घर की छत पर सोलर

पीएम सूर्य घर योजना: सब्सिडी, रजिस्ट्रेशन, पूरी जानकारी

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में केंद्र सरकार घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने पर सब्सिडी देती है। पहले 2 किलोवाट पर 30,000 रुपये प्रति किलोवाट और तीसरे किलोवाट पर 18,000 रुपये मिलते हैं, यानी 3 किलोवाट या उससे बड़े सिस्टम पर अधिकतम 78,000 रुपये। रजिस्ट्रेशन pmsuryaghar.gov.in पर होता है। नीचे की सारी जानकारी अक्टूबर 2026 में आखिरी बार जांची गई है।

एक नज़र में: योजना की खास बातें

बातजानकारी
योजना का नामपीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
शुरुआतफरवरी 2024 (नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, MNRE); 29 फरवरी 2024 को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी
कुल खर्च (आउटले)75,021 करोड़ रुपये
लक्ष्य1 करोड़ घरों की छत पर सोलर
योजना की अवधिवित्त वर्ष 2026-27 यानी मार्च 2027 तक
अधिकतम केंद्रीय सब्सिडी78,000 रुपये प्रति घर (3 किलोवाट और उससे ऊपर)
आधिकारिक वेबसाइटpmsuryaghar.gov.in
आखिरी जांचअक्टूबर 2026

अगर आप पूछ रहे हैं कि सोलर पैनल सब्सिडी कितनी मिलेगी, रजिस्ट्रेशन कैसे करें, या बिजली कितनी मुफ्त होगी, तो आगे हर सवाल का सीधा जवाब मिलेगा।

सोलर पैनल सब्सिडी कितनी मिलेगी?

केंद्र सरकार की सब्सिडी पूरे देश में एक जैसी है। यह सिस्टम के आकार (किलोवाट) के हिसाब से तय होती है। पहले दो किलोवाट पर हर किलोवाट के 30,000 रुपये मिलते हैं, तीसरे किलोवाट पर 18,000 रुपये, और 3 किलोवाट के बाद कोई अतिरिक्त पैसा नहीं मिलता।

सिस्टम का आकारकेंद्र की सब्सिडीकैसे बनती है
1 किलोवाट30,000 रुपये30,000 प्रति किलोवाट
2 किलोवाट60,000 रुपये2 x 30,000
3 किलोवाट78,000 रुपये60,000 + तीसरे किलोवाट के 18,000
3 किलोवाट से ज्यादा78,000 रुपये (सीमा)इसके बाद कोई बढ़ोतरी नहीं

ध्यान रखिए कि सब्सिडी पूरा खर्च नहीं उठाती। एक 3 किलोवाट का घरेलू सिस्टम आमतौर पर सब्सिडी से काफी महंगा पड़ता है। एक बिज़नेस न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक सब्सिडी से पहले इसकी लागत डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच हो सकती है। दाम शहर, पैनल की कंपनी और छत के प्रकार के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए पोर्टल पर दर्ज वेंडरों से दो-तीन कोटेशन जरूर लें।

कई राज्य अपनी तरफ से भी अलग सब्सिडी जोड़ते हैं। उसके लिए हमारी राज्यवार सोलर सब्सिडी वाली गाइड देखें, जहां दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की जानकारी है।

कितनी बिजली मुफ्त मिलेगी?

योजना का वादा है कि एक परिवार को हर महीने 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिल सकती है। इसका मतलब यह है कि अगर आपके घर की जरूरत के हिसाब से सही आकार का सोलर सिस्टम लगा है, तो वह इतनी बिजली पैदा करके आपका बिल लगभग शून्य के करीब ला सकता है। असल बचत आपके सिस्टम के आकार, धूप और बिजली खपत पर निर्भर करती है। मोटे तौर पर 1 किलोवाट का सिस्टम छोटे परिवार के लिए, 2 किलोवाट मध्यम खपत के लिए और 3 किलोवाट ज्यादा खपत वाले घर के लिए ठीक माना जाता है, पर सही आकार वेंडर से अपना पिछला बिल दिखाकर तय करवाइए।

