माँ सरस्वती (Saraswati Ji Aarti)

Maa Saraswati Ji Aarti in Hindi | माँ सरस्वती जी की आरती – जय सरस्वती माता (Lyrics)

माँ सरस्वती जी की आरती “जय सरस्वती माता” (Maa Saraswati Ji Aarti) विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा के समय गाई जाने वाली आरती है। इस पेज पर आरती के पूरे बोल दिए गए हैं।

माँ सरस्वती जी की आरती – जय सरस्वती माता एक नज़र में

  • आरती: माँ सरस्वती जी की आरती – जय सरस्वती माता
  • देवता: माँ सरस्वती
  • कब करें: बसंत पंचमी और गुरुवार-शुक्रवार की पूजा में, सुबह-शाम

माँ सरस्वती जी की आरती – जय सरस्वती माता के बोल (Maa Saraswati Ji Aarti Lyrics)

माँ सरस्वती जी जय सरस्वती माता,
मैया जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

देवी शरण जो आए,
उनका उद्धार किया ।
पैठी मंथरा दासी,
रावण संहार किया ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
ज्ञान प्रकाश भरो ।
मोह अज्ञान और तिमिर का,
जग से नाश करो ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

धूप दीप फल मेवा,
माँ स्वीकार करो ।
ज्ञानचक्षु दे माता,
जग निस्तार करो ॥
॥ जय सरस्वती माता…॥

माँ सरस्वती की आरती,
जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी,
ज्ञान भक्ति पावे ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥

आरती कैसे करें

पूजा स्थान पर माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएँ। फिर थाली में दीपक रखकर घंटी बजाते हुए आरती गाएँ और अंत में प्रसाद बाँटें। विधि अपनी परिवार परंपरा के अनुसार अपनाएँ।

आरती का महत्व (मान्यता के अनुसार)

परंपरा में पूजा का समापन आरती से किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा से आरती करने पर माँ सरस्वती की कृपा मिलती है और घर में सुख-शांति रहती है। यह आस्था पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

माँ सरस्वती जी की आरती – जय सरस्वती माता कब करनी चाहिए?

परंपरा में बसंत पंचमी पर और विद्या आरंभ के अवसरों पर, साथ ही सुबह-शाम की पूजा में।

Maa Saraswati Ji Aarti के बोल कहाँ पढ़ें?

पूरे बोल इसी पेज पर ऊपर दिए गए हैं।

आरती में क्या-क्या सामग्री चाहिए?

आमतौर पर दीपक, घी या तेल, धूप, फूल और प्रसाद की ज़रूरत होती है। सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार बदल सकती है।

नोट: यहाँ बताए गए लाभ और नियम धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।