धनतेरस की कथा मुख्य रूप से दो कहानियों से बनती है: राजा हेम के पुत्र और यमराज की कथा, और समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने की कथा। इस वर्ष धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है, और दिल्ली में पूजा का मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे है। यहाँ दोनों कथाएँ सरल हिंदी में, उनका अर्थ और पूजा के समय कथा पढ़ने का तरीक़ा दिया गया है।
एक नज़र में
| बात | जानकारी |
|---|---|
| कथा किस दिन | कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, यानी धनतेरस, 6 नवंबर 2026 |
| कथाएँ | हेम राजा के पुत्र की कथा (यम दीपक) और धन्वंतरि की कथा (समुद्र मंथन) |
| पूजा मुहूर्त (दिल्ली) | शाम 6:02 से 7:57 बजे |
| कथा कब पढ़ें | पूजन और भोग के बाद, आरती से पहले |
अंतिम जाँच: 27 अक्टूबर 2026। यहाँ दिए सभी समय दिल्ली (IST) के हैं; आपके शहर में सूर्यास्त के हिसाब से कुछ मिनट से लेकर आधे घंटे तक का फ़र्क़ हो सकता है। अपने शहर का सही समय drikpanchang.com पर जाँचें।
कथाओं के अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़े भिन्न रूप मिलते हैं। नीचे जो कहानी दी गई है, वह सबसे प्रचलित सार है, पाठ का शब्दशः अनुवाद नहीं।
कथा 1: राजा हेम का पुत्र और यमराज
बहुत पहले हेम नाम के एक राजा थे। बहुत मन्नतों के बाद उनके घर पुत्र का जन्म हुआ। राजा के ज्योतिषियों ने कुंडली देखकर चेताया कि विवाह के चौथे दिन इस राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी।
यह सुनकर राजा बहुत व्यथित हुए। उन्होंने बेटे को ऐसी जगह रखा जहाँ किसी स्त्री की परछाईं तक न पहुँचे। पर नियति को कुछ और मंज़ूर था। एक राजकुमारी उस युवक से मिली और दोनों का विवाह हो गया।
विवाह के चौथे दिन यमदूत प्राण लेने आए। नवविवाहिता पत्नी का विलाप सुनकर दूत भी द्रवित हो गए। फिर भी वे अपना कर्तव्य निभाकर यमराज के पास लौट गए। उन्होंने यमराज से पूछा कि क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं है?
यमराज ने उत्तर दिया कि जो परिवार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की संध्या को मेरे नाम का दीपक दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाएगा, उसके यहाँ अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से यम दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है।
एक और प्रचलित रूप: कुछ स्थानों पर यह कथा पत्नी की सूझ-बूझ के साथ कही जाती है। वह रात भर जागी, द्वार पर सोने-चाँदी के गहनों का ढेर और ढेरों दीये रखे, और गीत-कहानियाँ सुनाती रही। कहा जाता है कि साँप के रूप में आए यम की आँखें उस चमक से चौंधिया गईं और वे सुबह तक वहीं बैठे रहे। यह रूप अलग-अलग लोक-कथाओं में थोड़े बदलाव के साथ मिलता है।
कथा 2: समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि
देवताओं और असुरों ने अमृत पाने के लिए मिलकर समुद्र का मंथन किया। इसी मंथन से एक के बाद एक कई रत्न निकले। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लिए सागर से प्रकट हुए।
धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य और आयुर्वेद का जनक माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से की जाती है। भारत में धनतेरस को कई जगह राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
धातु के पात्र ख़रीदने की परंपरा को भी इसी अमृत-कलश के प्रतीक से जोड़ा जाता है। ख़रीदारी की व्यावहारिक सलाह के लिए धनतेरस पर क्या खरीदें देखें।
