गंगा माता की आरती ॐ जय गंगे माता का हिंदी बैनर

Ganga Aarti Lyrics in Hindi | गंगा माता की आरती (ॐ जय गंगे माता)

गंगा आरती क्या है

ॐ जय गंगे माता माँ गंगा को समर्पित सबसे लोकप्रिय आरती है। हिंदू परंपरा में गंगा को सिर्फ़ एक नदी नहीं, बल्कि माँ का दर्जा दिया गया है। इसी भाव से हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी के घाटों पर संध्या के समय दीपों की थालियों के साथ यह आरती गाई जाती है। पाँच छोटे पदों में बँधी यह रचना इतनी सरल है कि एक-दो बार सुनने भर से याद हो जाती है।

आरती का सार एक ही बात में समाया है: जो भी श्रद्धा से माँ की शरण में आता है, माँ उसे जीवन के भय और बंधनों से पार लगा देती हैं। इस पेज पर आपको पूरी आरती, हर पद का सरल अर्थ, गाने की विधि, मान्यताएँ और आम सवालों के जवाब एक जगह मिलेंगे। चाहें तो इसे प्रिंट करके अपनी पूजा-पुस्तिका में भी रख सकते हैं। माँ की स्तुति का चालीसा रूप पढ़ना हो तो हमारी गंगा चालीसा भी देखें।

ॐ जय गंगे माता: आरती के पूरे बोल

नीचे आरती उसी क्रम में दी गई है जिसमें इसे आमतौर पर गाया जाता है। हर पद के बाद “ॐ जय गंगे माता” की टेक दोहराई जाती है।

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता।
सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

नोट: अलग-अलग छपी पुस्तिकाओं में कुछ शब्द थोड़े भिन्न मिलते हैं, जैसे “एक बार जो प्राणी” की जगह “एक ही बार जो तेरी”, या “सेवक” की जगह “दास”। भाव सभी में एक ही है। आप अपने घर-परिवार में जो पाठ गाया जाता है, उसी को अपनाएँ।

आरती का सरल अर्थ

पहला पद: “ॐ” परब्रह्म का प्रतीक है। भक्त कहता है कि हे माँ गंगे, आपकी जय हो। जो मनुष्य सच्चे मन से आपका ध्यान करता है, उसकी जायज़ मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

दूसरा पद: माँ की आभा चंद्रमा जैसी शीतल बताई गई है और उनका जल निर्मल है। जो भी पूरे विश्वास से आपकी शरण में आता है, वह संसार रूपी सागर से पार हो जाता है।

तीसरा पद: यह पद राजा सगर के पुत्रों की कथा की ओर संकेत करता है। कथा के अनुसार भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर आईं और सगर-पुत्रों का उद्धार हुआ। यह बात सारा संसार जानता है। भक्त कहता है कि आपकी कृपा-दृष्टि तीनों लोकों को सुख देने वाली है।

चौथा पद: जो प्राणी एक बार भी सच्चे भाव से आपकी शरण में आ जाए, उसका मृत्यु का भय मिट जाता है और वह श्रेष्ठ गति को प्राप्त करता है, ऐसी मान्यता है।

पाँचवाँ पद: अंत में फलश्रुति है। जो व्यक्ति रोज़ माँ की यह आरती गाता है, वह सेवक सहज ही मुक्ति का अधिकारी बनता है।

माँ गंगा से जुड़ी कथा और भाव

पुराणों में बताया गया है कि गंगा स्वर्ग से उतरकर पहले भगवान शिव की जटाओं में समाईं और फिर धीमी धारा बनकर धरती पर बहीं। इसीलिए गंगा के साथ शिव और विष्णु, दोनों की स्मृति जुड़ी है। इसी कथा के कारण आरती में बार-बार “तारना” और “तरना” जैसे शब्द आते हैं, यानी पार लगाना।

आज के समय में इस आरती का एक और अर्थ भी निकलता है। जिस नदी को हम माँ कहते हैं, उसे साफ़ रखना भी हमारी ज़िम्मेदारी है। घाट पर आरती के बाद फूल-पत्तों के दोने या प्लास्टिक पानी में न छोड़ें। श्रद्धा तभी पूरी मानी जाएगी जब माँ का जल निर्मल बना रहे।

गंगा आरती कब और कैसे करें

आमतौर पर गंगा आरती संध्या के समय की जाती है, जब घाटों पर दीप जलते हैं। घर पर आप सुबह या शाम किसी भी शांत समय पर कर सकते हैं। मान्यता है कि गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति और अमावस्या-पूर्णिमा पर माँ की पूजा विशेष फलदायी होती है।

  • स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और पूजा-स्थान पर शांत होकर बैठें।
  • तांबे या पीतल के पात्र में थोड़ा गंगाजल रखें और उसमें फूल की एक-दो पंखुड़ियाँ डालें।
  • घी का दीपक जलाएँ, धूप दिखाएँ और माँ गंगा का स्मरण करें।
  • थाली में दीपक रखकर आरती गाते हुए धीरे-धीरे घुमाएँ।
  • आरती के बाद जल का आचमन करें और परिवार में प्रसाद बाँटें।

यदि आप नदी किनारे हैं तो आरती के समय भीड़ और बहाव का ध्यान रखें, बच्चों और बुज़ुर्गों को किनारे से थोड़ा दूर बैठाएँ।

आरती पाठ के लाभ (मान्यता)

धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से गंगा आरती गाने या सुनने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक भाव बना रहता है। श्रद्धालु इसे पितरों की शांति, पापों के प्रायश्चित और मनोकामना-पूर्ति से जोड़कर देखते हैं। ये बातें आस्था पर आधारित हैं और किसी वैज्ञानिक दावे के रूप में नहीं कही जा रहीं। इतना ज़रूर है कि रोज़ कुछ मिनट दीप जलाकर शांत मन से गाने की आदत तनाव घटाने में सहायक लगती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

गंगा आरती कितनी देर की होती है?

घर पर पूरी आरती गाने में लगभग दो से तीन मिनट लगते हैं। घाटों की महाआरती में शंख, घंटे और दीप-अर्पण के साथ कुछ अधिक समय लग सकता है।

क्या घर पर गंगाजल के बिना आरती हो सकती है?

जी हाँ। भाव सबसे ज़रूरी है। माँ गंगा के चित्र या स्मरण के साथ दीपक जलाकर आरती की जा सकती है। गंगाजल हो तो पूजा में और अच्छा माना जाता है।

गंगा दशहरा कब मनाया जाता है?

यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा धरती पर अवतरित हुईं। सही तारीख हर साल पंचांग से देखें।

आरती में “पुत्र सगर के तारे” का क्या मतलब है?

इसका संकेत राजा सगर के साठ हज़ार पुत्रों की कथा से है, जिनके उद्धार के लिए भगीरथ गंगा को धरती पर लाए थे।

क्या महिलाएँ और बच्चे भी यह आरती गा सकते हैं?

बिल्कुल। यह आरती सभी के लिए है। बच्चों को सरल अर्थ बताते हुए साथ में गाने को कहें तो उन्हें याद भी जल्दी हो जाती है।

अन्य आरतियाँ पढ़ने के लिए माँ दुर्गा की आरती और लक्ष्मी चालीसा भी देख सकते हैं।