Krishna Sobti Biography in Hindi: कृष्णा सोबती (Krishna Sobti) हिंदी की प्रसिद्ध कथाकार और उपन्यासकार थीं। वे अपनी बेबाक भाषा, मज़बूत स्त्री-पात्रों और पंजाबी-मिश्रित हिंदी के लिए जानी जाती हैं। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार (2017) और साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे बड़े सम्मान मिले। इस लेख में कृष्णा सोबती का जीवन परिचय (Krishna Sobti Ka Jivan Parichay): जन्म, शिक्षा, रचनाएँ, पुरस्कार और साहित्यिक परिचय सरल भाषा में दिया गया है।
कृष्णा सोबती का संक्षिप्त जीवन परिचय (Krishna Sobti at a Glance)
- जन्म: 18 फरवरी 1925, गुजरात (पंजाब प्रांत, अब पाकिस्तान)
- निधन: 25 जनवरी 2019, नई दिल्ली (93 वर्ष की आयु में)
- भाषा: हिंदी
- विधा: उपन्यास, कहानी, संस्मरण
- प्रमुख रचनाएँ: मित्रो मरजानी, ज़िंदगीनामा, डार से बिछुड़ी, सूरजमुखी अँधेरे के, ऐ लड़की
- प्रमुख सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (1980), साहित्य अकादमी फ़ेलोशिप (1996), ज्ञानपीठ पुरस्कार (2017)
कृष्णा सोबती का जन्म और शिक्षा (Birth and Education)
कृष्णा सोबती का जन्म 18 फरवरी 1925 को उस गुजरात में हुआ जो अब पाकिस्तान के पंजाब का हिस्सा है। ध्यान रहे, यह भारत का राज्य गुजरात नहीं, बल्कि पंजाब का गुजरात शहर है। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और वे दिल्ली में बस गईं।
उनकी पढ़ाई लाहौर और शिमला सहित कई जगहों पर हुई। स्रोतों के अनुसार उन्होंने लाहौर के फ़तेहचंद कॉलेज फ़ॉर वीमेन में भी पढ़ाई की।
विभाजन का असर और लेखन की शुरुआत
विभाजन का दर्द और अपनी जड़ों से बिछड़ने का अनुभव उनके लेखन में बार-बार दिखाई देता है। उन्होंने 1940 के दशक के मध्य से लिखना शुरू किया और आगे चलकर हिंदी कथा-साहित्य की सबसे अलग आवाज़ों में गिनी गईं। वे कभी-कभी “हशमत” नाम से भी लिखती थीं।
कृष्णा सोबती की प्रमुख रचनाएँ (Krishna Sobti Books)
उपन्यास: डार से बिछुड़ी (1958), मित्रो मरजानी (1966), सूरजमुखी अँधेरे के (1972), ज़िंदगीनामा (1979), ऐ लड़की, दिलो-दानिश, समय सरगम।
कहानी संग्रह: बादलों के घेरे (उनकी कई कहानियाँ इसी संग्रह में संकलित हैं)।
अन्य: “हम हशमत” (संस्मरण/शब्द-चित्र) और “गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान” जैसी रचनाएँ उनकी साहित्यिक यात्रा का हिस्सा हैं।
मित्रो मरजानी उनकी सबसे चर्चित कृतियों में गिनी जाती है। इसकी नायिका मित्रो अपनी इच्छाओं और फ़ैसलों को खुलकर कहने वाली स्त्री है, जो उस समय के साहित्य में एक साहसी कदम माना गया।
साहित्यिक परिचय: भाषा और शैली (Literary Introduction)
कृष्णा सोबती की भाषा में पंजाबी और उर्दू के शब्दों की मिठास है। वे संवादों और लोक-बोली का इस्तेमाल इस तरह करती थीं कि पात्र जीवंत लगते थे। उनकी रचनाओं में स्त्री की स्वतंत्र पहचान, उसकी इच्छाएँ, समाज की पाबंदियाँ और विभाजन की स्मृतियाँ मुख्य विषय हैं। आलोचकों ने उन्हें हिंदी कथा-भाषा को नई ताज़गी देने वाली लेखिका माना।
पुरस्कार और सम्मान (Awards)
- साहित्य अकादमी पुरस्कार (1980), उपन्यास “ज़िंदगीनामा” के लिए
- साहित्य अकादमी फ़ेलोशिप (1996)
- ज्ञानपीठ पुरस्कार (2017), भारतीय साहित्य में योगदान के लिए
उन्होंने 2010 में पद्म भूषण लेने से मना कर दिया था। वर्ष 2015 में देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में उन्होंने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार और फ़ेलोशिप लौटाने का फ़ैसला भी किया।
निधन (Death)
कृष्णा सोबती का निधन 25 जनवरी 2019 को नई दिल्ली में हुआ। वे 93 वर्ष की थीं। उनके जाने के बाद भी उनकी रचनाएँ स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रम और साहित्य-प्रेमियों के बीच पढ़ी जाती हैं।
Krishna Sobti से जुड़े सवाल (FAQ)
कृष्णा सोबती कौन थीं?
कृष्णा सोबती हिंदी की प्रसिद्ध उपन्यासकार और कहानीकार थीं, जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कृष्णा सोबती का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उनका जन्म 18 फरवरी 1925 को गुजरात (पंजाब प्रांत, अब पाकिस्तान) में हुआ था।
कृष्णा सोबती की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
मित्रो मरजानी, ज़िंदगीनामा, डार से बिछुड़ी, सूरजमुखी अँधेरे के, ऐ लड़की, दिलो-दानिश और समय सरगम उनकी प्रमुख रचनाओं में गिनी जाती हैं।
कृष्णा सोबती को ज्ञानपीठ पुरस्कार कब मिला?
उन्हें वर्ष 2017 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
कृष्णा सोबती को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस रचना पर मिला?
वर्ष 1980 में उन्हें “ज़िंदगीनामा” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
कृष्णा सोबती का निधन कब हुआ?
उनका निधन 25 जनवरी 2019 को नई दिल्ली में हुआ।
नोट: यह लेख उपलब्ध प्रकाशित स्रोतों पर आधारित है। परीक्षा के लिए अपनी पाठ्यपुस्तक से भी मिलान कर लें।