संपादक को पत्र लिखने के लिए ऊपर संपादक का पद और समाचार पत्र का नाम लिखें, फिर विषय की एक पंक्ति, उसके बाद सम्मानपूर्वक अपनी बात रखें और अंत में अपना नाम और पता दें। प्रदूषण जैसे मुद्दे पर पत्र तभी असर करता है जब उसमें समस्या, कारण और सुझाव तीनों छोटे और साफ़ ढंग से हों।
संपादक को पत्र का प्रारूप
यह एक औपचारिक पत्र है। इसमें कोई भूमिका नहीं बाँधी जाती और भाषा संयमित रहती है। सामान्य ढाँचा इस प्रकार है।
| क्रम | भाग |
|---|---|
| 1 | प्रेषक का पता और तारीख |
| 2 | सेवा में, संपादक महोदय, [समाचार पत्र का नाम], [शहर] |
| 3 | विषय: एक पंक्ति में समस्या |
| 4 | महोदय, फिर मुख्य बात के दो-तीन अनुच्छेद |
| 5 | धन्यवाद, भवदीय और नाम |
नमूना 1: वायु प्रदूषण पर पत्र
[अपना पता]
[तारीख]
सेवा में,
संपादक महोदय,
[समाचार पत्र का नाम],
[शहर]
विषय: हमारे क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण के संबंध में।
महोदय,
आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के माध्यम से मैं संबंधित अधिकारियों और आम नागरिकों का ध्यान [क्षेत्र का नाम] में बढ़ते वायु प्रदूषण की ओर दिलाना चाहता हूँ। पिछले कुछ समय से सुबह-शाम हवा में धुएँ और धूल की परत दिखाई देती है। बच्चों और बुज़ुर्गों को आँखों में जलन और साँस लेने में कठिनाई की शिकायत रहती है।
इसके मुख्य कारण सड़कों पर वाहनों की भीड़, खुले में कचरा जलाना और निर्माण कार्य से उड़ती धूल हैं। यदि समय रहते ध्यान न दिया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
मेरा सुझाव है कि कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए, निर्माण स्थलों पर धूल ढकने का प्रबंध हो, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाया जाए और अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएँ।
आशा है आप इस पत्र को अपने पाठकों के पत्र स्तंभ में स्थान देंगे।
धन्यवाद सहित,
भवदीय,
[अपना नाम]
[पता और संपर्क]
नमूना 2: ध्वनि प्रदूषण पर छोटा पत्र
सेवा में,
संपादक महोदय,
[समाचार पत्र का नाम]
विषय: ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के बारे में।
महोदय,
हमारे मोहल्ले में देर रात तक तेज़ आवाज़ में लाउडस्पीकर और डीजे बजाए जाते हैं। इससे परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों, मरीज़ों और बुज़ुर्गों को बहुत परेशानी होती है। मेरा निवेदन है कि प्रशासन इस पर ध्यान दे और आयोजक भी दूसरों की सुविधा का ख्याल रखें।
भवदीय,
[अपना नाम]
नमूना 3: जल प्रदूषण पर पत्र
महोदय,
हमारे गाँव और शहर के पास बहने वाली [नदी/तालाब का नाम] में कचरा और गंदा पानी डाला जा रहा है। इससे पानी बदबूदार हो गया है और मछलियों तथा आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। कृपया इस विषय को अपने समाचार पत्र में उठाएँ, ताकि सफ़ाई की दिशा में कदम उठाए जा सकें।
भवदीय,
[अपना नाम]
लिखते समय ध्यान रखें
- विषय एक पंक्ति का और सीधा होना चाहिए।
- किसी व्यक्ति पर आरोप न लगाएँ, समस्या और समाधान पर बात करें।
- पत्र छोटा रखें, क्योंकि अख़बार में जगह सीमित होती है।
- सुझाव व्यावहारिक हों, जैसे पेड़ लगाना या कचरा अलग करना।
- परीक्षा में अपने असली नाम की जगह क, ख या दिए गए नाम का प्रयोग करें।
प्रभावी पत्र की पहचान
अख़बार के संपादक के पास रोज़ बहुत पत्र आते हैं, इसलिए वही पत्र छपते हैं जो छोटे, सटीक और जनहित से जुड़े हों। पत्र की पहली पंक्ति में ही बता दें कि आप किस समस्या पर लिख रहे हैं। उसके बाद एक-दो तथ्य दें, जैसे समस्या कब से है, किस क्षेत्र में है और किसे प्रभावित कर रही है। अंत में एक ठोस अपील करें, जैसे [संबंधित विभाग] से कार्रवाई की माँग। भावनाओं के साथ तथ्य भी रखें, तो पत्र गंभीर लगता है। भाषा में कटुता न हो और किसी संस्था को बुरा-भला न कहा जाए। यदि आप विद्यार्थी हैं, तो यही ढाँचा पर्यावरण से जुड़े किसी भी विषय पर काम आएगा, जैसे प्लास्टिक का उपयोग, पेड़ों की कटाई या यातायात की भीड़।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
संपादक को पत्र कौन-सा पत्र है?
यह औपचारिक पत्र है, जो किसी सार्वजनिक समस्या की ओर ध्यान दिलाने के लिए अख़बार के संपादक को लिखा जाता है।
पत्र में विषय कैसे लिखें?
‘विषय:’ के बाद एक पंक्ति में समस्या बताएँ, जैसे ‘क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के संबंध में’।
पत्र का अंत कैसे करें?
‘धन्यवाद सहित, भवदीय’ लिखकर अपना नाम और पता लिखें।
प्रदूषण पर पत्र में सुझाव देना ज़रूरी है?
हाँ, समस्या के साथ दो-तीन व्यावहारिक सुझाव देने से पत्र अधिक प्रभावी बनता है।



