पार्वती चालीसा क्या है?
पार्वती चालीसा हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी माँ पार्वती को समर्पित चालीस चौपाइयों की स्तुति है। इसमें माता के रूप-सौंदर्य, कैलास निवास, गंगा से जुड़े प्रसंग और उमा नाम पड़ने वाली कठोर तपस्या का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि श्रद्धा से इसका पाठ करने पर घर में शांति, सौभाग्य और पारिवारिक सामंजस्य बना रहता है। सोमवार, नवरात्रि और हरतालिका तीज पर इसका पाठ विशेष रूप से प्रचलित है।
पार्वती चालीसा का पूरा पाठ
नीचे दोहा, चालीस चौपाइयाँ और समापन दोहा परंपरागत क्रम में दिए गए हैं। पेज को प्रिंट करके आप इसे अपनी पूजा-पुस्तिका की तरह भी रख सकते हैं।
॥ दोहा ॥
जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि ।
गणपति जननी पार्वती अम्बे! शक्ति! भवानि ॥
॥ चौपाई ॥
ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे ।
पंच बदन नित तुमको ध्यावे ॥
षड्मुख कहि न सकत यश तेरो ।
सहसबदन श्रम करत घनेरो ॥
तेऊ पार न पावत माता ।
स्थित रक्षा लय हिय सजाता ॥
अधर प्रवाल सदृश अरुणारे ।
अति कमनीय नयन कजरारे ॥
ललित ललाट विलेपित केशर ।
कुंकुंम अक्षत शोभा मनहर ॥
कनक बसन कंचुकि सजाए ।
कटी मेखला दिव्य लहराए ॥
कंठ मदार हार की शोभा ।
जाहि देखि सहजहि मन लोभा ॥
बालारुण अनंत छबि धारी ।
आभूषण की शोभा प्यारी ॥
नाना रत्न जड़ित सिंहासन ।
तापर राजति हरि चतुरानन ॥
इन्द्रादिक परिवार पूजित ।
जग मृग नाग यक्ष रव कूजित ॥
गिर कैलास निवासिनी जय जय ।
कोटिक प्रभा विकासिनी जय जय ॥
त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी ।
अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी ॥
हैं महेश प्राणेश तुम्हारे ।
त्रिभुवन के जो नित रखवारे ॥
उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब ।
सुकृत पुरातन उदित भए तब ॥
बूढ़ा बैल सवारी जिनकी ।
महिमा का गावे कोउ तिनकी ॥
सदा श्मशान बिहारी शंकर ।
आभूषण हैं भुजंग भयंकर ॥
कण्ठ हलाहल को छबि छायी ।
नीलकण्ठ की पदवी पायी ॥
देव मगन के हित अस किन्हो ।
विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो ॥
ताकी तुम पत्नी छवि धारिणी ।
दुरित विदारिणी मंगल कारिणी ॥
देखि परम सौंदर्य तिहारो ।
त्रिभुवन चकित बनावन हारो ॥
भय भीता सो माता गंगा ।
लज्जा मय है सलिल तरंगा ॥
सौत समान शम्भू पहआयी ।
विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी ॥
तेहि कों कमल बदन मुरझायो ।
लखी सत्वर शिव शीश चढ़ायो ॥
नित्यानंद करी बरदायिनी ।
अभय भक्त कर नित अनपायिनी ॥
अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनी ।
माहेश्वरी हिमालय नन्दिनी ॥
काशी पुरी सदा मन भायी ।
सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी ॥
भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री ।
कृपा प्रमोद सनेह विधात्री ॥
रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे ।
वाचा सिद्ध करि अवलम्बे ॥
गौरी उमा शंकरी काली ।
अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली ॥
सब जन की ईश्वरी भगवती ।
पतिप्राणा परमेश्वरी सती ॥
तुमने कठिन तपस्या कीनी ।
नारद सों जब शिक्षा लीनी ॥
अन्न न नीर न वायु अहारा ।
अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा ॥
पत्र घास को खाद्य न भायउ ।
उमा नाम तब तुमने पायउ ॥
तप बिलोकी ऋषि सात पधारे ।
लगे डिगावन डिगी न हारे ॥
तब तब जय जय जय उच्चारेउ ।
सप्तऋषि निज गेह सिद्धारेउ ॥
सुर विधि विष्णु पास तब आए ।
वर देने के वचन सुनाए ॥
मांगे उमा वर पति तुम तिनसों ।
चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों ॥
एवमस्तु कही ते दोऊ गए ।
सुफल मनोरथ तुमने लए ॥
करि विवाह शिव सों भामा ।
पुनः कहाई हर की बामा ॥
जो पढ़िहै जन यह चालीसा ।
धन जन सुख देइहै तेहि ईसा ॥
॥ दोहा ॥
कूटि चंद्रिका सुभग शिर, जयति जयति सुख खानि
पार्वती निज भक्त हित, रहहु सदा वरदानि ।
पाठ विधि
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थान पर बैठें।
- माता पार्वती और शिव परिवार की तस्वीर के सामने दीपक जलाएँ।
- फूल, अक्षत और फल अर्पित करें, फिर मन में अपनी प्रार्थना कहें।
- धीमे और स्पष्ट स्वर में दोहा, चौपाइयाँ और समापन दोहा पढ़ें।
- पाठ पूरा होने पर आरती करें और प्रसाद सबको बाँटें।
मान्यताएँ और ध्यान रखने की बातें
श्रद्धालु मानते हैं कि नियमित पाठ से मन में धैर्य और परिवार में प्रेम बढ़ता है। यह आस्था की बात है, किसी निश्चित परिणाम का दावा नहीं। पाठ करते समय मन शांत रखना सबसे ज़रूरी माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पार्वती चालीसा का पाठ कब किया जाता है?
परंपरा में सोमवार, नवरात्रि, तीज और महाशिवरात्रि पर यह पाठ अधिक किया जाता है। कई भक्त किसी भी शुभ दिन सुबह या शाम को शांत मन से पढ़ते हैं।
क्या इसे शिव चालीसा के साथ पढ़ सकते हैं?
हाँ, कई परिवारों में पहले पार्वती चालीसा और फिर शिव चालीसा पढ़ने की परिपाटी है। यह पूरी तरह आपकी श्रद्धा और सुविधा पर निर्भर है।
क्या महिलाओं के लिए कोई विशेष नियम है?
ऐसा कोई कठोर नियम नहीं है। स्त्री-पुरुष कोई भी श्रद्धा से पाठ कर सकता है। मान्यता है कि सुहागिनें तीज जैसे पर्वों पर इसे विशेष भाव से पढ़ती हैं।
क्या चालीसा याद करना ज़रूरी है?
नहीं। देखकर पढ़ना भी उतना ही मान्य है। इस पेज का पाठ सामने रखकर आराम से पढ़ा जा सकता है।
अंतिम जाँच: 16 अक्टूबर 2026