परम वीर चक्र (Param Vir Chakra) भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह उन सैनिकों को दिया जाता है जिन्होंने दुश्मन के सामने असाधारण साहस, पराक्रम और आत्म-बलिदान दिखाया हो। आज़ादी के बाद से अब तक यह सम्मान सिर्फ 21 वीरों को मिला है। इस लेख में आसान हिंदी में जानिए: परम वीर चक्र क्या है, इसकी शुरुआत कैसे हुई, param vir chakra winners list, किसे मिलता है, इसकी सुविधाएं, और param vir chakra vs ashok chakra का फर्क।
परम वीर चक्र क्या है?
Param Vir Chakra award युद्ध के मैदान में दिखाई गई सबसे बड़ी बहादुरी के लिए दिया जाता है। “परम वीर” का मतलब है सबसे बड़ा वीर, और “चक्र” यहां पदक का प्रतीक है। इसे पाने वाले के नाम के आगे “PVC” लिखा जाता है। यह सम्मान थल सेना, नौसेना और वायुसेना, तीनों के जवानों और अधिकारियों को दिया जा सकता है।
परम वीर चक्र की शुरुआत और डिज़ाइन
कब शुरू हुआ
इस सम्मान की स्थापना 26 जनवरी 1950 को, गणतंत्र दिवस के दिन, राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की थी। इसे 15 अगस्त 1947 से लागू माना गया, ताकि आज़ादी के तुरंत बाद के युद्ध के वीरों को भी यह मिल सके। इसीलिए पहला परम वीर चक्र 1947 की कार्रवाई के लिए मेजर सोमनाथ शर्मा को मिला।
पदक का स्वरूप
यह कांसे का गोल पदक है, जिसका व्यास लगभग 35 मिलीमीटर है। सामने के हिस्से में राष्ट्रीय चिह्न है और उसके चारों ओर इंद्र के वज्र की चार प्रतिकृतियां हैं। पीछे हिंदी और अंग्रेज़ी में “परम वीर चक्र” लिखा है, और बीच में दो कमल के फूल हैं। पदक बैंगनी रंग के रिबन से लगाया जाता है। इसका डिज़ाइन सावित्री खानोलकर ने तैयार किया था। ऋषि दधीचि की अस्थियों से बने वज्र की कथा इसके प्रतीक में झलकती है, यानी सर्वोच्च त्याग।
परम वीर चक्र किसे मिलता है?
- भारतीय सशस्त्र बलों के किसी भी रैंक के सैनिक या अधिकारी को, जो दुश्मन के सामने सर्वोच्च बहादुरी दिखाए।
- सम्मान की सिफारिश सेना की कमान से होती है, जांच के बाद रक्षा मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजी जाती है और मंजूरी राष्ट्रपति देते हैं।
- यह मरणोपरांत भी दिया जाता है। अब तक के 21 विजेताओं में 14 को यह मरणोपरांत मिला।
- विजेताओं में 20 थल सेना से और 1 वायुसेना से हैं।
परम वीर चक्र विजेताओं की पूरी लिस्ट (Param Vir Chakra Winners List)
नीचे सभी 21 परम वीर चक्र विजेताओं की सूची है। तालिका में साल उस कार्रवाई का है जिसके लिए सम्मान मिला। रैंक वही है जो उस समय की कार्रवाई में थी।
| क्रम | नाम | रैंक और यूनिट | साल | युद्ध / ऑपरेशन |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सोमनाथ शर्मा (Somnath Sharma) | मेजर, कुमाऊं रेजिमेंट | 1947 | बडगाम की लड़ाई (मरणोपरांत) |
| 2 | जदुनाथ सिंह (Jadunath Singh) | नायक, राजपूत रेजिमेंट | 1948 | भारत-पाक युद्ध 1947-48 (मरणोपरांत) |
| 3 | रामा राघोबा राणे (Rama Raghoba Rane) | सेकंड लेफ्टिनेंट, बॉम्बे सैपर्स | 1948 | भारत-पाक युद्ध 1947-48 |
| 4 | पीरू सिंह (Piru Singh) | कंपनी हवलदार मेजर, राजपूताना राइफल्स | 1948 | भारत-पाक युद्ध 1947-48 (मरणोपरांत) |
| 5 | करम सिंह (Karam Singh) | लांस नायक, सिख रेजिमेंट | 1948 | भारत-पाक युद्ध 1947-48 |
| 6 | गुरबचन सिंह सलारिया (Gurbachan Singh Salaria) | कैप्टन, 1 गोरखा राइफल्स | 1961 | कांगो संकट (मरणोपरांत) |
| 7 | धन सिंह थापा (Dhan Singh Thapa) | मेजर, 8 गोरखा राइफल्स | 1962 | भारत-चीन युद्ध |
| 8 | जोगिंदर सिंह (Joginder Singh) | सूबेदार, सिख रेजिमेंट | 1962 | भारत-चीन युद्ध (मरणोपरांत) |
