Cholesterol Kya Hota Hai: प्रकार, कारण और जाँच

कई बार लिपिड प्रोफाइल की रिपोर्ट हाथ में आती है और उसमें LDL, HDL, ट्राइग्लिसराइड जैसे शब्द देखकर समझ नहीं आता कि चिंता करनी चाहिए या नहीं। अगर आप भी सोच रहे हैं कि cholesterol kya hota hai in hindi, तो यह लेख आपके लिए है। यहाँ हम सरल भाषा में कोलेस्ट्रॉल के प्रकार, कारण, जीवनशैली, जाँच और आम भ्रमों की बात करेंगे। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, इलाज की सलाह नहीं।

कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?

कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा वसीय (fatty) पदार्थ है जो हमारे खून में पाया जाता है। शरीर इसका इस्तेमाल कोशिकाएँ बनाने जैसे ज़रूरी कामों में करता है, इसलिए यह पूरी तरह "दुश्मन" नहीं है। समस्या तब बनती है जब खून में कुछ तरह की चर्बी (lipids) का संतुलन बिगड़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार खून में चर्बी का यह असंतुलन (dyslipidaemia) हृदय रोगों के प्रमुख बदले जा सकने वाले जोखिम कारकों में से एक है।

कोलेस्ट्रॉल के प्रकार: LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड

लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट में आमतौर पर ये चीज़ें दिखती हैं:

  • LDL ("बुरा" कोलेस्ट्रॉल): WHO के अनुसार यह रूप बीमारी से सबसे सीधे जुड़ा है। ज़्यादा LDL धमनियों में प्लाक जमने में योगदान दे सकता है, जिससे आगे चलकर दिल का दौरा या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। American Heart Association (AHA) के अनुसार ट्रांस और सैचुरेटेड फैट से भरपूर खानपान LDL बढ़ाने की प्रवृत्ति रखता है।
  • HDL ("अच्छा" कोलेस्ट्रॉल): AHA के अनुसार HDL का ऊँचा स्तर दिल के दौरे और स्ट्रोक से बचाव में मदद कर सकता है। आनुवंशिकता, डायबिटीज़, धूम्रपान, कम शारीरिक गतिविधि और मोटापा HDL को घटा सकते हैं।
  • ट्राइग्लिसराइड: यह शरीर में सबसे आम तरह की चर्बी है, जो भोजन से आती है और शरीर भी बनाता है। AHA के अनुसार इसका ऊँचा स्तर अक्सर ऊँचे कुल कोलेस्ट्रॉल, ऊँचे LDL, कम HDL, डायबिटीज़ या मेटाबॉलिक सिंड्रोम के साथ दिखता है।
  • कुल कोलेस्ट्रॉल: इन सबका मिला-जुला आँकड़ा।

रिपोर्ट के आम लक्ष्य (सामान्य जानकारी)

अमेरिकी NIH की MedlinePlus के अनुसार सामान्य तौर पर बताए जाने वाले लक्ष्य नीचे हैं। ये सबके लिए एक जैसे नहीं होते, क्योंकि हर व्यक्ति का कुल जोखिम (उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, धूम्रपान आदि) अलग होता है। WHO भी कहता है कि नतीजों को एक सार्वभौमिक सीमा की बजाय कुल हृदय-जोखिम के साथ देखा जाता है। इसलिए अपनी रिपोर्ट की व्याख्या डॉक्टर से ही करवाएँ।

जाँचसामान्य तौर पर बताया जाने वाला लक्ष्य (mg/dL)
कुल कोलेस्ट्रॉल200 से कम
LDLसामान्यतः 100 से कम (जोखिम के हिसाब से डॉक्टर कम लक्ष्य भी दे सकते हैं)
HDL60 या उससे अधिक बेहतर
ट्राइग्लिसराइड150 से कम

ध्यान दें कि कई भारतीय लैब mg/dL में ही रिपोर्ट देते हैं, फिर भी रिपोर्ट पर छपी "रेफरेंस रेंज" लैब के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण

WHO और MedlinePlus के अनुसार कारणों को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में समझा जा सकता है:

  • खानपान और जीवनशैली: सैचुरेटेड और ट्रांस फैट, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरी, कम शारीरिक गतिविधि, मोटापा। शराब ट्राइग्लिसराइड बढ़ा सकती है और तंबाकू HDL घटा सकता है।
  • दूसरी स्वास्थ्य स्थितियाँ: डायबिटीज़, थायरॉइड की सुस्ती (underactive thyroid), किडनी या लिवर की बीमारी, PCOS।
  • कुछ दवाएँ और आनुवंशिकता: कुछ दवाएँ लिपिड स्तर पर असर डाल सकती हैं, इसलिए अपनी मर्ज़ी से कोई दवा बंद न करें, डॉक्टर से बात करें। परिवार में बहुत ऊँचा कोलेस्ट्रॉल (familial hypercholesterolaemia) जन्म से हो सकता है, जिसमें जीवनशैली ठीक होने पर भी स्तर ऊँचा रह सकता है।

लक्षण: ज़्यादातर लोगों में कुछ महसूस नहीं होता

WHO के अनुसार ऊँचा कोलेस्ट्रॉल ज़्यादातर लोगों में "चुपचाप" रहता है, यानी कोई लक्षण नहीं दिखते। इसीलिए "मुझे तो कुछ महसूस नहीं होता" जाँच न करवाने की वजह नहीं होनी चाहिए। कुछ दुर्लभ मामलों में, ख़ासकर आनुवंशिक रूप में, पलकों के आसपास या नसों (tendons) पर चर्बी के जमाव दिख सकते हैं।

जाँच कब और कैसे करवाएँ?

