काली पूजा और जगद्धात्री पूजा 2026 कोलकाता पंडाल गाइड का बैनर

काली पूजा और जगद्धात्री पूजा 2026: कोलकाता पंडाल गाइड, तारीख और कहाँ जाएँ

कोलकाता में दुर्गा पूजा के बाद सबसे बड़ी रौनक कार्तिक अमावस्या की रात होती है, जब दिवाली के साथ-साथ पूरे बंगाल में माँ काली की पूजा होती है। इसके कुछ दिन बाद जगद्धात्री पूजा आती है, जिसका सबसे बड़ा केंद्र चंदननगर माना जाता है। इस गाइड में 2026 की तारीखें, घूमने की जगहें और ज़रूरी सावधानियाँ सरल हिंदी में दी गई हैं।

2026 की तारीखें एक नज़र में

  • काली पूजा 2026: रविवार, 8 नवंबर 2026 (दिवाली वाली अमावस्या की रात)। मुख्य पूजा निशीथ काल यानी आधी रात के आसपास होती है, इसलिए सही समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखें; कुछ जगह पूजा 9 नवंबर की शुरुआती घड़ियों तक चल सकती है।
  • जगद्धात्री पूजा 2026: बुधवार, 18 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल नवमी, जो अक्षय नवमी के साथ पड़ती है)। नवमी तिथि नई दिल्ली के समय के अनुसार 18 नवंबर को सुबह 6:04 बजे से 19 नवंबर को सुबह 7:05 बजे तक बताई गई है। बंगाल के पंचांग और पूजा समितियाँ अलग गणना मान सकती हैं, इसलिए स्थानीय घोषणा ज़रूर देखें।

ध्यान दें: एक कैलेंडर साइट जगद्धात्री पूजा की तारीख 17 नवंबर बताती है, जबकि दूसरे पंचांग स्रोत 18 नवंबर देते हैं। चंदननगर में उत्सव कई दिन चलता है, इसलिए दर्शन की योजना 16 से 19 नवंबर के बीच आराम से बनाई जा सकती है, पर समितियों का कार्यक्रम पहले देख लें।

काली पूजा क्या है और बंगाल में कैसे अलग है

बंगाल में कार्तिक मास की अमावस्या की रात माँ काली की पूजा की जाती है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में उसी रात लक्ष्मी पूजा का चलन ज़्यादा है। घरों में, मंदिरों में और मोहल्ले की समितियों के पंडालों में बड़ी प्रतिमाएँ स्थापित होती हैं। रात भर पूजा चलती है और श्यामा संगीत गूँजता है। मान्यता है कि माँ काली बुराई का नाश करने वाली शक्ति का रूप हैं।

कोलकाता में कहाँ जाएँ: काली पूजा

1. कालीघाट काली मंदिर (दक्षिण कोलकाता)

यह कोलकाता के सबसे पुराने और प्रसिद्ध काली स्थलों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहाँ काली पूजा के दिन माँ की पूजा लक्ष्मी रूप में भी होती है। दिवाली और काली पूजा के दिन यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है, इसलिए सुबह जल्दी पहुँचना बेहतर रहता है।

2. दक्षिणेश्वर काली मंदिर

हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित यह मंदिर श्री रामकृष्ण परमहंस से जुड़ा है। त्योहार के दिन यहाँ सुबह से ही लंबी कतार लग जाती है और दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती जाती है।

3. कालीघाट-चेतला इलाके के क्लब पंडाल

एक यात्रा ब्लॉग के अनुसार कालीघाट और चेतला के आसपास कई क्लब अलग-अलग रूपों की काली प्रतिमाएँ बनवाते हैं, जैसे चेतला अग्रणी क्लब, कालीघाट यंगसमेन और संगठनी क्लब। यह जानकारी एक ही स्रोत पर आधारित और पुराने सालों की है। हर साल थीम, प्रतिमा और जगह बदल सकती है, इसलिए जाने से पहले समितियों के ताज़ा अपडेट देख लें।