कौन आवेदन कर सकता है? (पात्रता)

  • आप भारत के नागरिक हों।
  • आपके पास अपना घर हो और उसकी छत पर सोलर पैनल लगाने लायक जगह हो।
  • आपके नाम पर बिजली का वैध कनेक्शन हो।
  • आपने सोलर पैनल के लिए पहले कोई और सब्सिडी न ली हो।

किराएदार जिनके पास छत का अधिकार नहीं है, और ऐसे घर जिनकी छत बहुत छोटी या छांव वाली है, उन्हें व्यवहार में दिक्कत आ सकती है। यह योजना सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए है। दुकान, फैक्ट्री या कारोबार के लिए अलग योजनाएं हैं।

पीएम सूर्य घर योजना में रजिस्ट्रेशन कैसे करें? (स्टेप बाय स्टेप)

  1. रजिस्टर करें: pmsuryaghar.gov.in पर जाइए, अपना राज्य और बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) चुनिए, फिर अपना बिजली कंज्यूमर नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल डालिए।
  2. लॉगिन करके आवेदन करें: कंज्यूमर नंबर और मोबाइल नंबर से लॉगिन करके रूफटॉप सोलर का फॉर्म भरिए।
  3. डिस्कॉम की मंजूरी का इंतजार करें: आवेदन मंजूर होने के बाद ही इंस्टॉलेशन शुरू करें।
  4. रजिस्टर्ड वेंडर चुनें: पोर्टल पर रजिस्टर्ड वेंडर और उनकी रेटिंग दिखती है। सोलर सिर्फ इन्हीं से लगवाना है।
  5. सिस्टम लगवाएं: इंस्टॉलेशन के बाद प्लांट की जानकारी पोर्टल पर अपलोड होती है।
  6. नेट मीटर के लिए आवेदन: डिस्कॉम नेट मीटर लगाता है और प्लांट का निरीक्षण करता है।
  7. कमिशनिंग सर्टिफिकेट: डिस्कॉम संतुष्ट होने पर पोर्टल से यह प्रमाणपत्र जारी होता है।
  8. बैंक की जानकारी दें: बैंक खाते का विवरण और कैंसिल चेक अपलोड कीजिए। पोर्टल के अनुसार इसके बाद 30 दिन के भीतर सब्सिडी आपके बैंक खाते में आ जाती है।

मंत्रालय के अनुसार पूरी प्रक्रिया आवेदन से लेकर सब्सिडी तक डिजिटल है, 10 किलोवाट तक के सिस्टम के लिए तकनीकी फिजिबिलिटी जांच की जरूरत नहीं है, और नेट मीटरिंग का एग्रीमेंट आवेदन में ही शामिल है। फिर भी आपके राज्य की डिस्कॉम अपना कोई अलग कदम जोड़ सकती है, इसलिए पोर्टल पर जो स्क्रीन दिखे उसी के हिसाब से चलिए।

जरूरी दस्तावेज़ कौन से हैं?

सरकारी पेज पर आखिरी चरण में सिर्फ बैंक विवरण और कैंसिल चेक का जिक्र है। व्यवहार में डिस्कॉम और ज्यादा कागज मांग सकती है, इसलिए ये चीजें तैयार रखें।

  • हाल का बिजली बिल, जिसमें आपका कंज्यूमर नंबर लिखा हो (रजिस्ट्रेशन में चाहिए)।
  • मोबाइल नंबर और ईमेल, जिन पर OTP और संदेश आएंगे।
  • बैंक खाते की जानकारी और कैंसिल चेक, उसी खाते का जिसमें सब्सिडी चाहिए।
  • मकान या छत के मालिकाना हक का कोई प्रमाण। यह शर्त मैंने जो सरकारी पेज देखे उन पर साफ नहीं लिखी मिली, इसलिए अपनी डिस्कॉम से पूछ लें।

आखिरी दो बातें व्यावहारिक सलाह हैं, सरकारी नियम नहीं। राज्य से स्वतंत्र कोई आधिकारिक दस्तावेज़ सूची मुझे नहीं मिली।

सोलर के लिए लोन कैसे मिलेगा?

मंत्रालय का कहना है कि रूफटॉप सोलर के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों से बिना गारंटी (कोलैटरल-फ्री) लोन मिल सकता है। इसकी ब्याज दर रेपो रेट से 0.5 प्रतिशत ऊपर बताई गई थी, जो उस समय 5.75 प्रतिशत थी, और अवधि 10 साल तक। एक दूसरे सरकारी पेज पर 3 किलोवाट तक के सिस्टम के लिए करीब 7 प्रतिशत ब्याज का जिक्र है। दोनों आंकड़े अलग-अलग समय के हैं और रेपो रेट बदलती रहती है, इसलिए फैसला करने से पहले बैंक से आज की दर पूछिए।

पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

सरकार पूरी यात्रा के लिए कोई एक तय दिन-संख्या नहीं देती। पोर्टल के अनुसार बैंक विवरण देने के बाद सब्सिडी 30 दिन में आनी चाहिए। एक प्राइवेट कंपनी की साइट के अनुमान से फिजिबिलिटी और नेट मीटर के कागजात में दो से चार हफ्ते और इंस्टॉलेशन में एक से तीन दिन लग सकते हैं, पर इसे मोटा अंदाजा ही मानिए। ज्यादातर देरी डिस्कॉम के निरीक्षण और नेट मीटर की उपलब्धता से होती है, जो शहर-शहर में अलग है।

वेंडर कैसे चुनें?

  • सिर्फ राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्ज वेंडर से काम कराइए। दूसरों से लगवाने पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।
  • पोर्टल पर दिखने वाली वेंडर रेटिंग देखिए।
  • लिखित कोटेशन लीजिए, जिसमें पैनल और इन्वर्टर की कंपनी, वारंटी और यह भी लिखा हो कि नेट मीटर मंजूर न हुआ तो क्या होगा।
  • कम से कम तीन कोटेशन की तुलना कीजिए।
  • पूरा पैसा एडवांस मत दीजिए। भुगतान इंस्टॉलेशन और कमिशनिंग के चरणों से जोड़कर किस्तों में कीजिए।
  • पूछिए कि नेट मीटर की फाइल और सब्सिडी का क्लेम कौन संभालेगा। कई वेंडर दोनों काम खुद करते हैं।

हाउसिंग सोसाइटी और RWA के लिए क्या है?

ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को लिफ्ट, लाइट और ईवी चार्जिंग जैसी साझा सुविधाओं के सोलर पर 18,000 रुपये प्रति किलोवाट मिल सकते हैं, कुल 500 किलोवाट तक। सीमा हर घर के लिए 3 किलोवाट के हिसाब से निकलती है और उसमें सोसाइटी के लोगों के अपने रूफटॉप सिस्टम भी गिने जाते हैं।

अब योजना कहां तक पहुंची है? (अक्टूबर 2026)

संसद में मंत्रालय के दिए आंकड़ों के अनुसार 20 मार्च 2026 तक करीब 26.21 लाख रूफटॉप सिस्टम लग चुके थे और कुल क्षमता 9.56 गीगावाट थी। जून 2026 के एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि 40 लाख से ज्यादा घर योजना से जुड़ चुके हैं और दिसंबर 2026 तक 75 लाख से अधिक का अनुमान है। एक समाचार रिपोर्ट में मंत्रालय के हवाले से कहा गया कि 1 करोड़ से ज्यादा घर पोर्टल पर रजिस्टर हो चुके हैं। ये मंत्रालय के बयान हैं जैसे प्रेस में छपे, ताजा गिनती पोर्टल पर देखिए।

राज्य (20 मार्च 2026 तक)इंस्टॉलेशन
गुजरात5.94 लाख
महाराष्ट्र4.90 लाख
उत्तर प्रदेश4.21 लाख
केरल2.09 लाख
राजस्थान1.59 लाख

आगे क्या बदल सकता है?