जाँच को लिपिड प्रोफाइल कहते हैं, जो एक सामान्य खून की जाँच है। अलग-अलग संस्थाओं की सलाह थोड़ी अलग है, इसलिए अपने डॉक्टर से पूछना सबसे सही है:

  • MedlinePlus के अनुसार वयस्कों को पहली लिपिड प्रोफाइल लगभग 19 साल की उम्र तक करवा लेनी चाहिए, और नतीजे सामान्य हों तो हर 5 साल में दोबारा।
  • AHA के अनुसार 20 साल या उससे ऊपर के वयस्कों को, जोखिम कम होने पर, हर चार से छह साल में कोलेस्ट्रॉल जाँच करवानी चाहिए। ज़्यादा जोखिम वालों को ज़्यादा बार जाँच की ज़रूरत हो सकती है।
  • WHO के अनुसार नई गाइडलाइनें कई बार बिना खाली पेट रहे भी जाँच की अनुमति देती हैं, फिर भी आपके डॉक्टर या लैब ने फास्टिंग बताई हो तो उसी का पालन करें।
  • परिवार में बहुत ऊँचा कोलेस्ट्रॉल या कम उम्र में दिल का दौरा पड़ा हो, तो WHO के अनुसार जाँच और भी ज़रूरी है।

जाँच से पहले का छोटा चेकलिस्ट

  1. पूछें कि फास्टिंग ज़रूरी है या नहीं।
  2. जो दवाएँ और सप्लीमेंट आप लेते हैं, उनकी सूची साथ रखें।
  3. पिछली रिपोर्ट साथ ले जाएँ, ताकि तुलना हो सके।
  4. परिवार में हृदय रोग, डायबिटीज़ या स्ट्रोक का इतिहास लिखकर रखें।
  5. जाँच से ठीक पहले असामान्य दावत या शराब से बचें और डॉक्टर के निर्देश मानें।

जीवनशैली में क्या मदद कर सकता है?

WHO के अनुसार स्वस्थ खानपान, वजन नियंत्रण, नियमित व्यायाम, शराब सीमित करना और धूम्रपान छोड़ना LDL व ट्राइग्लिसराइड घटाने और HDL बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। MedlinePlus धूम्रपान छोड़ने को दिल के दौरे और स्ट्रोक का जोखिम घटाने के लिए "सबसे बड़े बदलावों में से एक" बताता है। भारतीय थाली में इसे ऐसे उतारा जा सकता है:

आदतभारतीय उदाहरण
सैचुरेटेड/ट्रांस फैट कमसमोसा, कचौरी, पकोड़े, बेकरी बिस्किट और वनस्पति से बनी चीज़ें कभी-कभार की चीज़ बनाएँ; ज़्यादा बार तला तेल दोबारा इस्तेमाल न करें
फाइबर बढ़ाएँदाल, चना, राजमा, ओट्स, दलिया, मोटे अनाज, सब्ज़ियाँ और साबुत फल
सब्ज़ी-फलWHO के अनुसार 10 साल से ऊपर के लोगों के लिए रोज़ कम से कम 400 ग्राम फल-सब्ज़ी
चलना-फिरनारोज़ टहलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, घर के काम में सक्रिय रहना
शराब-तंबाकूसीमित या बंद; बीड़ी-सिगरेट-गुटखा सब पर लागू

याद रखें, दवाएँ भी एक विकल्प हैं और वे कब, कौन-सी और कितनी लेनी हैं, यह केवल डॉक्टर तय करते हैं। WHO और MedlinePlus दोनों इसे जोखिम और रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर के निर्णय पर छोड़ते हैं।

आम गलतियाँ जो लोग करते हैं

  • रिपोर्ट एक बार सामान्य आने पर सालों तक दोबारा जाँच न करवाना, जबकि वजन या खानपान बदलने पर MedlinePlus जल्दी दोबारा जाँच की सलाह देता है।
  • सिर्फ़ कुल कोलेस्ट्रॉल देखना और LDL, HDL, ट्राइग्लिसराइड को अनदेखा करना।
  • घी या तेल पूरी तरह बंद करके दूसरी ओर रिफाइंड कार्ब और मिठाइयाँ बढ़ा देना।
  • सोशल मीडिया के "घरेलू नुस्खे" पर भरोसा करके डॉक्टर की दवा बंद कर देना।
  • सिर्फ़ मोटे लोगों को जाँच ज़रूरी समझना।

