गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है। यह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा की पूजा है, इसलिए पूजा सूर्योदय के बाद (दिल्ली में लगभग 6:39 बजे से) सुबह के समय करना सबसे सुरक्षित है। इसी दिन अन्नकूट का भोग लगता है।
ध्यान रहे, दीवाली 8 नवंबर को है और भाई दूज 11 नवंबर को। यानी गोवर्धन पूजा दीवाली के ठीक दो दिन बाद, भाई दूज से एक दिन पहले आती है। इस साल अमावस्या 8-9 नवंबर में फैली है, इसलिए तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम रहता है; नीचे साफ़ कर दिया है।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| पर्व | गोवर्धन पूजा / अन्नकूट |
| तारीख और वार | मंगलवार, 10 नवंबर 2026 |
| प्रतिपदा तिथि | लगभग 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक |
| सूर्योदय (दिल्ली) | लगभग 6:39 AM |
| सूर्यास्त (दिल्ली) | लगभग 5:30 PM |
| पूजा का समय | सूर्योदय के बाद सुबह से दोपहर 2 बजे से पहले (सटीक शुभ मुहूर्त की पुष्टि नहीं हुई, अपने शहर का समय जाँचें) |
| अगला दिन | भाई दूज, बुधवार 11 नवंबर |
गोवर्धन पूजा 2026 की तारीख को लेकर भ्रम क्यों होता है
प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर की दोपहर में शुरू होकर 10 नवंबर की दोपहर में खत्म होती है। उदया तिथि का नियम मानें तो जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, वही दिन माना जाता है। 10 नवंबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा है, इसलिए पंचांग 10 नवंबर बताते हैं। 9 नवंबर सुबह अभी अमावस्या है, इसलिए उस दिन गोवर्धन पूजा नहीं होती।
एक ईमानदार सावधानी: तिथि दोपहर 2 बजे के आसपास खत्म हो जाती है, इसलिए जिन परिवारों में शाम की पूजा की परंपरा है वे अपने पंडित जी या स्थानीय पंचांग से पूछ लें। हमने अलग-अलग साइटों में शुभ मुहूर्त की मिनट-स्तर की सूची नहीं पाई जो आपस में मेल खाती हो, इसलिए यहाँ हम कोई गढ़ा हुआ समय नहीं दे रहे।
गोवर्धन पूजा क्यों होती है
कथा के अनुसार वृंदावन के लोग हर साल इंद्र की पूजा करते थे। बाल कृष्ण ने समझाया कि वर्षा और चारा तो गोवर्धन पर्वत, गायों और धरती की देन है, इसलिए उसी का आभार मानना चाहिए। इंद्र नाराज़ हुए और भयंकर वर्षा कर दी। तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया और पूरा गाँव उसकी छाँव में सुरक्षित रहा। माना जाता है कि इंद्र का अभिमान टूटा और उन्होंने क्षमा माँगी।
इस पर्व का सीधा संदेश है: प्रकृति, पशुधन और अन्न के प्रति कृतज्ञता, और घमंड के सामने सहज विनम्रता।
अन्नकूट क्या है
अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पर्वत। इस दिन भगवान को नई फसल के अनाज, कढ़ी-चावल, सब्ज़ियाँ, पूड़ी, मिठाइयाँ और कई तरह के पकवान एक साथ चढ़ाए जाते हैं। मंदिरों में अक्सर 56 भोग (छप्पन भोग) सजते हैं। घर में 56 चीज़ें ज़रूरी नहीं; श्रद्धा से बनाए 5, 11 या 21 व्यंजन भी पर्याप्त माने जाते हैं।
गोवर्धन पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप)
- सुबह स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और पूजा की जगह धोकर साफ़ करें।
- आँगन या पूजा-स्थान में गाय के गोबर से लेटे हुए मानव रूप में गोवर्धन बनाएँ। फ़्लैट में रहते हों तो छोटा गोबर का टीला, मिट्टी या चावल-आटे की आकृति भी चलती है।
- बीच में दीया रखें और आसपास गाय, ग्वाल-बाल, पेड़ और छोटी हाँडियाँ बनाकर फूलों से सजाएँ।
- हाथ में जल और अक्षत लेकर संकल्प लें कि आप कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन और श्रीकृष्ण की पूजा कर रहे हैं।
- रोली, चावल, फूल, दीप, धूप और तुलसी दल चढ़ाएँ।
- अन्नकूट का भोग लगाएँ। थोड़ा अंश गाय के लिए अलग निकालें।
- आरती करें और गोवर्धन की सात परिक्रमा करें। साथ में कृष्ण का नाम जपें।
- प्रसाद पड़ोसियों और घर के सभी लोगों में बाँटें। गोवर्धन की आकृति अगले दिन सम्मान से विसर्जित करें या खेत-बगीचे में रख दें।
पूजा सामग्री की सूची
- गाय का गोबर या मिट्टी
