श्री राम आरती आरती कीजै श्री रघुवर जी की का हिंदी बैनर

Shri Ram Aarti Lyrics in Hindi | आरती कीजै श्री रघुवर जी की

श्री राम आरती क्या है

“आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनंद शिव सुंदर की” मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की आरती है। रामनवमी, दीपावली, सुंदरकांड और रामायण-पाठ के बाद यह आरती गाने की परंपरा है। इसमें राम को सिर्फ़ अयोध्या के राजकुमार के रूप में नहीं, बल्कि सत्, चित् और आनंद के स्वरूप के रूप में याद किया गया है, यानी वही परम सत्य जो निर्गुण भी है और सगुण भी।

यह आरती चार पदों की छोटी रचना है, पर इसमें राम के कई नाम और गुण समाए हैं: दशरथ-नंदन, कौशल्या-लाल, भक्तों के हृदय के चंदन, शरणागत-वत्सल और वानरों के सखा। इस पेज पर पूरी आरती, उसका अर्थ, गाने की विधि, मान्यताएँ और आम सवाल दिए गए हैं। अगर आप राम की स्तुति का अलग पाठ पढ़ना चाहें तो हमारी श्री राम स्तुति (श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन) और श्री राम चालीसा भी देखें।

आरती कीजै श्री रघुवर जी की: पूरे बोल

आरती का प्रचलित पाठ नीचे दिया गया है। हर पद के बाद पहली पंक्ति दोहराई जाती है।

आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
सत् चित् आनन्द शिव सुन्दर की।

दशरथ तनय कौशल्या नन्दन,
सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन।
अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन,
मर्यादा पुरुषोत्तम वर की।
आरती कीजै श्री रघुवर जी की…॥

निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि,
सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि।
हरण शोक-भय दायक नव निधि,
माया रहित दिव्य नर वर की।
आरती कीजै श्री रघुवर जी की…॥

जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
अखिल लोक पालक त्रिलोक गति।
विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति,
एक मात्र गति सचराचर की।
आरती कीजै श्री रघुवर जी की…॥

शरणागत वत्सल व्रतधारी,
भक्त कल्प तरुवर असुरारी।
नाम लेत जग पावनकारी,
वानर सखा दीन दुख हर की।
आरती कीजै श्री रघुवर जी की…॥

नोट: अलग-अलग स्रोतों में एकाध शब्द थोड़ा भिन्न मिलता है, जैसे “दशरथ तनय” की जगह “दशरथ तनया”, “नाम लेत” की जगह “नाम लेता” या “दुख हर की” की जगह “दुख हरा की”। भाव समान है। यह आरती “श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन” स्तुति से अलग है, जिसे तुलसीदास जी की रचना के रूप में जाना जाता है।

आरती का सरल अर्थ

टेक: श्री रघुवर की आरती कीजिए, जो सत्, चित् और आनंद के स्वरूप हैं और शिव यानी कल्याणकारी तथा सुंदर हैं।

पहला पद: दशरथ के पुत्र और कौशल्या के आनंद राम देवताओं और मुनियों की रक्षा करने वाले तथा दैत्यों का नाश करने वाले हैं। वे अपने भक्तों के हृदय को चंदन की तरह शीतल करते हैं और पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।

दूसरा पद: राम निर्गुण भी हैं और सगुण भी। वे रूप-गुणों के भंडार हैं, सारे लोक उनकी वंदना अलग-अलग विधि से करते हैं। वे शोक और भय को हरते हैं, नौ निधियाँ देने वाले हैं और माया से परे दिव्य नर-श्रेष्ठ हैं।

तीसरा पद: वे जानकी जी के पति, देवताओं के अधिपति और जगत के स्वामी हैं। समस्त लोकों का पालन करने वाले, तीनों लोकों का सहारा और चर-अचर सबकी एकमात्र गति राम ही हैं।

चौथा पद: शरण में आने वालों से प्रेम करने वाले, व्रत का पालन करने वाले, भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान और असुरों का अंत करने वाले राम का नाम लेने से ही संसार पवित्र हो जाता है। वे वानरों के मित्र और दीन-दुखियों के कष्ट हरने वाले हैं।

श्री राम आरती कब और कैसे करें

रामनवमी इसका सबसे बड़ा अवसर है। इसके अलावा दीपावली की संध्या, विजयादशमी, रामायण या सुंदरकांड पाठ का समापन, मंगलवार और शनिवार की हनुमान-पूजा के बाद भी राम आरती गाने की परंपरा है। कई घरों में रोज़ की शाम की पूजा में भी इसे गाया जाता है।

  • राम दरबार या श्रीराम के चित्र के सामने साफ़ स्थान पर बैठें।
  • तुलसी-दल, पीले या सफ़ेद फूल और चंदन अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाएँ और “श्री राम जय राम जय जय राम” का थोड़ी देर जप करें।
  • थाली घुमाते हुए आरती गाएँ और अंत में सबको प्रसाद दें।

आरती गाने के लाभ (मान्यता)

मान्यता है कि राम नाम और राम आरती का नित्य गान मन को स्थिर करता है, भय को कम करता है और मर्यादा तथा धैर्य के गुण जगाता है। श्रद्धालु इसे परिवार में सद्भाव, संकट के समय सहारे और मनोकामना-पूर्ति से जोड़कर देखते हैं। ये लाभ आस्था पर आधारित हैं। राम के आदर्श, यानी वचन-पालन, सेवा और संयम, आरती के बहाने रोज़ याद आते हैं, यही इसका सबसे सहज लाभ है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

“सत चित आनंद” का क्या अर्थ है?

सत् का अर्थ सत्य या अस्तित्व, चित् का अर्थ चेतना और आनंद का अर्थ परम सुख। भारतीय दर्शन में परम तत्व को इन्हीं तीन रूपों में समझाया गया है, और आरती राम को इसी स्वरूप में प्रणाम करती है।

मर्यादा पुरुषोत्तम किसे कहते हैं?

जो मर्यादा यानी नियम और कर्तव्य का आदर्श रूप में पालन करे, उसे मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। राम को यही उपाधि दी जाती है।

राम आरती और “श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन” में क्या फ़र्क है?

“कृपालु भजमन” एक स्तुति है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास की रचना माना जाता है, जबकि “आरती कीजै श्री रघुवर जी की” पूजा के अंत में दीप घुमाते हुए गाई जाने वाली आरती है।

क्या हनुमान जी की पूजा के बाद राम आरती गाई जा सकती है?

हाँ, परंपरा में राम और हनुमान की पूजा साथ-साथ की जाती है, इसलिए कई लोग हनुमान चालीसा के बाद राम आरती भी गाते हैं।

रामनवमी पर आरती का सही समय क्या है?

परंपरा में राम जन्म का समय दोपहर माना जाता है, इसलिए कई मंदिरों में दोपहर में जन्मोत्सव की आरती होती है। सटीक मुहूर्त के लिए उस वर्ष का पंचांग देखें।

और पढ़ें: हनुमान चालीसा और शिव चालीसा।