| 9 | शैतान सिंह (Shaitan Singh) | मेजर, कुमाऊं रेजिमेंट | 1962 | भारत-चीन युद्ध (मरणोपरांत) |
| 10 | अब्दुल हमीद (Abdul Hamid) | कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार, ग्रेनेडियर्स | 1965 | असल उत्तर की लड़ाई (मरणोपरांत) |
| 11 | अर्देशिर तारापोर (Ardeshir Tarapore) | लेफ्टिनेंट कर्नल, पूना हॉर्स | 1965 | चविंडा की लड़ाई (मरणोपरांत) |
| 12 | अल्बर्ट एक्का (Albert Ekka) | लांस नायक, ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स | 1971 | हिली की लड़ाई (मरणोपरांत) |
| 13 | निर्मलजीत सिंह सेखों (Nirmal Jit Singh Sekhon) | फ्लाइंग ऑफिसर, भारतीय वायुसेना (18 स्क्वाड्रन) | 1971 | भारत-पाक युद्ध 1971 (मरणोपरांत) |
| 14 | अरुण खेतरपाल (Arun Khetarpal) | सेकंड लेफ्टिनेंट, पूना हॉर्स | 1971 | बसंतर की लड़ाई (मरणोपरांत) |
| 15 | होशियार सिंह दहिया (Hoshiar Singh Dahiya) | मेजर, ग्रेनेडियर्स | 1971 | बसंतर की लड़ाई |
| 16 | बाना सिंह (Bana Singh) | नायब सूबेदार, J&K लाइट इन्फैंट्री | 1987 | ऑपरेशन राजीव |
| 17 | रामास्वामी परमेश्वरन (Ramaswamy Parameshwaran) | मेजर, महार रेजिमेंट | 1987 | ऑपरेशन पवन (मरणोपरांत) |
| 18 | मनोज कुमार पांडेय (Manoj Kumar Pandey) | लेफ्टिनेंट, 11 गोरखा राइफल्स | 1999 | ऑपरेशन विजय (मरणोपरांत) |
| 19 | योगेंद्र सिंह यादव (Yogendra Singh Yadav) | ग्रेनेडियर, ग्रेनेडियर्स | 1999 | ऑपरेशन विजय |
| 20 | संजय कुमार (Sanjay Kumar) | राइफलमैन, J&K राइफल्स | 1999 | ऑपरेशन विजय |
| 21 | विक्रम बत्रा (Vikram Batra) | कैप्टन, J&K राइफल्स | 1999 | ऑपरेशन विजय (मरणोपरांत) |
युद्ध के हिसाब से एक नज़र
- 1947-48 (कश्मीर): 5 विजेता, सोमनाथ शर्मा, जदुनाथ सिंह, रामा राघोबा राणे, पीरू सिंह और करम सिंह।
- कांगो (संयुक्त राष्ट्र मिशन, 1961): कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया।
- 1962 भारत-चीन युद्ध: धन सिंह थापा, जोगिंदर सिंह और शैतान सिंह।
- 1965: अब्दुल हमीद और अर्देशिर तारापोर।
- 1971: अल्बर्ट एक्का, निर्मलजीत सिंह सेखों, अरुण खेतरपाल और होशियार सिंह दहिया।
- 1987 (श्रीलंका और सियाचिन): बाना सिंह और रामास्वामी परमेश्वरन।
- 1999 कारगिल: मनोज कुमार पांडेय, योगेंद्र सिंह यादव, संजय कुमार और विक्रम बत्रा।
कुछ विजेताओं की संक्षिप्त कहानी
मेजर सोमनाथ शर्मा
पहले परम वीर चक्र विजेता। कश्मीर में बडगाम के पास उन्होंने अपनी टुकड़ी के साथ दुश्मन की भारी संख्या को रोके रखा, जिससे श्रीनगर हवाई अड्डे की रक्षा संभव हुई।
कैप्टन विक्रम बत्रा
कारगिल (ऑपरेशन विजय) में अपने साहस और “ये दिल मांगे मोर” के उद्घोष के लिए याद किए जाते हैं। उन्हें मरणोपरांत सम्मान मिला।
ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव
कारगिल में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद लड़ते रहे। इस सम्मान के सबसे कम उम्र के जीवित विजेताओं में गिने जाते हैं।
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया
यह सम्मान युद्ध के अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में दिखाई गई बहादुरी के लिए भी मिल सकता है, इसका उदाहरण कांगो में उनकी कार्रवाई है।
परम वीर चक्र विजेताओं को मिलने वाली सुविधाएं
सुविधाएं समय-समय पर सरकार के नियमों और राज्य सरकारों की नीतियों के हिसाब से बदलती रहती हैं, इसलिए ताज़ा रकम के लिए रक्षा मंत्रालय या संबंधित राज्य सरकार की अधिसूचना देखना बेहतर है। सामान्य रूप से मिलने वाले लाभ ये हैं:
- सम्मान के साथ मासिक भत्ता, जो नियमित वेतन के साथ मिलता है।
- सम्मान की राशि और संबंधित पेंशन पर आयकर में छूट।