- श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र
- रोली, चावल, हल्दी
- फूल, मालाएँ, तुलसी दल
- दीपक, घी, धूप, कपूर
- अन्नकूट के पकवान, मिठाई, फल
- जल से भरा कलश
- गाय के लिए हरा चारा और गुड़
क्षेत्र के अनुसार परंपराएँ
- ब्रज (मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन): गिरिराज जी की परिक्रमा का बड़ा महत्व है। परिक्रमा मार्ग लगभग 21 किलोमीटर का बताया जाता है। मंदिरों में भव्य अन्नकूट सजता है।
- राजस्थान (नाथद्वारा): श्रीनाथजी मंदिर में अन्नकूट उत्सव प्रसिद्ध है और दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं।
- गुजरात: इसी दिन विक्रम संवत का नया साल, बेस्तु वरस मनाया जाता है। लोग मंदिर जाते हैं और एक-दूसरे को नववर्ष की बधाई देते हैं।
- महाराष्ट्र: यह दिन बलिप्रतिपदा या दीवाली पड़वा कहलाता है। पति-पत्नी के बीच उपहार और स्नेह का दिन माना जाता है।
- कर्नाटक: बली पाड्यमी के रूप में राजा बली की स्मृति में मनाया जाता है।
- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा: घर-आँगन में गोबर से गोवर्धन बनाकर अन्नकूट का भोग लगाने की परंपरा आम है।
इस दिन क्या करें और क्या न करें
करें
- गाय को चारा खिलाएँ और पशुओं की सेवा करें।
- भोजन बाँटें; किसी ज़रूरतमंद को अन्नदान करें।
- बच्चों को कृष्ण और गोवर्धन की कथा सुनाएँ।
न करें
- अन्न की बर्बादी या भोग का अपमान न करें।
- पूजा के दिन मांस-मदिरा से दूर रहें।
- पशुओं के साथ कठोर व्यवहार न करें।
आम गलतियाँ
- तारीख 9 नवंबर समझ लेना, जबकि सूर्योदय के समय प्रतिपदा 10 नवंबर को है।
- तिथि खत्म होने के बाद पूजा टाल देना। दोपहर 2 बजे के बाद शुरू करने से पहले स्थानीय पंचांग देखें।
- भारी आयोजन के दबाव में अन्नकूट के लिए बाज़ार से अधिक खरीदारी करना और खाना बचा देना।
10 नवंबर का सुझाया कार्यक्रम
| समय | काम |
|---|---|
| सुबह (सूर्योदय के बाद) | स्नान, गोवर्धन बनाना, संकल्प |
| सुबह से पहले दोपहर तक | पूजन, अन्नकूट भोग, आरती, परिक्रमा |
| दोपहर | प्रसाद वितरण, गाय को भोजन |
| शाम | परिवार के साथ भोजन और अगले दिन के लिए तैयारी |
अगले दिन क्या है
अगले दिन बुधवार 11 नवंबर को भाई-बहन का त्योहार है। तिलक का समय, थाली और विधि के लिए पढ़ें हमारा लेख भाई दूज, और भाई-बहन को भेजने के लिए संदेश भाई दूज की शुभकामनाएं में हैं। बंगाल की काली पूजा की जानकारी काली पूजा मुहूर्त में मिलेगी।
निष्कर्ष
गोवर्धन पूजा सरल पर्व है: गोबर या मिट्टी का गोवर्धन, थोड़ा अन्नकूट, साफ़ मन और आभार। तारीख 10 नवंबर याद रखें, पूजा सुबह निपटा लें, और बाकी विधि अपने परिवार की परंपरा के अनुसार करें।
अंतिम जाँच: 27 अक्टूबर 2026। दिए गए समय दिल्ली (IST) के हैं और शहर के हिसाब से कुछ मिनट बदलते हैं। अपने शहर का सही समय drikpanchang.com पर जाँचें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है। यह दीवाली (8 नवंबर) के दो दिन बाद और भाई दूज (11 नवंबर) से एक दिन पहले पड़ती है।
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को लगभग दोपहर 2 बजे तक है और सूर्योदय दिल्ली में लगभग 6:39 बजे है। इसलिए पूजा सुबह करें। मिनट के हिसाब से मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।
अन्नकूट में कितने भोग लगते हैं?
मंदिरों में परंपरागत रूप से 56 भोग सजाए जाते हैं। घर में संख्या कोई बाध्यता नहीं है; श्रद्धा से बने कुछ व्यंजन भी चलते हैं।
गोवर्धन पूजा में गोबर क्यों इस्तेमाल होता है?
गोबर गाय और खेती का प्रतीक है। उससे गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर प्रकृति और पशुधन के प्रति आभार जताया जाता है। न मिले तो मिट्टी की आकृति भी बनाई जा सकती है।
क्या गोवर्धन पूजा और अन्नकूट एक ही है?
हाँ, दोनों एक ही दिन होते हैं। गोवर्धन की पूजा होती है और अन्नकूट उस दिन चढ़ाया जाने वाला भोग है।
गुजरात में इस दिन क्या होता है?
गुजरात में यह दिन विक्रम संवत का नया साल, बेस्तु वरस है। लोग मंदिर जाते हैं और नववर्ष की बधाई देते हैं।



