नरक चतुर्दशी 2026 रविवार, 8 नवंबर को है, और अभ्यंग स्नान का मुहूर्त उसी सुबह दिल्ली में 5:41 से 6:38 बजे तक है। छोटी दिवाली या काली चौदस की शाम की रस्म शनिवार, 7 नवंबर को निभाई जाती है। 7 और 8 नवंबर का यही भ्रम इस पेज में सुलझाया गया है।
| विषय | जानकारी (दिल्ली/IST) |
|---|---|
| नरक चतुर्दशी (अभ्यंग स्नान) | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
| अभ्यंग स्नान मुहूर्त | सुबह 5:41 से 6:38 बजे (सूर्योदय 6:38) |
| चतुर्दशी तिथि | 7 नवंबर सुबह 10:47 से 8 नवंबर सुबह 11:27 तक |
| छोटी दिवाली / काली चौदस (शाम की रस्म) | शनिवार, 7 नवंबर (परंपरा के अनुसार बदल सकती है) |
| यम दीपम | परंपरा में धनतेरस की शाम (6 नवंबर); कुछ घरों में चतुर्दशी की शाम (7 नवंबर) |
| अगले दिन | दिवाली और लक्ष्मी पूजा, 8 नवंबर की शाम |
अंतिम जाँच: 27 अक्टूबर 2026। समय दिल्ली के हैं और शहर के अनुसार बदलते हैं। अपने शहर का सूर्योदय और मुहूर्त drikpanchang.com पर जाँचें।
7 नवंबर या 8 नवंबर: भ्रम क्यों है और सही क्या है
भ्रम की जड़ यह है कि चतुर्दशी तिथि दो दिनों में फैली है। यह 7 नवंबर को सुबह 10:47 पर शुरू होती है और 8 नवंबर को सुबह 11:27 पर खत्म होती है। यानी 7 नवंबर की पूरी शाम और रात चतुर्दशी में आती है और 8 नवंबर की सुबह भी।
अब नियम देखिए। नरक चतुर्दशी का मुख्य काम अभ्यंग स्नान है, जो सूर्योदय से पहले होता है। 8 नवंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी मौजूद है (क्योंकि वह 11:27 तक चलती है), इसलिए स्नान 8 नवंबर की सुबह होगा। जबकि 7 नवंबर की सुबह चतुर्दशी लगी ही नहीं थी (वह 10:47 पर शुरू होती है), इसलिए उस सुबह स्नान नहीं।
दूसरी तरफ छोटी दिवाली और काली चौदस की रस्में शाम या रात की हैं। जो रात चतुर्दशी में पूरी तरह पड़ती है, वह 7 नवंबर की है, क्योंकि 8 नवंबर की शाम तक चतुर्दशी खत्म हो चुकी है और अमावस्या आ गई है। इसलिए शाम के दीये 7 नवंबर को जलाने का चलन है। संक्षेप में:
- सुबह का अभ्यंग स्नान: 8 नवंबर।
- शाम के दीये, छोटी दिवाली और काली चौदस: 7 नवंबर (अनेक पंचांगों के अनुसार)।
- दिवाली लक्ष्मी पूजा: 8 नवंबर की शाम।
सच यह है कि दोनों तारीखें अलग-अलग रस्मों के लिए सही हैं, इसलिए जो वेबसाइट सिर्फ एक तारीख लिखती है, वह अधूरी बात बताती है। अपने कुल या पुरोहित की परंपरा हो तो वही मानें।
अभ्यंग स्नान क्या है और कैसे करें
अभ्यंग का अर्थ है शरीर पर तेल की मालिश। इस दिन सूर्योदय से पहले, तारों की छाँव में तेल लगाकर स्नान किया जाता है। मान्यता है कि इस स्नान से शरीर शुद्ध होता है और पूरे साल स्वास्थ्य और सौभाग्य बना रहता है। ठंड की शुरुआत में तेल की मालिश वैसे भी त्वचा के लिए अच्छी रहती है।
- 8 नवंबर की सुबह 5:41 से 6:38 के बीच उठें (दिल्ली)।
- तिल का तेल या सरसों का तेल पूरे शरीर पर हल्के हाथ से लगाएँ।
- उबटन के लिए बेसन, हल्दी और दही-दूध का लेप भी लगाने की परंपरा है।
- कुछ मिनट बाद गुनगुने पानी से स्नान करें।
- कई परिवार जल में अपामार्ग (चिचड़ी) की टहनी का स्पर्श या प्रयोग करते हैं। यह क्षेत्रीय रिवाज है, अनिवार्य नहीं।
- स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और ईश्वर को प्रणाम करें।
याद रखें कि अपने शहर में सूर्योदय के समय से पहले स्नान पूरा होना चाहिए। इसलिए अपने शहर का सूर्योदय देखकर समय थोड़ा आगे-पीछे कर लें।
छोटी दिवाली क्या है और इस दिन क्या करें
नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली इसलिए कहते हैं क्योंकि यह मुख्य दिवाली से ठीक पहले की रात होती है, और इसी दिन से घर में दीप जलाने की शुरुआत हो जाती है। कई जगह इसे रूप चौदस कहा जाता है। यही दिन पश्चिम और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में काली चौदस के रूप में भी मनाया जाता है।