- पात्र विजेताओं के लिए विशेष पेंशन, जो उनके बाद जीवनसाथी को भी मिलती है।
- कई राज्य सरकारें अपने निवासी विजेताओं को नकद पुरस्कार देती हैं, जिसकी राशि राज्य के अनुसार अलग-अलग है।
- गणतंत्र दिवस परेड जैसे राष्ट्रीय समारोहों में विशेष सम्मान।
- अंडमान और निकोबार के 21 द्वीपों के नाम परम वीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे गए हैं, जो राष्ट्र की ओर से उनका स्मरण है।
Param Vir Chakra vs Ashok Chakra vs Maha Vir Chakra
लोग अक्सर इन सम्मानों में उलझ जाते हैं। मोटे तौर पर फर्क यह है:
| बिंदु | परम वीर चक्र | महावीर चक्र | अशोक चक्र |
|---|---|---|---|
| किस श्रेणी का | युद्धकालीन वीरता, सर्वोच्च | युद्धकालीन वीरता, दूसरा सर्वोच्च | शांतिकाल की वीरता, सर्वोच्च |
| कब दिया जाता है | दुश्मन के सामने असाधारण पराक्रम | दुश्मन के सामने अदम्य साहस | दुश्मन से सीधे युद्ध के बाहर की बहादुरी, जैसे आतंकवाद-रोधी या बचाव अभियान |
| किसे मिल सकता है | सशस्त्र बलों के सदस्य | सशस्त्र बलों के सदस्य | सैनिकों के साथ आम नागरिक भी |
यानी param vir chakra vs ashok chakra में मुख्य अंतर संदर्भ का है: परम वीर चक्र युद्ध में दुश्मन के सामने दिखाई गई वीरता के लिए है, जबकि अशोक चक्र शांतिकाल की वीरता के लिए। वीरता के क्रम में युद्धकालीन सम्मान हैं परम वीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र, और शांतिकालीन हैं अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र।
सेना में जाने का सपना देखने वालों के लिए
अगर आप इन वीरों से प्रेरित होकर वर्दी पहनना चाहते हैं, तो अग्निवीर योजना की योग्यता, सैलरी और भविष्य और सेना भर्ती के शारीरिक व मेडिकल मानक पढ़कर अपनी तैयारी की दिशा तय कर सकते हैं।
परम वीर चक्र का महत्व
यह सम्मान सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च त्याग की याद है। स्कूलों की किताबों से लेकर सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों तक, इन वीरों की कहानियां नई पीढ़ी को कर्तव्य, अनुशासन और देशभक्ति का पाठ पढ़ाती हैं। कई जवानों ने अपना जीवन देकर साथियों और देश की रक्षा की, और उनके नाम पर आज भी सड़कें, संस्थान और स्मारक हैं। उनके बारे में पढ़ना और बच्चों को बताना उनके प्रति हमारी छोटी-सी श्रद्धांजलि है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
परम वीर चक्र अब तक कितने लोगों को मिला है?
अब तक कुल 21 वीरों को परम वीर चक्र मिला है, जिनमें 14 को मरणोपरांत। इनमें 20 थल सेना से और 1 वायुसेना से हैं।
परम वीर चक्र पाने वाले पहले व्यक्ति कौन थे?
मेजर सोमनाथ शर्मा (कुमाऊं रेजिमेंट) को 1947 में बडगाम की लड़ाई के लिए, मरणोपरांत, पहला परम वीर चक्र मिला।
परम वीर चक्र और अशोक चक्र में क्या अंतर है?
परम वीर चक्र युद्ध में दुश्मन के सामने सर्वोच्च वीरता के लिए है, जबकि अशोक चक्र शांतिकाल की सर्वोच्च वीरता के लिए है और आम नागरिकों को भी मिल सकता है।
क्या परम वीर चक्र आम नागरिक को मिल सकता है?
नहीं, यह सशस्त्र बलों के सदस्यों के लिए है। नागरिकों को शांतिकाल की वीरता के लिए अशोक चक्र जैसे सम्मान दिए जा सकते हैं।
परम वीर चक्र विजेताओं को क्या सुविधाएं मिलती हैं?
मासिक भत्ता, आयकर में छूट, पात्र विजेताओं को विशेष पेंशन जो जीवनसाथी को भी मिलती है, और कई राज्यों में नकद पुरस्कार। सटीक राशि समय और राज्य के अनुसार बदलती है।
अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। सुविधाओं, भत्तों और नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकता है। आधिकारिक और ताज़ा जानकारी के लिए भारतीय सेना, रक्षा मंत्रालय या PIB की वेबसाइट देखें।


