श्री विश्वकर्मा जी की आरती (Vishwakarma Aarti Lyrics)
श्री विश्वकर्मा जी की आरती (Vishwakarma Aarti) सृष्टि के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की स्तुति है। विश्वकर्मा पूजा के दिन और कारखानों, दुकानों तथा औज़ारों की पूजा के समय इसे गाने की परंपरा है। आरती के पूरे बोल नीचे दिए गए हैं।
विश्वकर्मा आरती एक नज़र में
- आरती: ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
- देवता: भगवान विश्वकर्मा, शिल्प और निर्माण के देवता
- कब गाएँ: विश्वकर्मा पूजा और औज़ारों की पूजा के समय
श्री विश्वकर्मा जी की आरती के बोल (Vishwakarma Aarti Lyrics)
ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥
जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥
श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥
आरती कैसे करें
पूजा स्थान पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र रखकर दीपक और धूप जलाएँ। औज़ार और मशीनें साफ़ करके पूजा में रखी जाती हैं। इसके बाद आरती गाकर प्रसाद बाँटा जाता है। विधि अपनी परंपरा के अनुसार अपनाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
विश्वकर्मा आरती कब गाई जाती है?
विश्वकर्मा पूजा के दिन और औज़ारों या मशीनों की पूजा के समय।
आरती में कौन-सी पंक्ति से शुरुआत होती है?
आरती की शुरुआत “ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा” पंक्ति से होती है।
विश्वकर्मा जी के और पाठ कहाँ पढ़ें?
आप विश्वकर्मा अष्टकम पेज भी देख सकते हैं।
नोट: धार्मिक मान्यताएँ आस्था पर आधारित हैं।