भाई दूज तिलक विधि

भाई दूज कब है? तिलक की विधि, कथा और महत्व

भाई दूज इस साल बुधवार, 11 नवंबर को है। इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख की कामना करती हैं और भाई उपहार देते हैं। तिलक का शुभ समय पंचांग के अनुसार रहता है, जो शहर के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है।

भाई दूज क्या है

भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है और दिवाली के पाँच दिन के पर्व का अंतिम दिन है। कुछ क्षेत्रों में इसे भाऊबीज या भैया दूज भी कहते हैं। यह भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है।

कथा का सार

लोक मान्यता के अनुसार यमराज इस दिन अपनी बहन यमुना के घर गए, जहाँ यमुना ने उनका आदरपूर्वक तिलक और सत्कार किया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे दीर्घायु और सुख मिलेगा। इसी वजह से इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।

तिलक की सरल विधि

  1. पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और नारियल रखें।
  2. भाई को चौकी या आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठाएँ।
  3. बहन भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाए।
  4. दीपक से आरती उतारे और मिठाई खिलाए।
  5. भाई बहन को उपहार या आशीर्वाद दे।

उपहार के सरल विचार

उपहार महँगा होना ज़रूरी नहीं। हाथ से लिखा पत्र, पसंद की किताब, घर की बनी मिठाई, पौधा या ज़रूरत की कोई उपयोगी चीज़ भी उतनी ही सुंदर लगती है। जो भाई-बहन दूर रहते हैं, वे वीडियो कॉल पर तिलक की रस्म निभा सकते हैं और डाक या ऑनलाइन से मिठाई भेज सकते हैं।

बहनों के लिए संदेश के विचार

  • भाई के नाम एक छोटा संदेश लिखें जिसमें बचपन की कोई याद हो।
  • दूर हों तो सुबह पहले फ़ोन कर शुभकामना दें।
  • रक्षाबंधन की तरह इस दिन भी साथ समय बिताने की कोशिश करें।

तिलक का मुहूर्त अपने स्थानीय पंचांग या पंडित से पक्का करें। यहाँ दी गई जानकारी सामान्य परंपरा पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भाई दूज कब है?
भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को है।

भाई दूज को और किस नाम से जानते हैं?
यम द्वितीया, भाऊबीज और भैया दूज के नाम से भी जाना जाता है।

भाई दूज पर तिलक कैसे लगाते हैं?
रोली और अक्षत से भाई के माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारते हैं और मिठाई खिलाते हैं।

भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?
रक्षाबंधन पर बहन राखी बाँधती है, जबकि भाई दूज पर तिलक लगाकर भाई की दीर्घायु की कामना की जाती है।