कोलेस्ट्रॉल से जुड़े मिथक और तथ्य

मिथकतथ्य
पतले लोगों का कोलेस्ट्रॉल ऊँचा नहीं होता।आनुवंशिकता और कई दूसरी स्थितियाँ वजन से स्वतंत्र असर डाल सकती हैं (WHO)। जाँच ही सही तरीका है।
लक्षण नहीं हैं तो सब ठीक है।WHO के अनुसार यह ज़्यादातर लोगों में बिना लक्षण का रहता है।
कोलेस्ट्रॉल सिर्फ़ बुज़ुर्गों की समस्या है।जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है, पर MedlinePlus में बच्चों की एक बार जाँच तक का ज़िक्र है। युवाओं को भी अपना जोखिम जानना चाहिए।
सारा कोलेस्ट्रॉल बुरा है।शरीर को कोलेस्ट्रॉल की ज़रूरत है; असंतुलन समस्या है और HDL को सुरक्षात्मक माना जाता है।

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

  • आपने कभी लिपिड प्रोफाइल करवाई ही नहीं है और आप 20 साल के आसपास या उससे ऊपर हैं।
  • रिपोर्ट में LDL या ट्राइग्लिसराइड ऊँचा या HDL कम आया है।
  • आपको डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉइड या किडनी की समस्या है।
  • परिवार में कम उम्र में दिल का दौरा, स्ट्रोक या बहुत ऊँचे कोलेस्ट्रॉल का इतिहास है।
  • पलकों के आसपास पीले जमाव दिखें।
  • आपातकाल: सीने में तेज़ दर्द या दबाव, साँस फूलना, पसीना या अचानक कमज़ोरी, बोलने में दिक्कत या चेहरा टेढ़ा होना जैसी स्थिति में तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएँ या एम्बुलेंस बुलाएँ, इंतज़ार न करें।

निष्कर्ष

कोलेस्ट्रॉल को समझना मुश्किल नहीं है: LDL को कम, HDL को बेहतर और ट्राइग्लिसराइड को नियंत्रण में रखने की कोशिश, साथ में नियमित जाँच। खानपान, चलना-फिरना और तंबाकू-शराब से दूरी सबसे ठोस शुरुआत है। अपनी रिपोर्ट के नंबर कभी अकेले न समझें, डॉक्टर के साथ बैठकर उनका मतलब निकालें।

स्रोत (सामान्य जानकारी के लिए): WHO Dyslipidaemia fact sheet, WHO Healthy diet fact sheet, MedlinePlus (NIH) High blood cholesterol levels, American Heart Association (heart.org) What your cholesterol levels mean.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?

कोलेस्ट्रॉल खून में पाया जाने वाला मोम जैसा वसीय पदार्थ है जिसकी शरीर को कुछ कामों के लिए ज़रूरत होती है। संतुलन बिगड़ने पर, ख़ासकर LDL बढ़ने पर, WHO के अनुसार हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है।

HDL और LDL में क्या फर्क है?

LDL को आमतौर पर बुरा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है क्योंकि वह धमनियों में प्लाक जमाने में योगदान देता है, जबकि HDL को सुरक्षात्मक माना जाता है और उसका ऊँचा स्तर बेहतर बताया जाता है (AHA, MedlinePlus)।

क्या ऊँचे कोलेस्ट्रॉल के लक्षण दिखते हैं?

WHO के अनुसार ज़्यादातर लोगों में कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए सिर्फ़ खून की जाँच से ही पता चलता है। यही कारण है कि नियमित जाँच ज़रूरी मानी जाती है।

कोलेस्ट्रॉल की जाँच कितने समय में करवानी चाहिए?

MedlinePlus के अनुसार सामान्य रिपोर्ट आने पर वयस्कों में लगभग हर 5 साल में, और AHA के अनुसार कम जोखिम में हर चार से छह साल में। अगर आपको डायबिटीज़ है या परिवार में इतिहास है तो डॉक्टर जल्दी-जल्दी जाँच बता सकते हैं।

क्या कोलेस्ट्रॉल सिर्फ़ खानपान से बढ़ता है?

नहीं। WHO और MedlinePlus के अनुसार खानपान के साथ आनुवंशिकता, डायबिटीज़, थायरॉइड, किडनी-लिवर की बीमारी, कुछ दवाएँ और निष्क्रिय जीवनशैली भी कारण हो सकती हैं।

क्या कोलेस्ट्रॉल घरेलू नुस्खों से ठीक हो जाता है?

कोई भी घरेलू नुस्खा इलाज नहीं है। संतुलित खानपान, व्यायाम और तंबाकू-शराब से दूरी मदद कर सकते हैं, पर दवा की ज़रूरत है या नहीं, यह डॉक्टर ही तय करेंगे।

अस्वीकरण

इस लेख की जानकारी केवल सामान्य शिक्षा और जागरूकता के लिए है। यह किसी योग्य डॉक्टर की सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। अपनी रिपोर्ट, दवा या जीवनशैली में कोई भी बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नज़दीकी अस्पताल से संपर्क करें। Yuva Digest इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी निर्णय की ज़िम्मेदारी नहीं लेता।