श्री खाटू श्याम जी की आरती (Khatu Shyam Ji Aarti) बाबा खाटू श्याम के भक्त पूजा के समय गाते हैं। राजस्थान के खाटू गाँव में उनका प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है। आरती के पूरे बोल नीचे दिए गए हैं।
श्री खाटू श्याम जी की आरती एक नज़र में
- आरती: श्री खाटू श्याम जी की आरती
- देवता: बाबा खाटू श्याम जी
- कब करें: सुबह-शाम की पूजा में, एकादशी और फाल्गुन मेले के समय
श्री खाटू श्याम जी की आरती के बोल (Khatu Shyam Ji Aarti Lyrics)
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
रतन जड़ित सिंहासन,
सिर पर चंवर ढुरे ।
तन केसरिया बागो,
कुण्डल श्रवण पड़े ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
गल पुष्पों की माला,
सिर पार मुकुट धरे ।
खेवत धूप अग्नि पर,
दीपक ज्योति जले ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
मोदक खीर चूरमा,
सुवरण थाल भरे ।
सेवक भोग लगावत,
सेवा नित्य करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
झांझ कटोरा और घडियावल,
शंख मृदंग घुरे ।
भक्त आरती गावे,
जय-जयकार करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
जो ध्यावे फल पावे,
सब दुःख से उबरे ।
सेवक जन निज मुख से,
श्री श्याम-श्याम उचरे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
श्री श्याम बिहारी जी की आरती,
जो कोई नर गावे ।
कहत भक्त-जन,
मनवांछित फल पावे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
जय श्री श्याम हरे,
बाबा जी श्री श्याम हरे ।
निज भक्तों के तुमने,
पूरण काज करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
आरती कैसे करें
पूजा स्थान पर बाबा खाटू श्याम जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाएँ। फिर थाली में दीपक रखकर घंटी बजाते हुए आरती गाएँ और अंत में प्रसाद बाँटें। विधि अपनी परिवार परंपरा के अनुसार अपनाएँ।
आरती का महत्व (मान्यता के अनुसार)
परंपरा में पूजा का समापन आरती से किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा से आरती करने पर बाबा खाटू श्याम जी की कृपा मिलती है और घर में सुख-शांति रहती है। यह आस्था पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
श्री खाटू श्याम जी की आरती कब करनी चाहिए?
आमतौर पर सुबह-शाम की पूजा में। श्रद्धालु एकादशी और फाल्गुन मेले के समय भी विशेष रूप से आरती करते हैं।
Khatu Shyam Ji Aarti के बोल कहाँ पढ़ें?
पूरे बोल इसी पेज पर ऊपर दिए गए हैं।
आरती में क्या-क्या सामग्री चाहिए?
आमतौर पर दीपक, घी या तेल, धूप, फूल और प्रसाद की ज़रूरत होती है। सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार बदल सकती है।
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नोट: यहाँ बताए गए लाभ और नियम धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं।