श्याम पुष्पांजलि (Shyam Puspanjali) खाटू श्याम जी की विनती है, जो “हाथ जोड़ विनती करू” से शुरू होती है। इस पेज पर विनती का पूरा पाठ, पाठ की विधि और FAQ दिए गए हैं।
श्री खाटू श्याम जी विनती (श्याम पुष्पांजलि) – हाथ जोड़ विनती करू एक नज़र में
- पाठ: श्री खाटू श्याम जी विनती (श्याम पुष्पांजलि) – हाथ जोड़ विनती करू
- देवता: बाबा खाटू श्याम जी
- कब पढ़ें: एकादशी, फाल्गुन मेले और सुबह-शाम की पूजा में
श्री खाटू श्याम जी विनती (श्याम पुष्पांजलि) – हाथ जोड़ विनती करू का पाठ (Khatu Shyam Ji Vinati Lyrics)
हाथ जोड़ विनती करू तो सुनियो चित्त लगाये!|Shyam Puspanjali Shri Khatu Shyamji Vinati
हाथ जोड़ विनती करू तो सुनियो चित्त लगाये
दस आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज
धन्य ढूंढारो देश हे खाटू नगर सुजान
अनुपम छवि श्री श्याम की दर्शन से कल्याण
श्याम श्याम तो में रटूं श्याम हैं जीवन प्राण
श्याम भक्त जग में बड़े उनको करू प्रणाम
खाटू नगर के बीच में बण्यो आपको धाम
फाल्गुन शुक्ल मेला भरे जय जय बाबा श्याम
फाल्गुन शुक्ला द्वादशी उत्सव भरी होए
बाबा के दरबार से खाली जाये न कोए
उमा पति लक्ष्मी पति सीता पति श्री राम
लज्जा सब की रखियो खाटू के बाबा श्याम
पान सुपारी इलायची इत्तर सुगंध भरपूर
सब भक्तो की विनती दर्शन देवो हजूर
आलू सिंह तो प्रेम से धरे श्याम को ध्यान
श्याम भक्त पावे सदा श्याम कृपा से मान
जय श्री श्याम बोलो जय श्री श्याम
खाटू वाले बाबा जय श्री श्याम
लीलो घोड़ो लाल लगाम
जिस पर बैठ्यो बाबो श्याम
॥ॐ श्री श्याम देवाय नमः॥
पाठ कैसे करें
सुबह स्नान के बाद साफ़ स्थान पर बाबा खाटू श्याम की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ। फिर श्रद्धा और शांत मन से पाठ करें। नियम और संख्या अपनी परिवार परंपरा या किसी जानकार की सलाह से तय करें।
पाठ के लाभ (मान्यता के अनुसार)
मान्यता है कि श्रद्धा से बाबा श्याम की विनती करने पर मन को शांति मिलती है और उनकी कृपा की आस्था जुड़ी है। यह आस्था पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
श्री खाटू श्याम जी विनती (श्याम पुष्पांजलि) – हाथ जोड़ विनती करू क्या है?
यह खाटू श्याम जी की स्तुति और विनती है, जिसे भक्त पूजा में पढ़ते हैं।
श्री खाटू श्याम जी विनती (श्याम पुष्पांजलि) – हाथ जोड़ विनती करू का पाठ कब करें?
परंपरा में भक्त एकादशी और फाल्गुन मेले के अवसर पर, साथ ही सुबह-शाम की पूजा में इसका पाठ करते हैं।
क्या इसे रोज़ पढ़ सकते हैं?
हाँ, श्रद्धालु इसे रोज़ की पूजा में भी पढ़ते हैं। इसके लिए कोई कठोर नियम नहीं माना जाता।
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नोट: यहाँ बताए गए लाभ और नियम धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।