इन कथाओं का अर्थ क्या है
- सुरक्षा और सजगता: यम दीपक हमें याद दिलाता है कि जीवन अनमोल है और परिवार की सुरक्षा के लिए सजग रहना ज़रूरी है।
- पत्नी की सूझ-बूझ: कथा बताती है कि संकट में धैर्य और विवेक सबसे बड़े हथियार हैं।
- पहला धन स्वास्थ्य है: धन्वंतरि की कथा बताती है कि पहले स्वास्थ्य, फिर धन। "पहला सुख निरोगी काया" की कहावत यहीं से जुड़ती है।
- प्रकाश का महत्व: अँधेरे में एक दीया भी रास्ता दिखाता है। यही दिवाली की भावना की शुरुआत है।
पूजा के समय कथा कैसे पढ़ें
- पूजन, भोग और दीप-प्रज्वलन पूरा करने के बाद आसन पर शांति से बैठें। पूजा-विधि का पूरा क्रम इस पेज पर है।
- परिवार के सब लोगों को पास बैठाएँ। बच्चों के लिए कथा को छोटे वाक्यों में सुनाएँ।
- पहले धन्वंतरि की कथा, फिर हेम राजा की कथा पढ़ें। या अपने घर की परंपरा के अनुसार क्रम रखें।
- हाथ में थोड़े अक्षत या फूल रखें। कथा के बाद उन्हें देवताओं को अर्पित कर दें।
- कथा के बाद आरती करें और प्रसाद बाँटें।
- कथा 10-15 मिनट में पूरी हो जाती है। यदि समय कम हो तो दोनों कथाएँ संक्षेप में सुनाएँ।
कथा की भाषा का कोई ख़ास नियम नहीं है। अपनी सहज हिंदी में सुनाना ठीक है, बशर्ते भाव श्रद्धा का हो। यदि आपके परिवार में पुस्तक या पुरोहित से कथा पढ़वाने की परंपरा है, तो उसे निभाएँ।
कथा को लेकर कुछ ईमानदार बातें
- पुराणों और लोक-कथाओं में हेम राजा के पुत्र की कथा के नाम और ब्योरे अलग-अलग मिलते हैं (कुछ स्थानों पर नाम हिम भी लिखा जाता है)।
- यह कथा लोक-परंपरा से प्रचलित रूप में मानी जाती है। इसकी ऐतिहासिक पुष्टि का कोई दावा नहीं किया जा रहा।
- कुछ घरों में यम दीपक धनतेरस पर और कुछ में नरक चतुर्दशी पर जलाया जाता है, इसलिए अपने घर की रीत पूछ लें।
कथा के बाद क्या करें
पूजा का मुहूर्त जानने के लिए शहर के अनुसार पूजा मुहूर्त खोलें। यम दीपक की सरल विधि पूजा विधि वाले पेज में दी गई है।
निष्कर्ष
धनतेरस की दोनों कथाएँ एक ही संदेश देती हैं: जीवन और स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन हैं, और उनकी रक्षा के लिए श्रद्धा, सजगता और प्रकाश ज़रूरी हैं। 6 नवंबर 2026 की शाम पूजा के समय परिवार के साथ ये कथाएँ पढ़ें या सुनाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
धनतेरस की कथा क्या है?
दो कथाएँ प्रचलित हैं: राजा हेम के पुत्र और यमराज की कथा, जिससे यम दीपक की परंपरा जुड़ी है, और समुद्र मंथन से धन्वंतरि के प्रकट होने की कथा।
धनतेरस पर यम दीपक क्यों जलाते हैं?
मान्यता है कि यमराज ने कहा था कि इस दिन संध्या को दक्षिण दिशा में उनके नाम का दीपक जलाने वाले परिवार में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
धन्वंतरि कौन हैं?
धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य और आयुर्वेद का जनक माना जाता है। मान्यता है कि वे समुद्र मंथन में अमृत कलश के साथ प्रकट हुए।
धनतेरस की कथा कब पढ़ें?
पूजन और भोग के बाद, आरती से पहले। दिल्ली में 6 नवंबर 2026 को पूजा का मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे है।
क्या कथा पढ़ना ज़रूरी है?
ज़रूरी नियम नहीं है, पर परंपरा में कथा सुनना-सुनाना पूजा का हिस्सा माना जाता है। इससे बच्चों को भी पर्व का अर्थ समझ आता है।
धनतेरस 2026 कब है?
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026। त्रयोदशी 6 नवंबर सुबह 10:30 से 7 नवंबर सुबह 10:47 तक है।



