लालू प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित नेताओं में से एक हैं। वे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। इस लेख में उनके जीवन, राजनीतिक सफर और प्रमुख पदों की जानकारी दी गई है।
लालू प्रसाद यादव: एक नज़र में
- जन्म: 11 जून 1948, फुलवरिया, गोपालगंज (बिहार)
- शिक्षा: बीए (पटना विश्वविद्यालय) और एलएलबी (पटना लॉ कॉलेज)
- पार्टी: राष्ट्रीय जनता दल (राजद), स्थापना 1997
- पत्नी: राबड़ी देवी
शुरुआती जीवन और छात्र राजनीति
पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। वे विश्वविद्यालय के छात्र संघ के महासचिव (1970-71) और अध्यक्ष (1973-74) रहे। 1974 में वे जयप्रकाश नारायण के बिहार आंदोलन से जुड़े।
संसद और विधानसभा तक का सफर
1977 में वे छपरा से लोकसभा के लिए चुने गए, तब उनकी उम्र करीब 29 साल थी। बाद में वे बिहार की राजनीति में लौटे और राज्य के बड़े नेता के रूप में उभरे।
बिहार के मुख्यमंत्री
वे 10 मार्च 1990 से जुलाई 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। 1997 में जनता दल में टूट के बाद उन्होंने राजद बनाई और उसी साल राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं।
केंद्रीय रेल मंत्री
मई 2004 से मई 2009 तक वे यूपीए सरकार में रेल मंत्री रहे।
कानूनी मामले
चारा घोटाले के कई मामलों में अदालतों ने उन्हें दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई। 2013 की दोषसिद्धि के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त हुई। अप्रैल 2021 में झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी। मामलों की ताज़ा स्थिति के लिए अदालत के आदेश और विश्वसनीय समाचार स्रोत देखें।
परिवार और राजद की भूमिका
उनके बेटे तेजस्वी यादव राजद के प्रमुख चेहरे हैं। 2025 के बिहार चुनाव में राजद को 25 सीटें मिलीं।
उनकी राजनीति पर समर्थकों और आलोचकों की राय अलग-अलग है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लालू प्रसाद यादव का जन्म कब और कहाँ हुआ? उनका जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गाँव में हुआ।
लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री कब रहे? वे मार्च 1990 से जुलाई 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद राबड़ी देवी ने यह पद संभाला।
लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री कब रहे? वे मई 2004 से मई 2009 तक यूपीए सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री रहे।
राजद की स्थापना कब हुई? राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना 1997 में हुई और लालू प्रसाद यादव उसके अध्यक्ष बने।
लालू प्रसाद यादव को अदालत से क्या सज़ा मिली? चारा घोटाले के कई मामलों में अदालतों ने उन्हें दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई। 2013 की दोषसिद्धि के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता चली गई। 2021 में झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी।



