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मां दुर्गा की आरती – पूरी विधि, महत्व और आरती के बोल (Maa Durga Aarti in Hindi)

नवरात्रि के पावन दिनों में जब भी मां दुर्गा की पूजा होती है, मां दुर्गा की आरती का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं कि मां की आरती करने से भक्तों के दुख दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। परंपरा है कि सुबह और शाम दोनों समय दुर्गा जी की आरती करनी चाहिए।

अगर आरती स्वयं न कर सकें, तो कम से कम आरती में शामिल होना भी पुण्यकारी होता है। शुद्ध मन से मां को याद किया जाए, तो वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं।

मां दुर्गा आरती करने की विधि – (Maa Durga Aarti Vidhi)

आरती से पहले मां दुर्गा के मंत्रों का जप कर तीन बार पुष्प अर्पित करना चाहिए। इसके बाद शंख, घंटा, ढोल, नगाड़ा आदि बजाकर माहौल को भक्तिमय बनाएं।

  • दीपक घी या कपूर से जलाएं।
  • दीप हमेशा विषम संख्या (1, 5, 7, 11, 21, 101) में जलाएं।
  • तीन दीप जलाकर आरती करने से बचें।
  • पंचप्रदीप प्रथा अधिक प्रचलित है जिसमें पांच बत्तियाँ जलाई जाती हैं।
  • आरती करते समय पहले चरणों में 4 बार, नाभि प्रदेश में 2 बार, मुख पर 1 बार और पूरे अंगों पर 7 बार दीपक घुमाएं।

पद्मपुराण में भी वर्णन है कि कुंकुम, अगर, कपूर, घृत और चंदन से दीप जलाकर मां की आरती करनी चाहिए। इस तरह कुल चौदह बार आरती घुमाना शुभ माना जाता है।

दुर्गा मां की आरती का महत्व – (Importance of Maa Durga Aarti)

मां दुर्गा की आरती सिर्फ पूजा की एक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा और भक्ति का संगम है। इसका महत्व इस प्रकार है:

  • भक्त को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  • घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
  • नवरात्रि के दिनों में आरती करने से मां का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • आरती से वातावरण में शुद्धता और पवित्रता का संचार होता है।

दुर्गा जी की आरती के बोल – (Maa Durga Aarti Lyrics in Hindi)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी॥
  

FAQs – मां दुर्गा की आरती से जुड़े प्रश्न

Q1: दुर्गा मां की आरती कब करनी चाहिए?

➡️ नवरात्रि और रोजाना पूजा के समय, सुबह और शाम आरती करना सबसे शुभ माना जाता है।

Q2: आरती में कितने दीप जलाने चाहिए?

➡️ दीप विषम संख्या (1, 5, 7, 11, 21) में जलाना चाहिए। पंचप्रदीप परंपरा सबसे ज्यादा प्रचलित है।

Q3: मां दुर्गा की आरती करने का महत्व क्या है?

➡️ आरती करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। साथ ही यह भक्त को मानसिक शांति भी देती है।

Q4: अगर कोई स्वयं आरती न कर पाए तो?

➡️ अगर आप स्वयं आरती न कर सकें तो आरती में शामिल होना भी उतना ही फलदायी माना जाता है।

निष्कर्ष: मां दुर्गा की आरती नवरात्रि और रोज की पूजा दोनों में अत्यंत शुभ है। सही विधि से की गई आरती भक्त के जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति लाती है। शुद्ध मन से मां का स्मरण करें, वे अवश्य प्रसन्न होंगी।