ज्ञानेश कुमार का नाम हाल के दिनों में खबरों में बार-बार आ रहा है। कई लोग जानना चाहते हैं कि वे कौन हैं, उनका करियर कैसा रहा और मौजूदा विवाद में असल में क्या कहा जा रहा है।
यह लेख पूरी तरह तटस्थ रखा गया है। जो आरोप, मांगें या बयान दिए गए हैं, उन्हें सिर्फ संबंधित पक्ष या समाचार संस्थान के नाम के साथ लिखा गया है। इन्हें अदालत या किसी जांच का निष्कर्ष न समझें।
ज्ञानेश कुमार कौन हैं?
ब्रूट इंडिया की 5 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार ज्ञानेश कुमार पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। वे 1988 बैच के केरल कैडर के अधिकारी रहे हैं।
विकिपीडिया के अनुसार उनका जन्म 27 जनवरी 1964 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ।
शिक्षा
ब्रूट इंडिया के अनुसार उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके अलावा उन्होंने बिज़नेस फाइनेंस और पर्यावरण अर्थशास्त्र की पढ़ाई भी की। विकिपीडिया, जिसने इंडियन एक्सप्रेस की फरवरी 2025 की रिपोर्ट का हवाला दिया है, इन्हें इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जोड़ता है।
प्रशासनिक करियर
ब्रूट इंडिया ने चुनाव आयोग की प्रोफाइल के हवाले से बताया कि ज्ञानेश कुमार ने संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में सचिव के रूप में काम किया। उन्होंने रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय में भी सेवाएं दीं।
केरल में वे लोक निर्माण और वित्त जैसे विभागों में रहे और एर्नाकुलम के जिला कलेक्टर भी रहे। विकिपीडिया के अनुसार वे 1 मई 2021 से 2 मई 2022 तक संसदीय कार्य सचिव और 3 मई 2022 से 31 जनवरी 2024 तक सहकारिता सचिव रहे।
चुनाव आयुक्त से मुख्य चुनाव आयुक्त तक
ब्रूट इंडिया के अनुसार ज्ञानेश कुमार ने 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त का पद संभाला। फिर 19 फरवरी 2025 को वे राजीव कुमार के उत्तराधिकारी के रूप में मुख्य चुनाव आयुक्त बने।
विकिपीडिया के अनुसार वे मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम 2023 के तहत नियुक्त होने वाले पहले मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग के अध्यक्ष होते हैं और आयोग में दो अन्य चुनाव आयुक्त भी होते हैं।
SIR विवाद में क्या कहा जा रहा है?
ब्रूट इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों और युवाओं के संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। चुनाव आयोग ने राजनीतिक छेड़छाड़ के आरोप खारिज किए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के हवाले से ब्रूट इंडिया और खलीज टाइम्स (एएनआई) ने लिखा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची, पंजीकरण प्रक्रिया और आयोग की डिजिटल प्रणालियों पर आपत्तियां दर्ज कीं। आयोग ने कहा कि मसौदा चरण में उठे परिचालन सवाल और सुझाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं, और SIR के कार्यक्रम से जुड़े फैसले सर्वसम्मत थे।
ब्रूट इंडिया के अनुसार आयोग ने 26 सितंबर को अपने वोटर-रोल सॉफ्टवेयर की समीक्षा की घोषणा की। इसके लिए एक समिति बनेगी जिसमें एक स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ भी होगा।
प्रदर्शन, मांगें और सुप्रीम कोर्ट
खलीज टाइम्स (एएनआई, 5 अक्टूबर 2026) के अनुसार दिल्ली में पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे दर्जनों युवा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। रिपोर्ट के अनुसार सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े जमावड़े का आह्वान किया था। 10 अक्टूबर को असल में क्या हुआ, इसकी पुष्टि हम अपने स्रोतों से नहीं कर पाए।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां की मतदाताओं के मताधिकार से जुड़ी टिप्पणी का हवाला देते हुए इस्तीफे की मांग की। ये राजनीतिक मांगें हैं, अदालती निष्कर्ष नहीं।
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी पहुंची। एएनआई के अनुसार 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार किया और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। पीठ ने संकेत दिया कि जवाब देखने के बाद अगर कुछ फैसले आवश्यक सर्वसम्मति के बिना लिए पाए गए, तो उन पर दोबारा विचार हो सकता है। अदालत ने अभी यह नहीं कहा है कि उन्होंने कुछ गलत किया।
पूर्व न्यायाधीशों का खुला पत्र
ओडिशाबाइट्स की 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 42 पूर्व न्यायाधीशों ने खुला पत्र जारी कर चुनाव आयोग का बचाव किया और SIR को कानूनी प्रक्रिया बताया। पत्र में लिखा गया कि वे किसी राजनीतिक पक्ष से नहीं जुड़े हैं और बिना सबूत लगाए गए आरोपों पर चिंता है। यह उन पूर्व न्यायाधीशों का पक्ष है। विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का पक्ष अलग है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष से कहा कि वे प्रदर्शन के बजाय सही माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त से बातचीत करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ज्ञानेश कुमार कौन हैं?
वे भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त और केरल कैडर के 1988 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं।
ज्ञानेश कुमार कब मुख्य चुनाव आयुक्त बने?
ब्रूट इंडिया के अनुसार वे 19 फरवरी 2025 को राजीव कुमार के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त बने। इससे पहले मार्च 2024 में वे चुनाव आयुक्त बने थे।
ज्ञानेश कुमार ने कहां से पढ़ाई की?
ब्रूट इंडिया के अनुसार उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग की। उन्होंने बिज़नेस फाइनेंस और पर्यावरण अर्थशास्त्र की पढ़ाई भी की।
SIR क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया है। 42 पूर्व न्यायाधीशों के पत्र के अनुसार इसका उद्देश्य मृत, दोहरे और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और पात्र नागरिकों को जोड़ना है। प्रक्रिया की सही जानकारी के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित किया?
नहीं। एएनआई के अनुसार 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश देने से इनकार किया और चुनाव आयोग से जवाब मांगा। मामला अभी विचाराधीन है।
क्या आरोप साबित हुए हैं?
नहीं। विपक्ष, सीजेपी और याचिकाकर्ता के आरोप और मांगें हैं। चुनाव आयोग ने इन्हें खारिज किया है और अदालत ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
ताज़ा जानकारी कहां देखें?
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट और प्रमुख समाचार संस्थानों की खबरें सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं।
यह लेख 13 अक्टूबर 2026 को जांचा गया। स्रोत: ब्रूट इंडिया (5 अक्टूबर 2026), खलीज टाइम्स/एएनआई (5 अक्टूबर 2026), ओडिशाबाइट्स (8 अक्टूबर 2026), बिज़नेस स्टैंडर्ड (9 अक्टूबर 2026), विकिपीडिया (जन्मतिथि, पूर्व पदों की तारीखें)। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट सामान्य रूप से खुली, पर प्रोफाइल पेज हम खोल नहीं पाए। मामला अदालत में है और स्थिति बदल सकती है।