माँ दुर्गा (Durga Chalisa)

Durga Chalisa PDF Download in Hindi | श्री दुर्गा चालीसा Lyrics

श्री दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) आदिशक्ति माँ दुर्गा की स्तुति में पढ़ा जाने वाला भक्ति पाठ है। नवरात्रि में इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है। इस पेज पर पूरा पाठ दोहा और चौपाई सहित, पाठ की विधि और FAQ दिए गए हैं।

श्री दुर्गा चालीसा एक नज़र में

  • चालीसा: श्री दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)
  • देवता: माँ दुर्गा, आदिशक्ति
  • स्वरूप: दोहा और चौपाई, हिंदी में
  • कब पढ़ें: सुबह की पूजा में, नवरात्रि में विशेष रूप से

श्री दुर्गा चालीसा (दोहा और चौपाई)

Durga Chalisa in Hindi: माँ दुर्गा को सृष्टि की जननी माना जाता है और हम सब उनकी संतान हैं. आदिशक्ति माँ जगदम्बा की उपासना से हमारे सभी पाप कट जाते हैं. यूं तो हम साल में दो बार इनकी आराधना धूमधाम से करते हैं. चैत्र और आश्विन में नवरात्र के अवसर पर इनकी पूजा समूचे देश-दुनिया में की जाती है. लेकिन इनके चालीसा का पाठ कर इनकी आराधना सालभर की जा सकती है. इससे न केवल आपको आत्मिक शांति मिलती है बल्कि माँ दुर्गा का आशीर्वाद भी बना रहता है.

ॐ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

॥ श्री दुर्गा चालीसा ॥

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो अंबे दुःख हरनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुँलोक में डंका बाजत॥

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।
रक्तन बीज शंखन संहारे॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥

आभा पुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

शंकर आचारज तप कीनो।
काम क्रोध जीति सब लीनो॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपु मुरख मोही डरपावे॥

शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।

जब लगि जियऊं दया फल पाऊं।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥

श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥

देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

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Durga Chalisa PDF Download in Hindi: दुर्गा चालीसा PDF कैसे पाएँ

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दुर्गा चालीसा पाठ की विधि

सुबह स्नान के बाद साफ़ स्थान पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ। फिर श्रद्धा और शांत मन से चालीसा का पाठ करें। पाठ के अंत में आरती करने की परंपरा है। नियम और संख्या अपनी परिवार परंपरा या किसी जानकार की सलाह से तय करें।

चालीसा पाठ के लाभ (मान्यता के अनुसार)

मान्यता है कि श्रद्धा से दुर्गा चालीसा का पाठ करने पर माँ दुर्गा की कृपा मिलती है और मन को शक्ति तथा शांति मिलती है। ये लाभ आस्था पर आधारित हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

दुर्गा चालीसा क्या है?

यह माँ दुर्गा की स्तुति में लिखी गई चालीस चौपाइयों के आसपास की भक्ति रचना है, जिसे श्रद्धालु पूजा में पढ़ते हैं।

दुर्गा चालीसा का पाठ कब करें?

आमतौर पर सुबह की पूजा में और नवरात्रि के नौ दिनों में। कोई एक निश्चित समय अनिवार्य नहीं माना जाता।

क्या दुर्गा चालीसा रोज़ पढ़ सकते हैं?

हाँ, श्रद्धालु इसे रोज़ की पूजा में भी पढ़ते हैं। इसके लिए कोई कठोर नियम नहीं माना जाता।

यह भी पढ़ें: माँ दुर्गा के 32 नाम | दुर्गा माँ के 108 नाम | माँ दुर्गा की आरती

नोट: यहाँ बताए गए लाभ और नियम धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।

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नवरात्रि में दुर्गा चालीसा का पाठ क्यों किया जाता है?

मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा की आराधना के होते हैं, इसलिए कई भक्त इन दिनों सुबह या शाम की पूजा में दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं। यह आस्था और परंपरा का विषय है।