जितना मैं पुष्टि कर सका, शुरुआत से अब तक केंद्रीय सब्सिडी की दरें नहीं बदली हैं और बदलाव की कोई आधिकारिक सूचना भी नहीं मिली। योजना की अवधि मार्च 2027 में खत्म होती है। इसके बाद विस्तार या नई योजना पर कोई आधिकारिक बयान मुझे नहीं मिला। इसलिए जो लोग सोच रहे हैं, उनके लिए बेहतर है कि ज्यादा इंतजार न करें और पोर्टल तथा MNRE की घोषणाओं पर नजर रखें।

आम गलतियां जो न करें

  • पहले इंस्टॉलेशन करा लेना और रजिस्ट्रेशन बाद में करना। मंजूरी का क्रम महत्वपूर्ण है।
  • गैर-रजिस्टर्ड इंस्टॉलर से काम कराना।
  • रजिस्ट्रेशन में कंज्यूमर नंबर गलत डालना, जिससे आवेदन अटक जाता है।
  • गलत बैंक खाता जोड़ना, जिससे सब्सिडी आने में देर होती है।
  • किसी एजेंट को रजिस्ट्रेशन के नाम पर अलग से पैसे देना। रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर खुद मुफ्त है।

निष्कर्ष

अगर आपका अपना घर है और आप नियमित बिजली बिल भरते हैं, तो पीएम सूर्य घर योजना से रूफटॉप सोलर की शुरुआती लागत 78,000 रुपये तक घट सकती है, और कुछ राज्यों में इससे भी ज्यादा राहत मिलती है। pmsuryaghar.gov.in पर रजिस्टर कीजिए, चरण क्रम से पूरे कीजिए और सब्सिडी आने तक हर रसीद संभालकर रखिए। योजना की अवधि मार्च 2027 तक है, इसलिए फैसला लेने में देर करना ठीक नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सोलर पैनल सब्सिडी कितनी मिलेगी?
पीएम सूर्य घर योजना में 1 किलोवाट पर 30,000, 2 किलोवाट पर 60,000 और 3 किलोवाट या उससे बड़े सिस्टम पर 78,000 रुपये मिलते हैं। 3 किलोवाट के बाद कोई अतिरिक्त सब्सिडी नहीं है।

पीएम सूर्य घर योजना में रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
pmsuryaghar.gov.in पर जाकर राज्य और बिजली कंपनी चुनिए, फिर कंज्यूमर नंबर, मोबाइल और ईमेल से रजिस्टर कीजिए। उसके बाद लॉगिन करके रूफटॉप सोलर का आवेदन भरिए।

पीएम सूर्य घर योजना की आखिरी तारीख क्या है?
योजना वित्त वर्ष 2026-27 यानी मार्च 2027 तक चलने वाली है। इसके बाद क्या होगा, इस पर कोई आधिकारिक घोषणा मुझे नहीं मिली, इसलिए जल्दी आवेदन करना बेहतर है।

क्या सच में 300 यूनिट बिजली फ्री मिलती है?
योजना का वादा है कि सही आकार का सोलर सिस्टम महीने में करीब 300 यूनिट तक बिजली बना सकता है, जिससे बिल बहुत घट जाता है। असल बचत आपके सिस्टम और खपत पर निर्भर करती है।

सब्सिडी का पैसा कब आता है?
पोर्टल के अनुसार कमिशनिंग के बाद बैंक विवरण और कैंसिल चेक जमा करने के 30 दिन के भीतर सब्सिडी आपके खाते में आती है।

सोलर लगवाने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?
बिजली बिल, मोबाइल नंबर, ईमेल, बैंक खाते की जानकारी और कैंसिल चेक जरूरी हैं। डिस्कॉम मकान के मालिकाना हक का प्रमाण भी मांग सकती है, इसलिए पहले पूछ लें।