इसके अलावा कोलकाता के कई इलाकों में मोहल्ले की समितियाँ सजे हुए पंडालों में बड़ी काली प्रतिमाएँ लगाती हैं, जहाँ रात में हज़ारों लोग आते हैं। हमने इस गाइड में केवल वही नाम दिए हैं जो कम से कम एक भरोसेमंद स्रोत में मिले।

जगद्धात्री पूजा: कहाँ जाएँ

चंदननगर (हुगली ज़िला)

जगद्धात्री पूजा का सबसे बड़ा केंद्र चंदननगर है, जो कोलकाता से लगभग 49 किलोमीटर दूर है। यह पुरानी फ्रांसीसी बस्ती रहा है। यहाँ बारोवारी पूजाएँ, ऊँची प्रतिमाएँ (कुछ लगभग 30 फीट तक), बड़े रोशनी के डिज़ाइन और विसर्जन की शोभायात्रा के लिए प्रसिद्ध हैं। वहाँ उत्सव सप्तमी से चार दिन चलता है।

कृष्णनगर (नदिया ज़िला)

एक स्रोत के अनुसार कृष्णनगर की परंपरा 18वीं सदी में नदिया के महाराजा कृष्णचंद्र राय से जुड़ी बताई जाती है और यह जगह मिट्टी की मूर्तिकला के लिए जानी जाती है।

कोलकाता शहर में जगद्धात्री पूजा के विशेष पंडालों के नाम हम किसी भरोसेमंद स्रोत से पुष्ट नहीं कर पाए, इसलिए यहाँ कोई सूची नहीं दी जा रही। दर्शन के लिए चंदननगर को एक दिन की यात्रा के रूप में सोचना बेहतर रहेगा।

जगद्धात्री माँ कौन हैं

जगद्धात्री को माँ दुर्गा का ही एक रूप माना जाता है। उनके चार हाथों में शंख, चक्र, धनुष और बाण दिखाए जाते हैं, वे लाल वस्त्र पहनती हैं और शेर पर विराजमान होती हैं, जो हाथी पर खड़ा होता है। नाम का अर्थ है “जगत को धारण करने वाली”। परंपरा के अनुसार यह पूजा कार्तिक शुक्ल नवमी को होती है।

पंडाल घूमने की ज़रूरी टिप्स

  • रात की भीड़ से बचने के लिए शाम जल्दी निकलें और बच्चों व बुज़ुर्गों के साथ भीड़ वाले इलाकों से दूरी रखें।
  • मोबाइल, पर्स और गहनों का ध्यान रखें; साथ में कम से कम सामान रखें।
  • पुलिस और पूजा समितियों की ट्रैफ़िक व्यवस्था की घोषणाएँ देखें, क्योंकि कई सड़कें बंद या एकतरफ़ा हो सकती हैं।
  • मौसम का अंदाज़ा पहले लगाएँ; पिछले सालों में बारिश ने भी भीड़ पर असर डाला है।
  • पंडाल के पास पटाखों और खुली लपटों से सावधान रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

2026 में काली पूजा कब है?

काली पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। मुख्य पूजा आधी रात के निशीथ काल में होती है।

2026 में जगद्धात्री पूजा कब है?

अधिकतर पंचांग स्रोत इसे बुधवार, 18 नवंबर 2026 बताते हैं। एक कैलेंडर साइट 17 नवंबर लिखती है, इसलिए स्थानीय समिति की घोषणा देखें।

क्या काली पूजा और दिवाली एक ही दिन हैं?

2026 में हाँ, दोनों 8 नवंबर की अमावस्या की रात को मनाए जाते हैं। बंगाल में उस रात काली पूजा होती है और बाकी जगहों पर लक्ष्मी पूजा।

कोलकाता में काली पूजा के लिए सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन से हैं?

कालीघाट काली मंदिर और दक्षिणेश्वर काली मंदिर सबसे ज़्यादा जाने जाते हैं।

जगद्धात्री पूजा देखने कहाँ जाएँ?

चंदननगर इसके लिए सबसे प्रसिद्ध है। कृष्णनगर में भी इसकी परंपरा बताई जाती है।

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