देव उठनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी और प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग-निद्रा के बाद जागते हैं, जिसे चातुर्मास का अंत माना जाता है। इसी के बाद शादी-ब्याह और दूसरे मांगलिक कार्य फिर से शुरू होते हैं। यहाँ 2026 की तारीख, पारण का समय, पूजा-विधि और व्रत के नियम दिए गए हैं।
देव उठनी एकादशी 2026 कब है?
इस साल देव उठनी एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 को है। जिन पंचांगों को हमने देखा, उनके अनुसार एकादशी तिथि 20 नवंबर की सुबह लगभग 7:15 बजे शुरू होकर 21 नवंबर की सुबह लगभग 6:31 बजे तक रहती है। व्रत का पारण द्वादशी पर, यानी 21 नवंबर को सूर्योदय के बाद किया जाता है। समय अनुमानित हैं, इसलिए अपने शहर के पंचांग से मिला लें।
देव उठनी एकादशी का महत्व
आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) से भगवान विष्णु के शयन में जाने की मान्यता है, और कार्तिक शुक्ल एकादशी को वे जागते हैं। इसीलिए इस दिन से विवाह जैसे शुभ कार्य दोबारा शुरू होने की परंपरा है। इसी दिन के आस-पास तुलसी विवाह भी होता है।
पूजा-विधि
- सुबह स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
- घर के आँगन या पूजा स्थान में चौक बनाएँ और भगवान विष्णु के चरणों के चित्र बनाएँ।
- शाम को गन्ने का मंडप बनाकर उसके नीचे विष्णु जी की मूर्ति, तुलसी का पौधा और शालिग्राम रखें।
- फल, गन्ना, सिंघाड़ा, मूँगफली, मिठाई, फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
- दीया जलाकर विष्णु जी की आरती करें और “देवउठनी” के गीत गाएँ।
- कई घरों में थाली बजाकर या शंख-घंटी बजाकर भगवान को जगाने की परंपरा है।
- अगले दिन द्वादशी को पारण करें, और जरूरतमंद को भोजन या दान दें।
व्रत के नियम
- एकादशी पर अनाज, दाल और चावल नहीं खाए जाते। फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, आलू और सेंधा नमक का सेवन परंपरा में मान्य है।
- तुलसी के पत्ते एकादशी पर तोड़ने की मनाही है, इसलिए एक दिन पहले तोड़कर रख लें।
- पारण सूर्योदय के बाद, द्वादशी तिथि में करें।
- बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग लोग सेहत को ध्यान में रखकर फलाहार करें और डॉक्टर से सलाह लें।
क्या खाएँ, क्या न खाएँ
- खा सकते हैं: फल, मेवे, दूध-दही, साबूदाने की खिचड़ी, सिंघाड़े या कुट्टू की पूरी, आलू की सब्ज़ी, मखाने, सेंधा नमक।
- न खाएँ: चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़-लहसुन, सामान्य नमक और मांसाहार।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
देव उठनी एकादशी 2026 में कब है?
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026। पारण 21 नवंबर को सूर्योदय के बाद।
देव उठनी एकादशी पर शादी क्यों शुरू होती है?
मान्यता है कि चातुर्मास में शुभ कार्य वर्जित होते हैं और विष्णु जी के जागने के बाद फिर से शुरू होते हैं।
तुलसी विवाह कब होता है?
उत्तर भारत में अक्सर देव उठनी एकादशी की शाम को, जबकि कई क्षेत्रों में द्वादशी से कार्तिक पूर्णिमा के बीच। विस्तार के लिए हमारा तुलसी विवाह पेज पढ़ें।
इन्हें भी पढ़ें: तुलसी विवाह 2026, कार्तिक पूर्णिमा, दिवाली और त्योहार कैलेंडर।
धार्मिक मान्यताएँ और रीति-रिवाज परंपरा पर आधारित हैं और क्षेत्र व परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं।