- शाम को घर के मुख्य द्वार, आँगन और रसोई में दीये रखें।
- घर का कोना-कोना साफ और रोशन रखें।
- कई परिवार हनुमान जी की पूजा करते हैं, और कुछ जगह काली चौदस पर माँ काली या कुल देवता की पूजा होती है। यह परंपरा पर निर्भर है।
- तैयारी के लिए रंगोली, सजावट और मिठाई का काम आज निपटा लें।
यम दीपम: दीया किसके लिए और कब
यम दीपम में यमराज को समर्पित एक दीया घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है, ताकि अकाल मृत्यु का भय दूर रहे। पारंपरिक रूप से यह दीप धनतेरस की शाम (6 नवंबर) को जलाया जाता है, पर कुछ घरों में चतुर्दशी की शाम (7 नवंबर) को भी रखा जाता है। इसलिए अपने परिवार की रीति देखें। दीया सुरक्षित जगह रखें जहाँ आग का खतरा न हो।
नरक चतुर्दशी की कथा (संक्षेप में)
लोकप्रिय कथा के अनुसार नरकासुर नाम का एक अत्याचारी असुर था, जिसने हजारों कन्याओं को बंदी बना रखा था। भगवान कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से उसका वध किया और बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया। मरते समय नरकासुर ने वरदान माँगा कि उसकी मृत्यु का दिन शोक में नहीं, बल्कि प्रकाश और उत्सव के साथ मनाया जाए। इसीलिए इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान और शाम को दीपदान होता है। कुछ क्षेत्रों में कथाएँ थोड़ी अलग हैं, जैसे बलि और वामन की कथा।
पाँच दिन की दिवाली में नरक चतुर्दशी का स्थान
| दिन | पर्व | तारीख 2026 |
|---|---|---|
| 1 | धनतेरस | शुक्रवार, 6 नवंबर |
| 2 | नरक चतुर्दशी (स्नान) / छोटी दिवाली (शाम) | रविवार, 8 नवंबर (स्नान); शनिवार, 7 नवंबर (शाम की रस्म) |
| 3 | दिवाली, लक्ष्मी पूजा | रविवार, 8 नवंबर |
धनतेरस के बाद का दिन कई पंचांगों में अलग-अलग गिना जाता है, इसलिए तालिका सिर्फ इन तीन मुख्य बिंदुओं को दिखाती है।
अगला कदम
स्नान और दीये के बाद अगले दिन की बड़ी पूजा की तैयारी करें। पूजा की सामग्री और क्रम लक्ष्मी पूजा विधि में है और शहर का समय दिवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त में। बच्चों के लिए दिवाली पर निबंध भी देखें।
निष्कर्ष
याद रखने का सरल सूत्र: सुबह का स्नान 8 नवंबर को, शाम के दीये 7 नवंबर को, और लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर की शाम। अपनी परंपरा और शहर के सूर्योदय का ध्यान रखें, बाकी सब आसान है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नरक चतुर्दशी 2026 में कब है?
रविवार, 8 नवंबर 2026 को। अभ्यंग स्नान का मुहूर्त दिल्ली में सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक है।
छोटी दिवाली 7 नवंबर को है या 8 को?
अधिकतर पंचांगों में छोटी दिवाली और काली चौदस की शाम की रस्म 7 नवंबर को है, क्योंकि उस शाम चतुर्दशी पूरी तरह रहती है। स्नान 8 नवंबर की सुबह होता है।
अभ्यंग स्नान कब करें?
8 नवंबर की सुबह सूर्योदय से पहले। दिल्ली में सूर्योदय 6:38 बजे है, अपने शहर का समय देख लें।
यम दीपम कब जलाएँ?
पारंपरिक रूप से धनतेरस की शाम, यानी 6 नवंबर को। कुछ घरों में चतुर्दशी की शाम भी जलाते हैं, इसलिए अपनी परंपरा देखें।
नरक चतुर्दशी की कथा क्या है?
कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध करके बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया था। उसी की याद में यह पर्व मनाया जाता है।
क्या नरक चतुर्दशी और काली चौदस एक ही हैं?
लगभग एक ही चतुर्दशी तिथि पर पड़ते हैं, पर रस्में अलग हैं। नरक चतुर्दशी में सुबह स्नान और दीपदान होता है, जबकि काली चौदस पर कई जगह काली या हनुमान जी की रात्रि-पूजा होती है।



