करवा चौथ की शाम पूजा के साथ कथा सुनने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस व्रत से जुड़ी कई कथाएँ प्रचलित हैं। साहूकार की बेटी की कथा हम पहले अलग लेख में दे चुके हैं। इस लेख में पतिव्रता करवा और द्रौपदी से जुड़ी दो और प्रचलित कथाएँ सरल भाषा में दी गई हैं। ये सभी धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित कथाएँ हैं, जिनके अलग-अलग रूप अलग-अलग इलाक़ों में सुनाए जाते हैं।
पतिव्रता करवा और यमराज की कथा
मान्यता है कि बहुत पहले तुंगभद्रा नदी के किनारे एक गाँव में करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने बूढ़े पति के साथ रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में नहा रहा था, तभी एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़कर उसे गहरे पानी की ओर खींचना शुरू कर दिया। पति ने घबराकर पत्नी को आवाज़ लगाई।
कथा के अनुसार करवा दौड़कर पहुँची और अपने सतीत्व के बल पर कच्चे धागे से मगरमच्छ को बाँध दिया। वह उसे लेकर सीधे यमराज के पास गई और कहा कि इस मगरमच्छ को दंड दीजिए और मेरे पति को दीर्घायु दीजिए। यमराज ने कहा कि मगरमच्छ की आयु अभी शेष है, इसलिए वे उसे नहीं ले जा सकते। तब करवा ने चेतावनी दी कि अगर वे उसकी बात नहीं मानेंगे तो वह शाप दे देगी।
कहा जाता है कि करवा की निष्ठा और साहस से यमराज प्रभावित हुए। उन्होंने मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया और करवा के पति को लंबी आयु का वरदान दिया। मान्यता है कि तभी से कार्तिक कृष्ण चतुर्थी का यह व्रत करवा के नाम पर ‘करवा चौथ’ कहलाने लगा।
द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा
एक प्रचलित कथा के अनुसार जब अर्जुन तपस्या के लिए नीलगिरि पर्वत पर गए, तो द्रौपदी को चिंता हुई कि वहाँ उन्हें कोई बाधा न आ जाए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने उन्हें करवा चौथ का व्रत रखने की सलाह दी और बताया कि यह व्रत गृहस्थ जीवन की छोटी-बड़ी परेशानियाँ दूर करने वाला माना गया है।
इसी प्रसंग में श्रीकृष्ण ने एक और कथा सुनाई, जिसमें एक स्त्री भूख-प्यास से बेहाल होकर चाँद निकलने से पहले ही व्रत तोड़ बैठती है, और बाद में नियम से व्रत रखकर अपने पति का जीवन लौटा पाती है। कथा का संदेश यही बताया जाता है कि व्रत पूरे नियम और श्रद्धा से किया जाए। लोक मान्यता है कि द्रौपदी के व्रत रखने के बाद पांडवों को सफलता मिली।
कथाओं से क्या संदेश मिलता है
इन कथाओं में एक बात समान है: पति-पत्नी के रिश्ते में निष्ठा, धैर्य और एक-दूसरे के प्रति समर्पण। आज के समय में बहुत से परिवार इस व्रत को आपसी प्रेम और साथ का उत्सव मानकर मनाते हैं, और कई पति भी पत्नी के साथ उपवास रखते हैं। व्रत रखना या न रखना हर परिवार का अपना निर्णय है। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत हो तो निर्जला उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
कथा कब और कैसे सुनी जाती है
परंपरा में शाम की पूजा के समय करवा माता, गणेश जी और शिव-पार्वती का स्मरण करके कथा सुनी जाती है। इसके बाद चाँद निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। इस साल करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर को है। अपने शहर में चाँद निकलने का समय इस लेख में शहर के अनुसार देख सकते हैं, और पूजा की पूरी जानकारी मुख्य लेख में है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
करवा चौथ की कितनी कथाएँ प्रचलित हैं?
कई। साहूकार की बेटी (वीरावती), पतिव्रता करवा और द्रौपदी से जुड़ी कथाएँ सबसे ज़्यादा सुनाई जाती हैं।
व्रत का नाम करवा चौथ क्यों पड़ा?
‘करवा’ का अर्थ मिट्टी का छोटा घड़ा है और ‘चौथ’ का अर्थ चतुर्थी। एक मान्यता के अनुसार पतिव्रता करवा की कथा से भी इस नाम का संबंध जोड़ा जाता है।
क्या ये कथाएँ ऐतिहासिक हैं?
ये धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित कथाएँ हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती रही हैं।



