माँ दुर्गा (Durga Kshama Prarthna Stotram)

Durga Aparadh Kshama Stotram in Hindi | माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रम् (Lyrics)

माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रम् (Durga Aparadh Kshama Stotram) पूजा में हुई भूल-चूक के लिए देवी से क्षमा माँगने वाला संस्कृत स्तोत्र है। परंपरा में इसे आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है और पूजा के अंत में पढ़ा जाता है। इस पेज पर पूरा पाठ, पाठ की विधि और FAQ दिए गए हैं।

माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रम् एक नज़र में

  • पाठ: माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रम्
  • देवता: माँ दुर्गा
  • कब पढ़ें: दुर्गा पूजा के अंत में, नवरात्रि में विशेष रूप से

माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रम् का पाठ (Durga Aparadh Kshama Stotram Lyrics)

माँ दुर्गा की पूजा समाप्ति पर करें ये स्तुति, तथा पूजा में हुई त्रुटि के अपराध से मुक्ति पाएँ।

श्री देव्यापराध क्षमापन स्तोत्रं ॥
न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो
न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा: ।
न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं
परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥ 1 ॥

विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया
विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् ।
तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥ 2 ॥

पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहव: सन्ति सरला:
परं तेषां मध्ये विरलतरलोSहं तव सुत: ।
मदीयोSयं त्याग: समुचितमिदं नो तव शिवे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥ 3 ॥

जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता
न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया ।
तथापि त्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥ 4 ॥

परित्यक्ता देवा विविधविधिसेवाकुलतया
मया पंचाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि ।
इदानीं चेन्मातस्तव यदि कृपा नापि भविता
निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम् ॥ 5 ॥

श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा
निरातंको रंको विहरति चिरं कोटिकनकै: ।
तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं
जन: को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ ॥ 6 ॥

चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो
जटाधारी कण्ठे भुजगपतिहारी पशुपति: ।
कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं
भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम् ॥ 7 ॥

न मोक्षस्याकाड़्क्षा भवविभववाण्छापि च न मे
न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुन: ।
अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै
मृडानी रुद्राणी शिव शिव भवानीति जपत: ॥ 8 ॥

नाराधितासि विधिना विविधोपचारै:
किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभि: ।
श्यामे त्वमेव यदि किंचन मय्यनाथे
धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ॥ 9 ॥

आपत्सु मग्न: स्मरणं त्वदीयं
करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।
नैतच्छठत्वं मम भावयेथा:
क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥ 10 ॥

जगदम्ब विचित्रमत्र किं
परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि ।
अपराधपरम्परावृतं
न हि माता समुपेक्षते सुतम् ॥ 11 ॥

मत्सम: पातकी नास्ति
पापघ्नी त्वत्समा न हि ।
एवं ज्ञात्वा महादेवि
यथा योग्यं तथा कुरु ॥ 12 ॥

इति श्रीमच्छंकराचार्यकृतं देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्।

पाठ कैसे करें

सुबह स्नान के बाद साफ़ स्थान पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ। फिर श्रद्धा और शांत मन से पाठ करें। नियम और संख्या अपनी परिवार परंपरा या किसी जानकार की सलाह से तय करें।

पाठ के लाभ (मान्यता के अनुसार)

मान्यता है कि पूजा के अंत में श्रद्धा से यह स्तोत्र पढ़ने पर पूजा में रही भूल-चूक के लिए देवी से क्षमा की प्रार्थना पूरी होती है। यह आस्था पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रम् क्या है?

यह पूजा में हुई भूल-चूक के लिए माँ दुर्गा से क्षमा माँगने वाला संस्कृत स्तोत्र है।

माँ दुर्गा देव्यापराध क्षमा प्रार्थना स्तोत्रम् का पाठ कब करें?

परंपरा में दुर्गा पूजा या पाठ के अंत में, विशेष रूप से नवरात्रि में।

क्या इसे रोज़ पढ़ सकते हैं?

हाँ, श्रद्धालु इसे रोज़ की पूजा में भी पढ़ते हैं। इसके लिए कोई कठोर नियम नहीं माना जाता।

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नोट: यहाँ बताए गए लाभ और नियम धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।