तिलक की थाली सजाकर वीडियो कॉल पर आरती करे, और कूरियर से रोली-चावल का छोटा पैकेट व राखी जैसा धागा भेज दे। भाई उसी समय कॉल पर तिलक की भावना से माथे पर रोली लगा ले। भाई की ओर से उपहार ऑनलाइन भेजा जा सकता है। परंपरा से ज़्यादा भावना मायने रखती है।
अलग-अलग राज्यों में भाई दूज
- बंगाल: भाई फोंटा। बहनें चंदन, काजल जैसे लेप से भाई के माथे पर फोंटा लगाती हैं और शंख बजाती हैं। यह प्रायः काली पूजा के बाद की द्वितीया पर होता है।
- महाराष्ट्र: भाऊबीज। बहनें भाई की आरती उतारती हैं।
- नेपाल: भाई टीका, जो तिहार का बड़ा दिन है और जिसमें सात रंगों का टीका लगाया जाता है।
- उत्तर भारत: तिलक, आरती और बहन के घर भोजन की परंपरा आम है।
- कायस्थ समाज: इसी दिन चित्रगुप्त पूजा भी करते हैं।
आम गलतियाँ
- सुबह जल्दी तिलक कर देना, जबकि शास्त्र अपराह्न को श्रेष्ठ मानते हैं।
- द्वितीया खत्म होने के बाद (शाम 3:53 के बाद) तिलक टालना।
- तारीख 10 नवंबर समझ लेना; 10 नवंबर को सिर्फ़ तिथि लगती है, पर्व 11 को है।
मिनी टाइमलाइन: 11 नवंबर
| समय | काम |
|---|---|
| सुबह | स्नान, घर की सफ़ाई, थाली की तैयारी |
| दोपहर से पहले | भोजन व मिठाई की तैयारी, भाई का आगमन |
| 1:31 से 3:45 PM | तिलक और आरती |
| 3:45 के बाद | भोजन, उपहार, परिवार के साथ समय |
और पढ़ें
भाई-बहन को भेजने के लिए भावपूर्ण संदेश भाई दूज की शुभकामनाएं में हैं। एक दिन पहले की पूजा गोवर्धन पूजा में और बंगाल की देवी-पूजा काली पूजा मुहूर्त में पढ़ें।
निष्कर्ष
भाई दूज का केंद्र एक छोटा सा तिलक है, जो रिश्ते को पक्का करता है। 11 नवंबर को दोपहर 1:31 से 3:45 के बीच तिलक करें, थाली पहले से तैयार रखें, और पूरा दिन अपनों के नाम रखें।
अंतिम जाँच: 27 अक्टूबर 2026। दिए गए समय दिल्ली (IST) के हैं और शहर के हिसाब से कुछ मिनट बदलते हैं। अपने शहर का सही समय drikpanchang.com पर जाँचें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
भाई दूज 2026 कब है?
भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है। द्वितीया तिथि 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर शाम 3:53 तक है।
भाई दूज का तिलक मुहूर्त क्या है?
दिल्ली के लिए तिलक का शुभ समय दोपहर 1:31 से 3:45 बजे तक है। शहर बदलने पर कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
भाई दूज की थाली में क्या रखते हैं?
रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, सुपारी, नारियल, फूल, कलावा और जल। सिर पर रखने के लिए रुमाल भी रखा जाता है।
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि यमराज बहन यमुना के घर इस दिन गए और वर दिया कि तिलक करवाने वाले भाई को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
अगर भाई दूर हो तो क्या करें?
वीडियो कॉल पर थाली दिखाकर आरती करें और रोली-अक्षत कूरियर से भेज दें। भाई उसी समय माथे पर रोली लगा सकता है।
भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या फ़र्क है?
रक्षाबंधन पर बहन राखी बाँधती है। भाई दूज पर बहन तिलक करती है और भाई उसके घर भोजन करता है।



